Home » HOME » झारखंड : भाजपा की हार के ‘खलनायक’ साबित हुए सरयू राय, मोदी के हाथ से छिना एक और राज्य

झारखंड : भाजपा की हार के ‘खलनायक’ साबित हुए सरयू राय, मोदी के हाथ से छिना एक और राज्य

Jharkhand Election 2019, JMM, Congress, hemant soren, cm hemant soren, BJP, PM Modi, Amit Shah, Rahul Gandhi, Raghuvar Das, Saryu rai,
Sharing is Important

Ground Report News Desk | New Delhi

झारखंड चुनाव 2019 के नतीजे आ चुके हैं। झारखंड से मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार का सूपड़ा साफ हो चुका है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल (राजद) गठबंधन को झारखंड विधानसभा चुनाव में स्पष्ट जनादेश मिला है। जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन वाली सरकार में हेमंत सोरेन का मुख्यमंत्री बनना तय है। मीडिया से बातचीत करते हुए हेमंत सोरेन ने अपनी जीत राज्य के लोगों को समर्पित करते हुए सहयोगी दलों का विश्वास जताने पर व्यक्त किया। इस चुनाव की 10 खास बातें…

1- 81 सीटों वाली झारखंड विधानसभा में सीधा मुकाबला बीजेपी और जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन के बीच रहा। जिसमें गठबंधन को कुल 47 सीटे मिली है जबकि बीजेपी महज 25 सीटों पर ही सिमट गई।

2- झारखंड के जननायक और जमीनी नेता रहे बीजेपी के सरयू राय टिकट कटने से नाराज़ थे। केंद्रीय मंत्री मंडल की ओर से उनके नाम पर सहमति नहीं बन पाई, जिससे सरूय राय का टिकट कटा। इसके बाद सरयू राय ने खुलकर पार्टी के इस फैसले का विरोध किया।

3- सरयू राय ने खुद जमशेदपुर ईस्ट विधानसभा के लिए निर्दलीय दावेदारी का चुनावी बिगुल फूंक दिया। यह सीट बीजेपी की सबसे सेफ सीटों में से एक रही है और इससे अब तक रघुवर दास दावेदारी कर विधासभा पहुंचे हैं। यह पहला मौका है जब रघुवर दास को इस सीट से हरा सरयू राय विधानसभा पहुंचे।

READ:  What is in Manish Tiwari's book that shocked congress?

4- झारखंड चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद हिन्दी पट्टी क्षेत्र में भाजपा का वर्चस्व तेजी से कम होता दिख रहा है। इस चुनाव का असर न सिर्फ दिल्ली बल्की बिहार और उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है।

5 – भले ही भाजपा 25 सीटों पर सिमट गई हो लेकिन इस चुनाव में उसका वोट प्रतिशत पिछली बार की तुलना में 3 प्रतिशत बढ़ा है और इतना वोट प्रतिशत कांग्रेस का भी बढ़ा है।

6 – झारखंड चुनाव 2019 में करीब 6 प्रमुख दल चुनावी मैदान में थे। इनमें से झारखंड की सबसे मजबूत मानी जाने वाली पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ कांग्रेस और बिहार का प्रमुख राजनैतिक दल आरजेडी चुनाव लड़ रहा था। वहीं राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बीजेपी के अलावा क्षेत्रीय पार्टी झारखंड विकास मोर्चा और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन मैदान में थी।

7 – इस चुनाव में जेएमएम को 30, कांग्रेस को 16 आरजेडी 1, बीजेपी 25, जेवीएम को 3, एजेएसयू को 2 सीटे मिली हैं। वहीं अन्य निर्दलीय 4 सीटें जीतने में सफल रहें।

8 – इस चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित कई अन्य मंत्री और कद्दावर विधायक अपनी सीट नहीं बचा पाए। इसे CAA का निगेटिव इफेक्ट कहें या बीजेपी के स्टार प्रचारक कहे जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कम होता जादू।

READ:  Colonel Viplav Tripathi, Braveheart killed in Manipur Terrorist attack

9- झारखंड चुनाव में भाजपा की ओर से आयोजित होने वाली लगभग सभी चुनावी रैलियों में राम मंदिर का मुद्दा सहित कई अन्य राष्ट्रीय मुद्दे छाए रहे लेकिन स्थानीय समस्याओं पर बात न होने से जनता खासा नाराज रही। जबकी गठबंधन लोकल मुद्दों को भुनाने में कामयाब रहा।

10 – शिबू सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा इस चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। सीटीजन अमेडमेंट एक्ट पास होने के बाद यह पहला चुनाव है जिसमें बीजेपी को शिक्सत का सामना करना पड़ा है।