जमाल ख़ाशुक़्जी की हत्या का हुक्म सऊदी के सबसे बड़े अधिकारी की तरफ़ से आया था : अर्दोग़ान

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सऊदी अरब के पत्रकार जमाल ख़ाशुक्जी की हत्या के एक साल बाद एक नया मोड़ सामने आया है. जमाल की हत्या की जांच कर रही संयुक्त राष्ट्र की टीम ने उस गुप्त टेप को सुना जिसमें सऊदी अरब के डेथ स्कवाएड के लोग जमाल के शरीर के टुकडे-टुकडे करने की बात कर रहे थे.

इस केस की जांच कर रहीं संयुक्त राष्ट्र संघ की जांचकर्ता हेलेना कैनेडी ने कहा कि टेप की रिकार्डिंग में हत्यारे ख़ाशुक़्जी को बलि का बकरा कहते हुए सुनायी दे रहे थे. यह बात हो रही थी कि, “शरीर और कूल्हा इस बैग में फ़िट हो पाएगा या नहीं?” इस भयानक अपराध के वर्णन में यह भी है कि ख़ाशुक़्जी के हत्यारे उनके बदन के टुकड़े करने के बाद काफ़ी और सिगरेट पीने की बात कर रहे थे.

हेलेना कैनेडी का कहना है कि, “मेरे मन में ज़रा भी शक नहीं है कि यह बहुत ही सुनियोजित कार्यवाही थी जिसका हुक्म ऊपर से था. यह किसी सनकी की कार्यवाही नहीं थी.” संयुक्त राष्ट्र संघ की जांच टीम की सदस्य एग्नस कैलमर्ड ने कहा कि इस बात की भी संभावना है कि ख़ाशुक़्जी को लग रहा था कि उन्हें सिर्फ़ अग़वा किया जाएगा. संयुक्त राष्ट्र संघ की जांच टीम का कहना है कि इस टेप से सऊदी अरब के उस दावे का भी खंडन होता है जिसमें सऊदी अरब ने जमाल ख़ाशुक़्जी की हत्या को दुष्ट ऑप्रेशन कहा था.

कैलमर्ड का कहना है कि, “वह (ख़ाशुक़्जी) पूछ रहे थे कि क्या तुम ऐसा करोगे? क्या तुम मुझे इंजेक्शन लगाओगे?” इसके बाद जो आवाज़ सुनाई दी उससे लगता है कि उनका गला सिर पर प्लास्टिक बैग डाल कर घूंटा गया. इस गुप्त टेप में डेथ स्कवाएड का सरग़ना माहिर अब्दुल अज़ीज़ मुतरिब जो सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान का बॉडीगार्ड है और न्यायिक जांच करने वाले पैथलोजिस्ट सलाह अत्तुबैग़ी के बीच बातचीत भी मौजूद है.

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोग़ान का कहना है कि, “हम जानते हैं कि ख़ाशुक़्जी की हत्या का हुक्म सऊदी सरकार के सबसे बड़े अधिकारी की तरफ़ से आया था.” लेकिन इसके साथ ही अर्दोग़ान ने बिन सलमान का नाम नहीं लिया, सिर्फ़ इतना कहा कि यह आदेश सऊदी शासक सलमान ने नहीं दिया था. सिर्फ़ शासक सलमान ही सऊदी अरब की प्रशासनिक व्यवस्था में मोहम्मद बिन सलमान से ऊपर हैं.

इस निर्दयी हत्या के बारे में माना जाता है कि सऊदी युवराज बिन सलमान के आदेश से हुयी है. हालांकि सऊदी सरकार ने बिन सलमान के हत्या देने के आदेश का इंकार करते हुए दावा किया कि बदक़िस्मत पत्रकार की हत्या एक गुट ने की है, लेकिन इस मामले में तुर्की द्वारा सऊदी वाणिज्य दूतावास के भीतर की जो रिकॉर्डिंग पेश की गयी वह सबसे ज़्यादा विश्वसनीय है.