जेएनयू हिंसा: आंदोलन से हमले तक, आप पूरी क्रोनोलॉजी समझिये!

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ललित कुमार सिंह, ग्राउंड रिपोर्ट

जेएनयू में पिछले 72 दिन से फीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ विरोध चल रहा है जिसका नेतृत्व जेएनयू छात्रसंघ कर रहा है. इस पूरे आंदोलन में छात्रों ने कई बार राजधानी की अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन किया. कई बार दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई बार अपनी मांग रखने के लिए छात्रों को बेरहमी से सड़कों पर पीटा गया.

कैसे शुरू हुआ घटनाक्रम?

ये मुद्दा तब गरम हुआ जब जेएनयू प्रशासन ने 28 अक्टूबर को छात्रसंघ और छात्रों से बातचीत किए बिना नए हॉस्टल नियम पास कर दिये. उसके बाद कई दिनों तक फुल यूनिवर्सिटी स्ट्राइक हुई. इस बीच छात्रों ने संसद भवन, राष्ट्रपति भवन व मानव संसाधन मंत्रालय तक अलग-अलग तरीके से मार्च किया. लेकिन हर बार छात्रों को बीच रास्ते में ही रोककर कभी पीटा गया और गिरफ्तार किया गया. जेएनयू में 12 दिसंबर से सेमेस्टर परीक्षा होनी थी, लेकिन तब तक फीस वापसी का फैसला नहीं हुआ था इसलिए छात्रों ने परीक्षा का भी बहिष्कार करने का फैसला लिया. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सभी स्कूल और प्रशासनिक बिल्डिंग को अपने कब्ज़े लिया और सभी जगह तालाबंदी कर दी गयी. जिससे जो छात्र परीक्षा देने के पक्ष में थे उनको भी बहिष्कार करना पड़ा.

इससे पहले प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने जेएनयू उप कुलपति जगदीश मामिडाला के ऑफिस सहित लगभग पूरे एडमिन ब्लॉक को छतिग्रस्त किया, दीवारों पर अलग अलग भाषाओँ में नारे लिखे और अपनी नाराज़गी दर्ज़ कराई. छात्रों का कहना है कि उप कुलपति ने एक बार भी छात्रों की समस्याओं को सुनना ज़रुरी नहीं समझा. इसके बदले वह लगातार ट्वीट ही करते रहे.

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छात्रों द्वारा परीक्षा बहिष्कार के बाद प्रशासन ने छात्रों मेल के ज़रिये सूचना दी कि वह व्हाट्सप्प और ई-मेल पर भी परीक्षा के उत्तर भेज सकते हैं. छात्रों ने इस बात का ये कहकर बहिष्कार किया कि सरकार जेएनयू को व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी में बदलना चाहती है. बहुत कम लोगो ने प्रशासन द्वारा दिए गए इस विकल्प को चुना और लगभग पूरी यूनिवर्सिटी ने इस तरह से उत्तर भेजने की प्रक्रिया का विरोध किया.

बिना एग्जाम दिए रजिस्ट्रेशन ?

उसके बाद 30 दिसंबर को प्रशासन ने मेल भेजकर सभी छात्रों को बिना एग्जाम दिए रजिस्ट्रेशन कराने को कहा. कुछ छात्र रजिस्ट्रेशन कराने के पक्ष में थे. इस मेल में रजिस्ट्रेशन कराने की तारीख 1 जनवरी से 5 जनवरी तक की थी. उधर जेएनयू छात्र संघ ने सभी छात्रों से एकजुट होकर रजिस्ट्रेशन न कराने को कहा. कुछ छात्र फिर भी रजिस्ट्रेशन करना चाहते थे. 4 जनवरी को एबीवीपी के लोगो ने दो महीने से तालाबंद स्कूल ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज और स्कूल ऑफ़ लैंग्वेज को जाकर खुलवाया ताकि छात्र रजिस्टर कर सकें. रजिस्ट्रेशन का विरोध कर रहे छात्रों ने इस कदम का विरोध किया इस दौरान वहां दोनों गुटों में मारपीट भी हुई थी. वामपंथी संगठन का दावा है कि एबीवीपी बहला फुसलाकर छात्रों से रजिस्ट्रेशन करवाना चाहता था, ताकि फीस वापसी का आंदोलन खत्म हो जाए. एबीवीपी ऐसा सरकार के इशारों पर कर रही है यह दावा लेफ्ट संगठन के छात्रों ने किया.

