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Israel Palestine War 2021: इजराइल फिलस्तीन युद्ध से अमेरिका और इजराइल को कैसे हुआ मुनाफा

Israel Palestine War 2021 : इजराइल, फिलिस्तीन युद्ध से किसको हुआ मुनाफा ?
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Israel – Palestine war 2021 | Who got benefit from israel palestine war ? 10 मई से 21 मई तक 11 दिन गाजा पट्टी (Gaza Strip) से हमास (Hamas) और इजराइल (Israel) के बीच संघर्ष होता रहा , पूरी दुनिया से इस युद्ध (Israel – Palestine war 2021) को लेकर प्रतिक्रिया भी आयीं, इजराइल (Israel) ने अमेरिका (U.S.A.) के इस युद्ध (Israel – Palestine war 2021) के शांति प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया और दो दिन में परिसिथतियां इतनी बदलती हैं कि मिश्र (Egypt) के प्रयास से न ही केवल हमास बल्कि अपने अटल बयानों और कड़ी कार्यवाहियों के लिए प्रसिद्ध इजराइल (Israel) युद्ध शांति के लिए 2 दिनों मे मान भी जाता है और फिलिस्तीन को इस युद्ध (Israel – Palestine war 2021) का क्या नुकसान हुआ?

युद्ध के दौरान कौन सी चीजें चर्चा में रहीं –

  • युद्ध का कारण
  • हमास
  • मुस्लिम देशों की प्रतिक्रिया
  • आयरन डोम एंटी मिसाइल सिस्टम
  • जो बाइडन और बेंजामिन नेतन्याहू
  • भारत का सुरक्षा परिषद में इजराइल की निंदा करना
  • मिश्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सी-सी

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच युद्ध क्यों हुआ? Why did war happen among Israel – Palestine ?

फिलिस्तीन एक ऐसा देश है जिसके पास न ही कोई स्वयं की सेना है और न ही कोई प्रभावशाली नेता , इजराइल इसका शुरुआत से ही फायदा उठा रहा है सेना न होने की वजह से इजराइल ने फिलिस्तीन को टुकड़ो – टुकड़ो मे छोड़ दिया है | उसका भी एक कारण है इसाई धर्म के फैलने के बाद लगभग 2000 वर्षो तक सबसे ज्यादा अत्याचार यहुदियों के ऊपर ही हुआ है, हिटलर ने तो यूरोप के 60 लाख यहुदियों को जानवरों की तरह काटा 20 लाख यूरोपीय यहुदी हिटलर से किसी भी तरह जिन बचाने में कामयाब रहे और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब यहुदियों को उनका स्वतंत्र देश मिला , यहुदियों को युद्ध की आशंका थी इसलिए वे युद्ध के लिए हमेशा तैयार रहे और यहां उनका विरोध और अरब देशों से युद्ध हुआ और यहीं से इन्होंने फिलिस्तीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया | पहले अरबियों से युद्ध और फिलिस्तीन के विरोध की वजह फिलिस्तीन में यहुदियों का आना और इजराइल का बनना था वहीं अब बटवारे के बाद फिलिस्तीन के क्षेत्र मे इजराइल का बढता कब्जा है , इजराइल के ऐसा करने से अब तक 57 लाख फिलिस्तीनी बेघर और बेरोजगार हो गयें है जिनकी देखभाल यूएन आर डब्ल्यू ए (United Nations Relief and Works Agency) करता है |

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हमास एक आतंकवादी संगठन?

हमास गाजा पट्टी मे रहने वाले वे फिलिस्तीनी नागरिक है जो अपने देश से इजराइल का कब्जा हटाना चाहते है और इस कब्जे को हटाने के लिए इसने हथियार उठा लिए है | जब तक फिलिस्तीन के पास सेना नहीं थी तब तक इजराइल कब्जा कर रहा था जब फिलिस्तीनियों ने हथियार उठा लिए तो इजराइल ने उन्हें आतंकवादी बता दिया और हाल ही मे हुआ युद्ध वास्तव मे इजराइल और फिलिस्तीन के बीच नहीं बल्कि इजराइल और हमास के बीच हुआ था |

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मुस्लिम देशों की प्रतिक्रिया

इस युद्ध के दौरान मुस्लिम देशों में तुर्की और पाकिस्तान ने इजराइल का बहुत विरोध किया और मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी (Organization of Islamic Countries) और संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद मे जम के आवाज उठाई और फिलिस्तीन की सुरक्षा के लिए मांग की पर ये अपने उद्देश्य मे नाकाम रहे क्योंकि सुरक्षा परिषद में अमेरिका वीटो कर देता था और ओआईसी मे ज्यादा देशों का सहयोग प्राप्त न हो सका |

