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अख़बार में छप गई फ़ोटो लग गया समाचार लेकिन वास्तविकता कुछ और ही! ये अपना इटारसी है!

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Saurbh Dubey | Itarsi

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 91 किलोमीटर दूर इटारसी में आज के समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के अनुसार कंटेन्मेंट ज़ोन में कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए शुक्रवार को नगरपालिका के कर्मचारियों ने घर-घर जाकर कीटनाशक दवाइयां बांटी। घरों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट के लिए हॉटस्पॉट जीन मोहल्ला, हाजी मोहल्ला और जमानी वालों की चाल में पीली और काली पॉलीथिन दी गई। सीएमओ सीपी राय ने बताया कि गली मोहल्लों में सेनेटाइजर का छिड़काव भी करवाया जा रहा है।

लेकिन जमानी वाली चाल कंटेन्मेंट ज़ोन में सेनेटाइजर का छिड़काव तो किया गया लेकिन मेडिकल वेस्ट के लिए कोई भी पॉलीथिन नहीं दी गई और न ही कीटनाशक दवाओं का वितरण किया गया है। क्या नगर पालिका प्रशासन सिर्फ कुछ लोगों को सुविधा देकर फ़ोटो एवं वीडियो के सहारे सबूत इकट्ठा कर खानापूर्ति करने में जुटा है। जिससे उच्च अधिकारियों तक अपनी रिपोर्ट पहुंचा कर खानापूर्ति की जा सके! यदि नहीं तो क्यों झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं!

कोरोना संक्रमण के काल में समाचार पत्रों का व्यवसाय सर्वाधिक प्रभावित व्यवसायों में से एक है। समाचार पत्रों को वैसे ही सोशल मीडिया में प्रसारित अफवाहों के द्वारा कोरोना संक्रमण फैलने में कारक के रूप में प्रस्तुत किया गया। जिसकी मार उन पर प्रसार संख्या में भारी गिरावट के रूप में पड़ी है।

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ऐसी परिस्थितियों में बिना किसी जांच पड़ताल के कुछ प्रायोजित फ़ोटो के आधार पर समाचार प्रकाशित कर देने से समाचार पत्रों की विश्वसनीयता में भारी गिरावट देखने को मिल रही है! ऐसा प्रतीत होता है जैसे वर्तमान परिस्थितियों में सरकारी विज्ञापनों पर पूर्ण रूप से निर्भर समाचार पत्र अपनी व्यवसायिक मजबूरी के कारण सच छापने से डर रहे हैं! समाचार पत्रों के लिए गांधी जी ने कहा था कि समाचार पत्र मालिकों को अपनी लागत का पूरा पैसा पाठकों से ही लेना चाहिए। तभी निष्पक्ष पत्रकारिता की जा सकती है।