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मुनि तरुण सागर का वो सपना जो अधूरा रह गया

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न्यूज़ डेस्क।। जैन मुनि तरुण सागर चाहते थे कि या तो जैन समाज अपने मंदिर के दरवाज़े सभी के लिए खोल दे या महावीर को मंदिर की चार दीवारी से बाहर निकाल कर चौराहे पर लाए जहां से महावीर के विचार को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। उनका मानना था कि महावीर केवल जैनों के नहीं बल्कि पूरे विश्व के हैं। महावीर का अहिंसा मार्ग विश्व शांति के लिए ज़रूरी है। वो चाहते थे कि महावीर का संदेश दुनिया के हर कोने तक पहुंचना चाहिए।उन्होंने अपना पूरा जीवन इस उद्देश्य को पूरा करने में लगाया। भारत सहित 122 देशों में ज़ी टीवी के माध्यम से ‘महावीर वाणी’ के विश्वव्यापी प्रसारण की ऐतिहासिक शरुवात करने का प्रथम श्रेय तरुण सागर को ही जाता है।

तरुण सागर लाल किले से प्रवचन देने वाले पहले संत बने। भारतीय सेना को उपदेश देने के साथ उन्होंने देश की विधानसभाओं में भी प्रवचन दिए। मध्यप्रदेश विधानसभा में तरुण सागर ने कहा था कि देश के सबसे खूंखार लोग यहीं बैठे हैं। संतो को चाहिए कि पहले नेताओं को सुधारे बाकी जग तो वैसे ही सुधर जाएगा। तरुण सागर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गणवेश से चमड़े के बेल्ट को बाहर करवाया। साथ ही लाखों लोगों को मांसाहार त्याग करने के लिए प्रेरित किया।

तरुण सागर बेबाक़ी से राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार रखते थे। वो समाज मे सद्भाव और शांति चाहते थे उनका एक सपना था जो अधूरा रह गया। वो मज़्ज़िद और चर्च में प्रवचन देकर एकता का संदेश देना चाहते थे। साथ ही भारत के पड़ोसी देशों का पैदल सफर कर भारतीय संस्कृति का शंखनाद करना चाहते थे।

जैन मुनि तरुण सागर के कुछ अहम विचार, जो हर व्यक्ति को पढ़ना चाहिए-

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