3000 डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा तो सरकार ने थमाया हॉस्टल खाली करने का नोटिस

Ground Report | News Desk | Doctors Strike | Doctors on strike asked to vacate hostel | लगभग 3,000 जूनियर डॉक्टरों और मध्य प्रदेश सरकार के बीच चल रही झड़प शनिवार को भी ज़ारी रही, जिसके साथ विरोध के 6 दिन भी पूरे हो गए। हाई कोर्ट द्वारा उनकी हड़ताल को अवैध बताने के बावजूद डॉक्टरों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया और अपनी बात पर अडिग रहे। शनिवार को राज्य सरकार ने उन डॉक्टरों को नोटिस भेजा, जिन्होंने गुरुवार को उच्च न्यायलय के आदेश के विरोध में इस्तीफा दे दिया था, ताकि वे अपने छात्रावास खाली करें।

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मध्य प्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) की सचिव अंकिता त्रिपाठी ने मीडिया को बताया की “हमारा शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा। उन्होंने हमें भोपाल में सरकारी छात्रावास खाली करने के लिए कहा है, और बांड शुल्क, जो कई लाख रुपये में आता है, का भुगतान करने के लिए कहा है। जब वे हमें बेदखली नोटिस दे सकते हैं, तो हमारा वजीफा (stipend) बढ़ाने के लिए एक लिखित आदेश जारी क्यों नहीं कर सकते?” त्रिपाठी ने कहा कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की अभी कोई प्लान नहीं है, वही कुछ लोगों ने कहा की वह इसे विकल्प के तौर पर देख रहे है।

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इस बीच, मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने स्टायपेंड में 17 प्रतिशत की वृद्धि की थी, लेकिन डॉक्टर अड़े थे कि इसे 24 प्रतिशत किया जाना चाहिए। राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर वजीफा बढ़ाने के साथ-साथ उनके और उनके परिजनों के लिए मुफ्त COVID-19 इलाज की मांग कर रहे है।

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हॉस्टल खाली करने के नोटिस से इस पूरे विरोध (doctors strike) में नया मोड़ आ गया है। इससे साफ़ ज़ाहिर हो रहा है की न तो सरकार पीछे हटने को तैयार है और ना ही डॉक्टर। कोरोना महामारी के इस संकटमय समय में अगर डॉक्टर इस प्रकार काम छोड़ देंगे तो आम जनता की मुसीबतें और बढ़ेंगी। ऐसे में, सरकार जितना जल्दी इस पर अमल करें उतना बेहतर।

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