बिहार की ज्योति पर इवांका ट्रम्प का ट्वीट हमारी ग़रीब विरोधी व्यवस्था पर एक तारीफ नुमा तमाचा है

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Ground Report | News Desk

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी और सलाहकार इवांका ट्रम्प ने बिहार की 15 साल की बच्ची ज्योति के हौसले की तारीफ की है। ज्योति ने अपने जख्मी पिता को साइकिल पर बिठाकर 1200 किलोमीटर की दूरी तय की थी। वो 7 दिन साइकिल चलाकर अपने घर पहुंची थी। इवांका ने कहा है कि ज्योति ने जो किया, वह सहनशीलता और अपनों के लिए प्यार का एक खूबसूरत उदाहरण है। इससे भारत के लोगों की भावनाएं पता चलती हैं।

कोरोना संकट के कारण देश भर में पिछले देशव्यापी लॉकडाउन में कई प्रवासी मजदूर पैदल घर की ओर निकल पड़े। वहीं, ज्योति के पिता एक हादसे के बाद जख्मी थे इसलिए वो खुद आने में समर्थ नहीं थे । ऐसे में ज्योति ने अपने पिता को घर लाने की ठानी और 10 मई को गुरुग्राम से साइकिल से दरभंगा के लिए निकल पड़ी।

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ज्योति आखिरकार 16 मई को अपने घर पहुंची। रास्ते में तमाम कठिनाइयों के बाद भी ज्योति ने वो कर दिखाया जिसे सोच पाना भी नामुमकिन है। इस दौरान ज्योति की कई लोगों ने मदद भी की। ज्योति कहती हैं कि वे रात को किसी पेट्रोल पंप के पास रुक जाते थे और फिर सुबह आगे का सफर शुरू करते थे।

मगर सवाल ये है कि इवांका ट्रम्प की तारीफ हम भारतीयों के लिए ख़ुश होने का मकाम है या शर्म से डूब मरने का । एक लड़की जो अपने बीमार पिता को लेकर साईकिल से1200 KM का सफर तय करके शहर से गांव पहुंचती है, क्या ये हमारे ग़रीब विरोधी व्यवस्था और असंवेदनशील समाज होने का प्रमाण नहीं । सैकड़ों मज़दूर लॉकडाउन के कारण शहरों से पैदल गांव लौटते वक्त तड़प-तड़पकर मर गए। जिस सरकार ने ग़रीब तबके को ध्यान में रखे बग़ैर लॉकडाउन का फैसला लिया क्या उस सरकार ल़ॉकडाउन लगाने से पहले उस ग़रीब वर्ग के बारे में सोचना नहीं चाहिए था ?

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ईश्रवर न करे !! अगर इस सफर में ज्योति की मौत हो जाती तब हमारा सिस्टम और समाज उसकी मौत पर दुख तक न ज़ाहिर करता । इवांका ट्रम्प ने ज़्योति के सासह की तारीफं की है न कि ग़रीब विरोधी वय्वस्था की । ज्योति जैसी इस देश में लाखों-करोड़ों लड़कियां है। मगर पित्र सत्ता से पीडित हमारा समाज महिलाओं की कितनी इज़्ज़त करता है इसे बताने की ज़रूरत नहीं ।

ज्योति की ये कहानी शौर्य और जज्बे के साथ उस बदहाली और तकलीफ को भी दिखाती है, जो भारत का सच है। कामना कीजिए कि भारत से ऐसी कहानियां दुनिया तक न पहुंचे। विश्व की 17% आबादी भारत में रहती है। इनके कल्याण के बिना विश्व का कल्याण नामुकिन है।भारत HDI में 130वें नंबर पर है।

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ज्योति के हौसले को देख साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उन्हें ट्रायल के लिए बुलाया है। ट्रायल सफल रहती है तो ज्योति को दिल्ली में नेशनल साइक्लिंग एकेडमी में फेडरेशन के खर्च पर ट्रेनिंग दी जाएगी। ज्योति का कहना है कि इस ऑफर से बहुत खुश हूं, अगले महीने ट्रायल देने जाऊंगी।

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