पद्म श्री सम्मान: पेट के कैंसर से जूझते इस शख्स ने भूखों को खाना खिलाने में जीवन बिता दिया

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भारत सरकार ने शनिवार को 2020 के लिए पद्म पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है । इस बार 7 पद्म विभूषण, 16 पद्म भूषण और 118 पद्मश्री अवॉर्ड दिए जाएंगे। इसी में एक नाम है जगदीश लाल आहूजा का जिनको पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा जाएगा ।

पद्मश्री सम्मान से नवाज़े जाने वाले जगदीश लाल आहूजा को लोग लंगर बाबा के नाम से भी जानते हैं। बीते कई वर्षों से जगदीश लाल आहूजा रोज़ाना सैकडों ग़रीब मरीज़ों को मुफ्त में भोजन करवाते रहे हैं। उन्होंने ने इस तरह मुफ्त भोजन बांटने की शुरूआत 1980 में की थी। जगदीश लाल आहूजा के लंगर का ये सिलसिला लगभग 37 वर्ष पहले उनके बेटे के जन्मदिन पर शुरू हुआ था। उन्होंने सेक्टर-26 मंडी में लंगर लगाया था। उसके बाद से मंडी में लंगर लगने लगा। वर्ष 2000 में जब उनके पेट का ऑपरेशन हुआ तो पीजीआइ के बाहर लोगों की मदद करने का फैसला लिया और तब से उनका पीजीआइ के बाहर लंगर लगाने का सिलसिला आज भी जारी है।

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जगदीश बताते हैं कि, “मैं अपने परिवार के साथ 1947 में विभाजन के समय पाकिस्तान के पेशावर से भारत आ गया था । मेरा परिवार मानसा आया और फिर मैं रोपड़ में बस गया। जिसे आज चंडीगढ़ के नाम से जाना जाता है। तब मेरे पास जेब में कुछ ही पैसे थे। मैंने नई दिल्ली की पुरानी मंडी में सड़क के किनारे बैठे केले भी बेचे। PGI के बाहर लंगर शुरू करने का विचार मेरी आंतरिक आवाज़ थी। मैंने गरीबी और भुखमरी का सामना किया है। जब मुझे लगा कि मैं दूसरों को खिलाने में सक्षम हूं, तो मैंने लंगूर सेवा शुरू करने का फैसला किया। “

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आहूजा खुद पेट के कैंसर से पीड़ित हैं। वह ज्यादा चल फिर नहीं सकते हैं, लेकिन सेवा करने का उनका जज़्बा आज भी बरकरार है। जगदीश लाल का कहना है कि जब तक वह हैं तब तक लंगर बंद नहीं होगा।जगदीश लाल ने सरकार से मांग की है की उनकी इनकम को टैक्स फ्री कर दिया जाए, ताकि उनके बाद भी उनका यह लंगर जारी रहे। उन्होंने कहा उन्हें खुशी है कि सरकार ने एक रेहड़ी लगाने वाले को भी इतना बड़ा सम्मान दिया है। यह सम्मान पाकर वे बहुत ख़ुश हैं।

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