आयरन डोम एंटी मिसाइल सिस्टम

आयरन डोम इजराइल की डिफेंस टेक्नोलॉजी है जो इस युद्ध के दौरान काफी चर्चा में रही क्योंकि हमास द्वारा छोड़ी गई मिसाइलों को यह डिटेक्ट कर हवा मे ही नष्ट कर देता था जिससे इजराइल को इस युद्ध मे हमास की तरफ से कुछ खास नुकसान नही पहुंचा है और पूरी दुनिया को आयरन डोम का करिश्मा भी दिखा दिया है जिससे इसकी मांग बहुत तेजी से बढेगी |

जो बाइडन और बेंजामिन नेतन्याहू

इस युद्ध मे अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का खुल कर सहयोग किया और इजराइल द्वारा की जाने वाली कार्यवाही को उचित बताया | जब अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने इजराइल से युद्ध विराम की मांग करी तो इजराइल ने उसे नजरअंदाज कर दिया और ऐसा लगा कि अब अमेरिका और इजराइल मे दूरियां हो जायेंगी |

भारत का सुरक्षा परिषद मे इजराइल की निंदा करना , क्या इसका प्रभाव भारत और इजराइल के रिश्तों मे पडेगा? India on Israel Palestine war

सुरक्षा परिषद मे भारत के प्रतिनिधि टी.एस. तिरुमूर्ती ने इजराइल की इस युद्ध मे निंदा की और फिलिस्तीन का साथ दिया जबकि इजराइल भारत के साथ हमेशा हर परिस्थिति मे सहयोग करता रहा है ऐसे मे भारत और इजराइल के संबंध खराब होने की खबरे भी आ रही है लेकिन वास्तविकता यह नहीं है क्योंकि इजराइल भारत को हथियार बेचने के लिए उपयुक्त बाजार मानता है और इजराइल का मुख्य आर्थिक स्रोत हथियारों को बेचना ही है एसे मे इजराइल भारत के बयान को नजरअंदाज कर रहा है और भारत से अपना पुराना व्यवहार जारी रखेगा|

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मिश्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सी-सी

इस युद्ध के खत्म होने का श्रेय सभी लोग मिश्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सी-सी को दे रहे है तो आखिर जो काम अमेरिका नहीं कर पाया वो मिश्र ने कैसे कर दिया ? दरअसल अल सी-सी से पहले मुस्लिम ब्रदरहुड नाम की पार्टी सत्ता मे थी जो अमेरिका की विरोधी थी जब अल सी-सी का झुकाव अमेरिका की तरफ कुछ ज्यादा ही था और जब अल सी-सी सत्ता मे आए तो इन्होंने मुस्लिम ब्रदरहुड के लोगों को गुप्त रुप से मरवाना और जेल मे डलवाना शुरू कर दिया इसलिए मुस्लिम दुनिया और मिश्र में अल सी-सी के लिए असंतोष फैल गया | ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका अल सी-सी को मिश्र की सत्ता से अपने फायदे के लिए सत्ता मे बनाए रखना चाहता है इसलिए अमेरिका ने अल सी-सी को मुस्लिम दुनिया का हीरो और अल सी-सी की बुरी छवि को सुधारने के लिए इजराइल के साथ मिलाकर अल सी-सी के कहने पर युद्ध विराम का प्रस्ताव स्वीकार किया और वही हमास अपना बहुत कुछ इस युद्ध मे खो ही चुकी इसलिए हमास भी युद्ध विराम के लिए मान गया | इससे अल सी-सी की छवि पर अत्याधिक प्रभाव इसलिए पड़ा क्योंकि लोगों को लगा जो काम विश्व का सबसे शक्तिशाली देश न कर पायख वो काम अल सी-सी ने कर दिया और अल सी-सी की हर जगह प्रशंसा होने लगी |

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इजराइल को इस युद्ध का क्या फायदा हुआ

  • आयरन डोम और हथियारों को अत्याधिक बिक्री होगी |
  • विश्व मे दबदबा और गहरा होगा |
  • बहुत सारे देश इजराइल से संबंध अच्छे करने की कोशिश करेंगे जिससे व्यापार बडे़गा |

मतलब इजराइल को इस युद्ध के बाद आर्थिक मुनाफा तेजी से बढे़गा और विरोधी देशों के अंदर इजराइल का डर और बड़ जायेगा जिससे इजराइल विरोधी गतिविधियां कम होगी | Other countries Benefits on Israel-Palestine war

अमेरिका को इस युद्ध से क्या फायदा हुआ

  • मिश्र के अमेरिका सपोर्टर राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सी-सी को सुरक्षित किया जिससे मिश्र का सहयोग मिलेगा और मिश्र की स्वेज नहर से व्यापार मे सुगमता रहेगी |
  • आयरन डोम एंटी मिसाइल सिस्टम को विकसित करने मे अमेरिका का शेयर था , आयरन डोम की बिक्री बढेगी जिसका मुनाफा अमेरिका को भी होगा |
  • अमेरिका ने मुस्लिम देशों को अमेरिका सहयोगी नया नायक अल सी-सी के रूप में दिया है जो अमेरिका की कठपुतली के रुप मे काम करेगा |

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