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कोरोना के सहारे कमलनाथ, सुप्रीम कोर्ट पहुंची बीजेपी

Kamalnath government floor test
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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

मध्यप्रदेश का सियासी संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। सिंधिया के इस्तीफे के बाद अल्पमत में आई कमलनाथ सरकार हर संभव प्रयास कर रही है अपनी सरकार बचाने को। माना जा रहा था कि विधानसभा सत्र शुरु होते ही मध्यप्रदेश में फ्लोर टेस्ट होगा और स्थिति कुछ साफ हो जाएगी। लेकिन कमलनाथ सरकार नें फ्लोर टेस्ट नहीं होने दिया उन्होंने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर कहा कि फ्लोर टेस्ट कराने का संवैधानिक अधिकार स्पीकर का है इसमें राज्यपाल दखल नहीं दे सकते। हंगामे के साथ शुरु हुआ सत्र 26 मार्च तक स्थगित कर दिया गया है। माना जा रहा है कि सदन स्थगित होने के बाद मिले समय में कमलनाथ प्लान बी पर काम कर सकते हैं।

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खतरा गंभीर है

बीजेपी ने राज्यपाल लालजी टंडन से मिलकर अपने 106 विधायकों की परेड कराई और राज्यपाल को इस बात से अवगत करवाया कि कमलनाथ सरकार अल्पमत में है। राज्यपाल ने बीजेपी विधायकों को आश्वासन दिया की राज्य में संवैधानिक अधिकारों का हनन नहीं होने देंगे। उन्होंन चिट्ठी लिख कमलनाथ को जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट करवाने को कहा। अगर वे देरी करेंगे तो राज्यपाल मान लेंगे की उनकी सरकार अल्पमत में है। इधर कांग्रेस से टूटे 22 विधायकों ने इस्तीफा भेज दिया है और यह तय है कि अब वे कांग्रेस में वापसी नहीं करेंगे । ऐसे में कमलनाथ सरकार के सभी रास्ते बंद हो गए हैं।

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क्या है प्लान बी?

सिंधिया के साथ गए विधायकों की वापसी न होने के बाद कमलनाथ प्लान बी पर काम कर सकते हैं। विधानसभा का सत्र 26 मार्च तक स्थगित कर दिया गया है। इससे कांग्रेस को कुछ समय मिला है जिसमें बीजेपी के विधायकों को तोड़ने की कोशिश की जा सकती है। लेकिन बीजेपी के विधायकों को तोड़ना आसान नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?

बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है जिसकी सुनवाई मंगलवार को होनी है। सुप्रीम कोर्ट राज्य में फ्लोर टेस्ट का आदेश जारी कर सकता है।

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कोरोना फैक्टर

देश और दुनिया कोरोना के संकट से जूझ रही है, ऐसे में मध्यप्रदेश का ज्यादा दिन सरकार विहीन रहना जनता को भारी पड़ सकता है। राज्य में जल्द से जल्द कोरोना से बचाव के लिए कदम उठाने की ज़रुरत है। कमलनाथ कोरोना संकट को देखते हुए विधानसभा स्थगित करवा सकते हैं जिससे उन्हें थोड़ा और समय मिल सकता है।

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