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Jammu Kashmir: 74 साल बाद देखने को मिली बिजली, खुशी से फूले नहीं समाए लोग!

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Jammu & Kashmir: भारत एक समय पर सोने की चिड़िया होने के बावजूद भी आज एक ऐसी कगार पर खड़ा है जहां उसे विकासशील से विकसित होने में कितना समय लगेगा पता नहीं। हमने कई बार ऐसी रिपोर्ट्स को देखा और पढ़ा होगा जिसमे भारत की इस लाचारी का जिक्र हुआ होगा। आजादी के बाद कई आर्टिकल्स लिखे गए कई पिक्चर्स इनपर फिल्मा कर भी सरकार को जागरूक करने की कोशिश  की गई। बावजूद इसके हाथ लगी तो कुछ उन मनोबल की राख और स्थिर धैर्य जो की स्वतंत्रता के समय से लेकर अब तक चला आ रहा है।
Jammu & Kashmir: ऐसे में भारत सरकार ने कई सारी योजनाऐं चलाई लेकिन इनसब के होते हुए भी कुछ हाथ नहीं आया। भारत सरकार ने दिए सौभाग्य, दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY), और प्रधानमंत्री पैकेज(pradhanmantri package) जैसी कई योजनाओं के बावजूद, उधमपुर जिले(udhampur) के कई गांवों में अभी भी बिजली नहीं है।

1947 के बाद से इस गांव में रहने वाले लोगों ने कभी अपने गांव में बिजली नहीं देखी। ऐसे में उधमपुर के लाढा गांव में बिजली उपलब्ध कराने के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। इस गांव में आजादी के बाद से 74 सालों के बाद भी बिजली नहीं है। इसके प्रति अब कहीं जाकर सुनवाई को मौका मिल पाया है जिसके बाद 3 से 4 महीनो बाद बिजली मिलने का आश्वाशन लोगों को दिया गया है। इसके बाद से लोगों में खुशी की लहर दौड़ उठी है।

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लोगों ने बांटी अपनी पीड़ा

उधमपुर के लाढा गांव में बिजली उपलब्ध कराने के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। इस गांव में आजादी के बाद से 74 सालों के बाद भी बिजली नहीं है। विद्युत विकास विभाग के सहायक कार्यकारी अभियंता सुनील कुमार ने कहा कि ये काम 3-4 महीने के भीतर शुरू हो सकता है। स्थानीय निवासियों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लाढा गांव में लगभग 150 घरों में बिजली नहीं है। रात में पढ़ाई के लिए लकड़ी जलाकर उसी की रोशनी पर निर्भर रहना पड़ता है। इलाके के छात्रों को इसके चलते काफी परेशानी होती है क्योंकि वे ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाते हैं।

छात्रों ने बताया पढ़ाई में आने वाली बाधाओं के बारे में

एक छात्र ने कहा, “हमारे यहां बिजली नहीं है। हम लकड़ी का उपयोग करके अंधेरे में पढ़ते हैं और अब हमारी आंखों की रोशनी भी प्रभावित हो रही है। मैं सरकार से हमें जल्द से जल्द बिजली मुहैया कराने का अनुरोध करता हूं.” विद्युत विकास विभाग के सहायक कार्यपालक अभियंता सुनील कुमार ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया चल रही है और 3-4 महीने के भीतर काम शुरू हो सकता है।

जिला विकास परिषद के सदस्य ने कराया सच्चाई से रूबरू

जिला विकास परिषद (डीडीसी) के सदस्य, नरसू सुभाष चंदर ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि जिन गांवों में बिजली नहीं पहुंची है भारत सरकार उनके विद्युतीकरण के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में, उसने कई योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग के लापरवाह रवैये के कारण 150 घरों वाले सांकरी मोरा (वार्ड नंबर 6) में अब भी बिजली नहीं है। उन्होंने कहा कि वह समझते हैं कि छात्र सबसे ज्यादा पीड़ित हैं।

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देखते ही देखते 74 साल गुजर गए लेकिन इस गांव की पुकार किसी ने भी न सुनी लेकिन वो कहते है न की ईश्वर के घर देर भले ही है लेकिन अंधेर नहीं। ऐसा ही कुछ इन गांव वालो के साथ भी हुआ है। माना की इन्हे सिर्फ एक छोटी सी बिजली के लिए इतना इंतजार करना पड़ा लेकिन हकीकत तो कुछ यूं है कि उनके हौसलों ने उनकी आस को कभी पस्त होने ही नहीं दिया। शायद यही वजह है कि विकास के क्षेत्र में अविकसित देशों से एक कदम ऊपर ही पाया जाता है।

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