आरामको ड्रोन अटैक: इस हमले में ईरान की वैज्ञानिक तरक़्क़ी का हाथ है : एडम शिफ़

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतों में 15 प्रतिशत का उछाल आ गया है जिसके बाद तेल बाज़ारों में हाहाकार की स्थिति बन गई है.

तेल उत्पादन को होने वाले किसी भी नुक़सान की भरपाई आपात तेल भंडारों से करना सऊदी अरब के बस की बात नहीं है

सऊदी अरब के तेल सेक्टर का इंफ़्रास्ट्रक्चर गंभीर ख़तरे में है?

रविवार को जब बाज़ार खुले थे तो तेल की क़ीमतों में तेज़ी से इज़ाफा होने लगा और पूरे दिन में तेल की क़ीमतों में 15 प्रतिशत का इज़ाफा हो गया. सोमवार को तेल के मूल्यों में और भी वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है. कच्चे तेल में तो 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई और प्रति बैरल की क़ीमत बढ़कर 71 दशमलव 95 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गई. अमेरिकी कच्चे तेल की क़ीमत में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और प्रति बैरल की क़ीमत बढ़कर 63 दशमलव 34 डालर पर पहुंच गई.

पढ़ें: गाय की आत्मा की शांति के लिए गांव वालों ने कराया 4 हज़ार लोगों को भोजन

अमेरिकी कॉन्ग्रेस ख़ुफिया कमेटी के प्रमुख एडम शिफ़ ने, सऊदी अरब की अराम्को कंपनी पर हुए हमलों पर शनिवार को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि- ईरान सरकार के साथ कूटनीतिक संपर्क से ही मौजूदा तनावपूर्ण हालात से बाहर निकला जा सकता है. एडम शिफ़ ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया है कि इस हमले में ईरान की वैज्ञानिक तरक़्क़ी का हाथ है. मगर यमन ने इस हमल की स्वंय ज़िम्मेदारी ली है.

ALSO READ:  अमेरिका चुनाव 2020: महिला, भारतीयता और भविष्य विजेता का आईना

अमेरिका की नीति अब अत्यधिक झूठ बोलने में बदल गयी है : ईरान

इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने शनिवार को ड्रोन हमले के लिए ईरान के ज़िम्मेदार ठहराया था जिसे ईरान ने रद्द करते हुए कहा था कि अमेरिका की अत्यधिक दबाव की नीति अब अत्यधिक झूठ बोलने की नीति में बदल गयी है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मूसवी ने कहा कि क्षेत्र में शांति की स्थापना और संकट के अंत का एकमात्र रास्ता यमन पर सऊदी अरब के हमले और उसे पश्चिमी देशों की ओर से मिलने वाली राजनैतिक व हथियारों की मदद रुकने पर निर्भर है.

पढ़ें :मोदी सरकार ने की 1609 करोड़ की मीडिया फंडिंग, दैनिक जागरण को मिले सबसे ज्यादा 100 करोड़ रुपये

ट्रम्प ने शनिवार तड़के ट्वीट में कहाः “सऊदी अरब पर हुए हमले के मद्देनज़र, जिसका तेल की क़ीमत पर असर पड़ सकता है, मैंने बाज़ार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए, ज़रूरत पड़ने पर पेट्रोलियम भंडार के इस्तेमाल का आदेश दिया है.” तेल उद्योग के एक सूत्र ने रविवार को बताया कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि इन प्रतिष्ठानों में तेल का उत्पादन कितने दिनों तक रुका रहेगा क्योंकि हमलों में हुए नुक़सान से एक रात में उबरा नहीं जा सकता.

बक़ीक़ आयल फ़ील्ड है रीढ़ की हड्डी

आरामको ने उत्पादन शुरु करने के लिए कोई निर्धारित तारीख़ नहीं बतायी है. फिर भी इस मामले के एक जानकार का कहना है कि तेल का पूरी क्षमता के साथ उत्पादन शुरु होने में दिन नहीं कई हफ़्ते लगेंगे. यही नहीं दुनिया भर में तेल के बाज़ार को स्थिर रखने में इस आयल फ़ील्ड के इंफ्रास्ट्रक्चर का बहुत बड़ा हाथ है. ड्रोन हमले से इस इंफ़्रास्ट्रक्चर को कितने बड़े पैमाने पर नुक़सान पहुंचा है इस बारे में जानकारियां पूरी तरह बाहर नहीं आने दी जा रही हैं. तेल के मूल्यों में 15 प्रतिशत की वृद्धि हो गई है और अपात तेल भंडारों का मुंह खोलकर तेल की क़ीमतों को नियंत्रण से बाहर होने से रोकने की कोशिश की जा रही है.