अब जो छात्र रजिस्ट्रेशन कराने के पक्षधर थे उन्हें रोकने के लिए लेफ्ट संगठन के छात्रों ने सर्वर रुम में घुसकर उसे क्षतिग्रस्त कर निष्क्रीय कर दिया। ताकि इंटरनेट सेवा पूरे कैंपस में बाधित हो जाए और आपको बता दें कि जेएनयू कैंपस में वाई फाई के बिना रजिस्टर कराना संभव नहीं था। क्योंकि फीस जमा करने के बाद छात्रों को इंट्रानेट (INTRANET) के ज़रिये फाइनल रजिस्ट्रेशन कर अपने सेंटर जाकर डाक्यूमेंट्स जमा करने होते हैं.

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हिंसक हुआ विवाद !

इसके बाद दोनों गुटों ने अपने लोगों को इकट्ठा करना शुरु कर दिया. उसी दोपहर एडमिन ब्लॉक पर इकठ्ठा एबीवीपी के लोगो ने एनएसयूआई के एक कार्यकर्ता के साथ मारपीट की. माहौल बिगड़ना शुरू हो चुका था. कई छात्रों का ये भी कहना है कि इस घटना के बाद वामपंथी कार्यकर्ताओं ने पेरियार, नर्मदा, सतलज और माहि मांडवी हॉस्टल में जाकर छात्रों को पीटा.

शाम करीब 6 बजे जेएनयूटीए (JNUTA) और जेएनयू छात्र संघ का साबरमती ढाबे के पास टी पॉइंट पर पीस मार्च थ. टी पॉइंट पर उस समय करीब 500 लोग थे.  कुछ लोग वहां बोल रही छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष को सुन रहे थे, कुछ लोग फुटपाथ पर बैठे थे और कुछ छात्र साबरमती ढाबे पर थे. तभी बाहर से करीब 100 हथियारबंद  नकाबपोश अंदर आये और वहां अंधाधुंद मार पिटाई शुरू हो गयी. लाठी, लोहे की रोड व अन्य कई हथियारों से हमला किया. ये पूरी घटना मेन गेट पर तैनात दिल्ली पुलिस के सामने घटी लेकिन पुलिस ने भी उस भीड़ को रोकने की कोशिश नहीं की. फिर नकाबपोश हथियारबंद लोगों ने हॉस्टल के अंदर घुस कर भी मारपीट और तोड़फोड़ की. छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष सहित लगभग दो दर्जन छात्र गंभीर रूप से घायल हुए.

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कई छात्राओं के साथ बदसलूकी भी की गई. कैंपस में डर का माहौल देखने को मिला. हथियारबंद नकाबपोश भीड़ को देखते हुए वहां जमा छात्र छिपने के लिए इधर उधर भागे और कई छात्रों को जान बचाने के लिए बाथरूम में घंटों बंद रहना पड़ा. भीड़ ने टी पॉइंट पर खड़े वाहनों में भी तोड़फोड़ की.

एबीवीपी के थे नकाबपोश गुंडे?

लेफ्ट संगठन के छात्रों का दावा है कि इन नाकाबपोश गुंडों में दिल्ली यूनिवर्सिटी के एबीवीपी के लोग शामिल थे. जेएनयू एबीवीपी छात्रों की मदद से इन गुंडों ने चिन्हित कर छात्रों को पीटा. जबकि एबीवीपा का कहना है कि इस घटना में उनकी कोई भूमिका नहीं है. टाईम्स नाउ चैनल पर एबीवीपी की अनिमा सोनकर ने यह स्वीकार किया कि इस घटना में उनके संगठन के छात्र शामिल थे. वायरल हुए कुछ वीडियो और तस्वीरों की पड़ताल करने पर भी एबीवीपी की संलिप्तता ज़ाहिर होती है.

इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस ने शुरु कर दी है. धीरे-धीरे इस घटना की सारी हकीकत सामने आने लगेगी. जामिया यूनिवर्सिटी के बाद जेएनयू में इस तरह की घटना बेहद भयावह है. देश भर के विश्वविद्यालयों में इस घटना के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं. यह बहुत ही हैरान करने वाला है कि देश की राजधानी के बेहद ही सुरक्षित इलाके में स्थित जेएनयू में कैसे खुलेआम गुंडे नारे लगाते हुए दाखिल हो जाते हैं और सुरक्षा व्यवस्था उन्हें रोकने में नाकाम रहती है.