JNU Violence: जेएनयू बंद कराना चाहता है जेएनयू प्रशासन, मंत्रालय ने किया इनकार

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ग्राउंड रिपोर्ट, नई दिल्ली
रविवार को जेएनयू में नकाबपोश भीड़ द्वारा हिंसा की गयी. हिंसा के बाद प्रशासन ने मंत्रालय को पूरी यूनिवर्सिटी को बंद करने का सुझाव दिया. लेकिन मानव संसाधन मंत्रालय ने इस सुझाव को स्वीकार न करते हुए प्रशासन को हालात सामान्य करने को कहा.

मंत्रालय और जेएनयू प्रशासन की 6 जनवरी को हुई बैठक में जेएनयू प्रशासन ने सुझाव दिया की पूरी यूनिवर्सिटी ही बंद कर देनी चाहिए. हालांकि उप कुलपति जगदीश मामिडला इस बैठक में नज़र नहीं आये. मंत्रालय को दी गयी इस रिपोर्ट में प्रशासन ने इस पूरी स्थिति के ज़िम्मेदार प्रदर्शन कर रहे छात्रों को माना है . और साथ ही जेएनयू एडमिन ब्लॉक और सर्वर रूम में तोड़फोड़ का भी हवाला दिया. लेकिन नकाबपोश भीड़ अंदर कैसे आयी? इस सवाल का रिपोर्ट में कोई जवाब नज़र नहीं आया. बल्कि ये कहा गया कि जो छात्र रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते थे उनको रोकने के लिए दूसरे छात्र उग्र हो गए थे.

प्रशासन का कहना है “जब कुछ छात्र रेसिट्रेशन करवाने आये तो दूसरे छात्रों ने विरोध कर उनसे मारपीट की. प्रशासन ने तुरंत पुलिस को बुलाया, लेकिन जब तक पुलिस वहां पहुंची तब तक मारपीट हो चुकी थी.” रिपोर्ट में ये भी लिखा गया की कुछ नकाबपोश पेरियार हॉस्टल में भी गए और वहां जाकर तोड़फोड़ की जबकि प्रशासन ने साबरमती हॉस्टल वाली घटना पर रिपोर्ट में कुछ नहीं कहा. मंत्रालय ने जेएनयू बंद करने पर प्रशासन को जेएनयू में हालात सामान्य करने को कहा .

आपको बता दे की बीते रविवार को जेएनयू में करीब 70 नकाबपोश हथियारबंद लोगो की भीड़ यूनिवर्सिटी में घुसी और शान्ति मार्च कर रहे छात्र व शिक्षकों पर जानलेवा हमला किया. छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष व् अन्य कई छात्र और शिक्षक गंभीर रूप से घायल हुए. इस हमले के बाद देश भर में इसकी निंदा हुई. इस हमले की जिम्मेदारी एक हिन्दू संगठन हिन्दू रक्षक दल के पिंकी चौधरी ने ली है.

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