ALSO READ:  Pollution threatens Kashmir’s Fish species

पढ़ें : भुखमरी मिटाने में जो देश 103वें स्थान पर हो वहां ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ किसी भद्दे मज़ाक़ जैसा

सऊदी अरब के तेल सेक्टर में बक़ीक़ आयल फ़ील्ड को रीढ़ की हड्डी कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा. वर्ष 2018 में इस आयल फ़ील्ड ने सऊदी अरब के कुल तेल उत्पादन का 50 प्रतिशत भाग मुहैया कराया था. सारी दुनिया में प्रयोग होने वाले हर 20 बैरल तेल में एक बैरल तेल इस फ़ील्ड का था. यहां से निकलने वाला तेल फ़ार्स खाड़ी से होकर गुज़रता है. सऊदी अरब ने ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन बिछाई है जो सऊदी अरब के पूर्वी इलाक़ों से निकलने वाले तेल को पश्चिमी सऊदी अरब में लाल सागर के तट तक पहुंचाती है और वहां से यह तेल अनेक देशों को भेजा जाता है

सऊदी अरब के तेल सेक्टर का इंफ़्रास्ट्रक्चर कितने गंभीर ख़तरे में है?

लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि पूर्वी सऊदी अरब के ग़वार, शैबा और ख़रैस आयल फ़ील्ड्स से जो तेल निकलता है वह पहले बक़ीक़ आयल फ़ील्ड तक पहुंचता है और उसके बाद यहीं से शुरू होने वाली ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन में पम्प किया जाता है और लाल सागर तक पहुंचाया जाता है. बक़ीक़ पर होने वाले हमले के बाद अब यह सप्लाई लाइन भी कट गई है. इस हमले से पहले यमन ने सऊदी अरब की ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन पर सात ड्रोन विमानों से हमला किया था. उस हमले से होने वाला नुक़सान कम था लेकिन इससे साबित हो गया था कि सऊदी अरब के तेल सेक्टर का इंफ़्रास्ट्रक्चर कितने गंभीर ख़तरे में है. देश की सीमा से सैकड़ों किलोमीटर दूर होने के बावजूद वह सुरक्षित नहीं है.

ALSO READ:  Exclusive : जम्मू-कश्मीर में अगले 48 घंटे में शुरू होंगी ब्रॉडबैंड- इंटरनेट सर्विस

अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा?

सऊदी अरब का रिज़र्व तेल भंडार वर्ष 2008 की तुलना में बहुत कम हो गया है अतः तेल उत्पादन को होने वाले किसी भी नुक़सान की भरपाई आपात तेल भंडारों से करना सऊदी अरब के बस की बात नहीं है. सऊदी अरब की कोशिश होगी कि वह तेल निर्यात की मात्रा कम न होने दे और इसके लिए वह अपने रिज़र्व तेल भंडारों का प्रयोग करे जो सऊदी अरब के भीतर भी हैं और इसी तरह उसने मिस्र, जापान और हालैंड में भी बना रखे हैं लेकिन वर्ष 2016 से ही इन तेल भंडारों में तेल की मात्रा लगातार कम होती चली गई है. अब इन भंडारों में तेल की मात्रा तीन साल पहले की तुलना में बहुत कम है.

पढ़ें : बेगुनाह मुस्लिम क़ैदियों के साथ पुलिस टार्चर की एक दर्दनाक कहानी

इस हमले के बाद अब तेल उपभोक्ता देशों के अपात तेल भंडार की भी परीक्षा हो जाएगी. यदि बक़ीक़ से तेल निर्यात रुका रहा तो अपात भंडारों को प्रयोग करना पड़ेगा.