कनिका कपूर ने कहा डॉक्टर्स ने उनका खूब ध्यान रखा, अब करेंगी प्लाज़्मा डोनेट

Kanika Kapoor will donate her Plasma, what is Plasma Therapy
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Ground Report | News Desk

कोरोनावायरस ( Coronavirus) की वजह से हमारी ज़िंदगी में कई बदलाव आए हैं। जो लोग कोरोना से जंग लड़कर ठीक हो रहे हैं उनका भी ज़िंदगी के प्रति नज़रिया बदल रहा है। मशहूर सिंगर KANIKA KAPOOR कोरोनावायरस से जंग लड़कर अब पूरी तरह ठीक हो चुकी हैं और अपने परिवार संग समय बिता रही हैं। खुद जंग जीतने के बाद अब उन्होंने अन्य कोरोना संक्रमितों की जान बचाने का फैसला लिया है। कनिका कपूर अपना प्लाज़मा डोनेट (Plasma Donation) कर अब कई लोगों की ज़िदगी बचाएंगी। 20 मार्च को जब उनकी रिपोर्ट पॉज़िटिव आई थी तो सोशल मीडिया पर उनके गैरज़िम्मेदाराना व्यवहार की खूब आलोचना हुई थी।

लंदन से लौटकर कनिका 14 मार्च को लखनऊ आईं थी। यहां पहले वह ताज होटल रूकी थीं। वे लखनऊ में ही तीन पार्टियों में भी शामिल हुईं थीं। पार्टी में देश भर की नामचीन हस्तियों ने शिरकत की थी। इसमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंभी वसुंधरा राजे सिंधिया और उनके बेटे दुष्यंत सिंह परिवार संग शामिल हुए। वहीं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह व उनकी पत्नी ने भी शिरकत की थी। इसी पार्टी में पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद परिवार संग आए थे। यूपी के पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया, कुश भार्गव समेत राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की चर्चा रही। चर्चा है कि होली की पार्टी में बसपा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे अनंत मिश्र भी शामिल हुए। अंटू का तो वीडियो भी वायरल हुआ है। हालांकि इन सभी की कोरोना जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर कोरोना वायरस से जंग जीत चुकी हैं और अब अपने परिवार के साथ समय बिता रही हैं। लेकिनउनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। पुलिस टीम ने महानगर स्थित उनके शालीमार गैलेंट अपार्टमेंट में उन्हें नोटिस दिया। जिसके बाद से उन पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। कनिका कपूर के खिलाफ सरोजनी नगर थाने में दूसरों की जान खतरें में डालने सहित आईपीसी की धारा 188,269 और 270 के तहत केस दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने लंदन से आने के बाद खुद को क्वारंटीन नहीं किया और मुंबई से लेकर लखनऊ और फिर कानपुर में पार्टी करती रहीं। कोरोना संक्रमित होने से उनके साथ ही अन्य लोगों की भी जांच का खतरा उत्पन्न हो गया।

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ठीक होने के बाद कनिका कपूर ने जारी किया बयान

‘मैं 10 मार्च को ब्रिटेन से मुंबई आई और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मेरी नियमित जांच हुई। उस वक्त मुझे ऐसा कोई परामर्श नहीं दिया गया कि मुझे खुद को पृथक-वास में रखने की जरूरत है. मुझे अपनी तबीयत जरा भी खराब नहीं लगी तो मैंने खुद को पृथक-वास में नहीं रखा। ‘मैं अगले दिन यानी 11 मार्च को अपने परिवार से मिलने लखनऊ गई। घरेलू उड़ानों के लिए उस वक्त तक जांच की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। उसके बाद 14 और 15 मार्च को मैंने अपने मित्र द्वारा दिए गए लंच और डिनर कार्यक्रम में शिरकत की. मैंने कोई भी पार्टी आयोजित नहीं की और मैं पूरी तरह से ठीक थी।’ ‘मुझे 17 और 18 मार्च को कुछ लक्षणों का एहसास हुआ तो मैंने अपनी जांच का अनुरोध किया। मैं 19 मार्च को संक्रमित पाई गई और 20 मार्च को जब मुझे इस बारे में पता चला, तो मैंने अस्पताल जाना बेहतर समझा. मुझे तीन बार जांच में संक्रमित नहीं जाए जाने के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई। ‘मैं उन डॉक्टरों और नर्सेज का खासतौर पर शुक्रिया अदा करना चाहूंगी, जिन्होंने मेरे बेहद भावुक और कड़ी परीक्षा वाले लम्हों में मेरा बहुत ख्याल रखा। मैं उम्मीद करती हूं कि मैं इस मामले को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ संभाल सकती हूं।’

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क्या है प्लाज़मा थेरेपी?

प्लाज्मा खून मे मौजूद पीले रंग का तरल होता है। रेड ब्लड सेल, वाइट ब्लड सेल और प्लेट्लेट्स आदि को अलग करने के बाद प्लाज्मा बचा है।प्लाज्मा को आप शरीर का एक ऐसा शूरवीर मान सकते हैं, जो वायरसों को मार भगता है। यह वायरसों के खिलाफ एंटीबॉडी बनाता है और फिर वायरस का काम तमाम करती है। कोरोना अटैक के बाद मरीज के शरीर में प्लाज्मा का जरिए एंटिबॉडी बनने की ताकत सीमित या खत्म हो जाती है। इसलिए इस थेरपी की जरूरत पड़ी है। प्लाज्मा थेरेपी तकनीक के तहत कोविड-19 से ठीक हो चुके मरीजों के खून से एंटीबॉडीज लेकर उनका इस्तेमाल गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों के इलाज में किया जाता है। किसी मरीज के ठीक होने के बाद भी एंटीबॉडी प्लाज्मा के साथ शरीर में रहती हैं, फिर बीमार के शरीर में यह स्वस्थ प्लाज्मा फिर ये नए ‘शूरवीर’ एंटिबॉडी पैदा करने लग जाता है, जिससे माना जा रहा है कि कोरोना हार जाता है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुताबिक 4 मरीजों में प्लाज्मा थेरपी के उत्साहजनक नतीजे मिले हैं। इससे पहले ICMR के मुताबिक एक गर्भवती महिला समेत चार मरीजों पर इस परीक्षण को देखा गया और पाया गया कि बाद में इन सभी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। प्लाज्मा थेरपी के ऐसे ही एक अध्ययन में गंभीर रूप से बीमार 10 लोगों में 200 मिलीलीटर प्लाज्मा चढ़ाया गया और तीन दिन में उनकी हालत में सुधार दिखा। तमिलनाडु, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, गुजरात में इस पर काम चल रहा है, जबकि कई दूसरे राज्य भी आईसीएमआर से इजाजत की इंतजार में है।

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यह कोई नया इलाज नहीं है। यह 130 साल पहले यानी 1890 में जर्मनी के फिजियोलॉजिस्ट एमिल वॉन बेह्रिंग ने खोजा था। इसके लिए उन्हें नोबेल सम्मान भी मिला था। यह मेडिसिन के क्षेत्र में पहला नोबेल था।

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