कमला हैरिस

क्या है कमला हैरिस का भारत कनेक्शन, जिन्हें जो बाइडेन ने अपना उप-राष्ट्रपति चुना है

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अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार जो बाइडन ने कमला हैरिस को उप-राष्ट्रपति पद के लिए चुना है। यानी अगर जो बाइडन चुनाव जीतते हैं तो कमला हैरिस उप-राष्ट्रपति बनेंगी।

कमला हैरिस भी डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए लड़ रही थी। लेकिन शुरूआती चरण में ही पिछड़ने के कारण उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था। लेकिन जैसे ही जो बाइडन ने उप राष्ट्रपति पद के लिए उनके नाम की घोषणा की। अमेरिका के साथ ही भारत में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। यहां लोगों की अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में दिलचस्पी भी बढ़ गई है।

कौन है अमेरिकी उप-राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैरिस

कमला हैरिस खुद को अफ्रीकन-अमेरिकन मूल की बताती हैं। कमला का जन्म कैलिफोर्निया के ओकलैंड में हुआ था। उनके माता-पिता की बात करें, तो उनकी मां भारतीय मूल की थी। वहीं, पिता जमाइका के थे। कमला की मां श्यामला गोपालन दरअसल भारत में मूलतः चेन्नई शहर की थी। दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह आगे की शिक्षा के लिए वो अमेरिका चली गई।

वहीं, उनकी मुलाकात जमाइका के डोनाल्ड हैरिस से हुई। फिर शादी हुई। और दो बच्चियां हुई। जिनमें से एक कमला हैरिस हैं। इस तरह अपनी मां के कारण उनका संबंध भारत से भी जुड़ जाता है। और भारतीयों की उनमें बढ़ी दिलचस्पी के पीछे वजह भी यही है। कमला हैरिस ने हावर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। हावर्ड के बाद उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और वकालत करने लगी।

इसके बाद वो अमेरिका के सबसे बड़े राज्य कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल बनीं। इस पद पर पहुंचने वाली वो पहली महिला और साथ ही पहली अफ्रीकी-अमेरिकी महिला थी। वह दो बार अटॉर्नी जनरल रहीं और 2017 में वो सांसद बन गई। ऐसा करने वाली वो दूसरी काली महिला थी। वहीं, अगर भविष्य में कमला उप-राष्ट्रपति बनती हैं, तो अमेरिका के इतिहास में पहली बार होगा जब कोई ब्लैक महिला को यह पद मिलेगा।

कमला हैरिस के अमेरिकी उप-राष्ट्रापति उम्मीदवार के रूप में मायने

कमला हैरिस को उप राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने के पीछे कई मायने निकाले जा रहे हैं। इसमें सबसे पहले आता है कमला का प्रवासी समुदाय की तरफ अपील। कमला हैरिस खुद को अफ्रीकी-अमेरिकी मूल की बताती हैं। वहीं, उनकी भारतीय मूल से रिश्ता भी जगजाहिर है। ऐसे में, माना जा रहा है कि कमला इन दोनों समुदायों को साधने में सक्षम हैं।

फिलहास अमेरिका के कुल आबादी में अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय लगभग 13.4 प्रतिशत है। वहीं, भारतीय मूल के वोटरों की संख्या मोटामाटी 18 लाख के करीब है। ये दोनों ही समुदाय राजनीतिक रूप से अमेरिका में काफी सक्रिय भी रहते हैं। और यह वजहें ही हैरिस की उम्मीदवारी को मजबूती देती हैं।

इसके अलावा कमला ब्लैक समुदाय के अधिकारों को लेकर भी मुखर रही हैं। हाल में चल रहे ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन को भी उनका पूरा समर्थन है। ऐसे में, कमला रिपब्लिकन पार्टी से नाराज चल रहे अश्वेत समुदाय का समर्थन डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकती है।

इसी के साथ कमला की तेज-तर्रार छवि और वाक-कला में मुखर अतिरिक्त बोनस जैसा है। कमला किसी भी मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय और विरोधियों से तीखे सवाल के लिए भी जानी जाती है। यह सारी बातें डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

इस तरह वर्तमान के हालात और भविष्य की चुनौतियों को कमला हैरिस और जो बाइडन कैसे संभालते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। क्योंकि अमेरिका राष्ट्रपति चुप बैठने वालों में से नहीं है। और इस उम्मीदवारी पर उनकी प्रतिक्रियाएं तो पहले ही सुर्खियां बनाने लगी हैं।

Written By Jagriti RaiShe is a Journalism Graduate from the Indian Institute of Mass Communication, New Delhi.

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