इंटरनेट जीने के अधिकार के तहत एक मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर में जारी पाबंदियों पर आई याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए सरकार को 7 दिन के भीतर इंटरनेट की उपलब्धता पर समीक्षा करने को कहा साथ ही अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि इंटरनेट की उपलब्धता मौलिक अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब सरकार द्वारा इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगाना आम हो गया है।

ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट की पाबंदियों और धारा 144 के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कई आदेश दिए।

इस आदेश की कुछ महत्वपूर्ण बातें हम आपको बता दें-

1.जम्मू-कश्मीर की पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर प्रतिबंधों की समीक्षा करने को कहा है। साथ ही इंटरनेट के निलंबन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इंटरनेट पर अनिश्चित काल के लिए पाबंदी दूरसंचार नियमों का उल्लंघंन है। उच्च्तम न्यायालय ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन को केंद्र शासित प्रदेश में प्रतिबंध लगाने के सभी आदेशों की एक हफ्ते में समीक्षा करने का आदेश दिया और इंटरनेट के इस्तेमाल को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकारों का हिस्सा बताया ।

2. न्यायमूर्ति एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों जैसी आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाली सभी संस्थाओं में इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने के लिए कहा।

3.पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लंबे वक्त तक इंटरनेट पर पाबंदी नहीं लगाया जा सकता। पाबंदियों की कोई पुख्ता वजह का होना जरूरी है। 

4. धारा 144 पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में कहीं भी लगातार धारा 144 को लागू रखना सरकार द्वारा शक्ति का दुरुपयोग है। 

5. किसी विचार को दबाने के लिए धारा 144 सीआरपीसी (निषेधाज्ञा) का इस्तेमाल उपकरण के तौर पर नहीं किया जा सकता।

6.सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी आदेशों को पब्लिक डोमेन में डालने का आदेश दिया जिनके तहत धारा 144 लगाई गई थी।

आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर में धारा 370 के हटाए जाने के बाद से इंटरनेट सेवा बंद है। सरकार ने सुरक्षा कारणों से इंटरनेट पर पाबंदी लगाई है। हाल ही में सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में ब्रॉडबैंड सुविधा बहाल करने का आदेश जारी किया गया था। राज्य में पोस्टपेड मोबाइल सेवा भी बहाल कर दी गई है। इंटरनेट न होने के वजह से व्यापारियों के बिजनेस पर प्रभाव पड़ा है। छात्रों को परीक्षा संबंधी जानकारी जुटाने और फॉर्म भरने में भी मुश्किल आ रही है। ऑनलाइन माध्यम पर काम कर रोज़ी कमाने वाले लोगों का काम भी ठप पड़ गया है। अस्पतालों में इंटरनेट न होने की वजह से रिपोर्ट के लेन देन और जांचों संबंधी कार्य प्रभावित हैं।