कन्हैया कुमार बिहार चुनाव के लिए बदल गए हैं क्या

बदले-बदले से नज़र आते हैं कन्हैया कुमार, आज़ादी की गूंज अब रैलियों में नहीं

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लोकसभा चुनावों में बेगुसराय सीट से गिरिराज सिंह से हारने वाले कन्हैया कुमार बिहार के विधानसभा चुनावों में कम्यूनिस्ट पार्टी की तरफ से महागठबंधन का प्रचार कर रहे हैं। कन्हैया का चुनिंदा सीटों पर प्रचार के लिए उतारा गया है। लेकिन इस बार उनकी रैलियों में लगने वाले आज़ादी के नारे नदारद दिखाई देते हैं। क्या ऐसा किसी सोची समझी रणनीति के तहत किया गया है? क्या कन्हैया यह जान चुके हैं के उन पर लगा एंटी नेशनल का दाग उनके राजनीतिक भविष्य के लिए ठीक नहीं है। आईये इन्हीं सवालो के जवाब खोजने की कोशिश करते हैं।

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कौन हैं कन्हैया कुमार?

कन्हैया कुमार को देश में हर कोई जानता है। कोई जेएनयू में आज़ादी के नारे लगाने वाले के रुप में तो कोई टुकड़े-टुकड़े गैंग के सरगना के रुप में। कोई उन्हें देश तोड़ने वाला कहता है तो कोई उनके सरकार से तीखे सवाल पूछने के ढंग का फैन भी है। कन्हैया कुमार पर जवाहर लाल नेहरु युनिवर्सिटी में भारत तेरे टुकड़े होगें जैसे नारे लगाने का आरोप लगा। इसके लिए उनपर देशद्रोह का मुकदमा भी दर्ज किया गया। लेकिन अभी तक यह साबित नहीं हुआ कि यह नारे कन्हैया ने लगाए थे या नहीं। कन्हैया कुमार बिहार के ही एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। लोकसभा चुनावों में कन्हैया ने बेगुसराय सीट से चुनाव लड़ा और तीसरे नंबर पर आए। अब कन्हैया बिहार चुनावों में तेजस्वी नीत महागठबंधन का हिस्सा हैं वो सीपीएम की ओर से प्रचार करने निकले हैं।

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कन्हैया ने क्यों किया आज़ादी वाले नारे से परहेज़?

कन्हैया के तीखे भाषण लोगों को उनकी रैली में खींच लाते हैं। लोग उन्हें सुनने के लिए भारी मात्रा में आते हैं। सीएए एनआरसी का विरोध करने के लिए उन्होंने बिहार में रैलियां की जहां कई लोगों को वो अपने तक खींच लाए। लोगों को आकर्शित करने की उनकी कला से तेजस्वी यादव भी वाकिफ हैं। लेकिन जानकार बताते हैं कि राजद के उम्मीदवारों ने खास तौर पर यह मांग रखी है कि कन्हैया उनका प्रचार करने न आए। शायद उनकी देश विरोधी छवि से गठबंधन के लोग सहज नहीं हैं। कन्हैया केवल चुनिंदा सीटों पर ही महागठबंधन के प्रत्याशियों का प्रचार करेंगे। जहां भी वो प्रचार करेंगे वहां आज़ादी के नारे से परहेज़ करने को कहा गया है। साथ ही उनसे केवल गरीबी, भ्रष्टाचार, किसान और मज़दूर पर ही बात करने को कहा गया है।

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हाल ही में कन्हैया के साथी उमर खालिद पर दिल्ली में दंगे भड़काने के आरोप में यूएपीए के तहत केस दर्ज किया इस पर भी कन्हैया खामोश रहे। ट्विटर पर भी कन्हैया केवल चुनिंदा मुद्दों पर ही तुली हुई प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

कन्हैया की राजनीतिक रणनीति

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कन्हैया ने बिहार चुनावों पर कई बातें सामने रखीं। उन्होंंने कहा कि बिहार चुनाव में नीतीश कुमार से लोग खफा हैं। यह चुनाव बीजेपी पर रिफरेंडम की तरह नहीं देखा जा सकता। तेजस्वी की रैलियों में आने वाली भीड़ साफ दिखाती है कि बिहार की जनता नीतीश से परेशान है। यह साफ है कि बिहार चुनाव के बाद नीतीश कुमार कमज़ोर हो जाएंगे और भाजपा मजबूत। अगर एनडीए को चुनावों में शिकस्त नहीं मिली तो भाजपा सत्ता में आ जाएगी।

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चुनावों के लिए कन्हैया कुमार बदल गए हैं। यह साफ देखा जा सकता है। वो जानते हैं कि उन्हें अपना जनाधार बढ़ाने के लिए अपनी छवि बदलनी होगी।

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