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International Men’s Day 2020: क्योंकि लड़का होना भी आसान नहीं है

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आज मेन्स डे है (International Men’s Day), यानि लड़कों का दिन। वुमन्स डे, फादर्स डे, सिस्टर्स डे ना जाने कितने तरह के डे के बीच जब मेन्स डे आता है तो लोग कहते हैं लड़कों पर एक दिन क्यों वेस्ट कर दिया उन्हें क्या दिक्कत है। तो यहां पहला सवाल जो आता है कि क्या किसी के लिए एक दिन समर्पित करने का अर्थ यह है कि उसे कोई दिक्कत है? और क्या लड़के सचमें इतने नकारे हैं कि उनके लिए एक दिन रखना भी दुनिया को वेस्ट लगता है। तो आईये समझते हैं मेंस डे आखिर मनाया क्यों जाता है।

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नवंबर 19 को दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय मेंस डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लड़कों और पुरुषों की सेहत, जेंडर रिलेशन, उनकी मेंटल हेल्थ और जेंडर इक्वालिटी पर ध्यान देना होता है। पुरुषों द्वारा समाज, परिवार, समुदाय में किये गए योगदान को प्रोत्साहित करने के लिए मेंस डे सेलिब्रेट किया जाता है। आज के दिन आप आपके जीवन में मौजूद पुरुषों को उनके द्वारा किेये जा रहे अथक प्रयासों के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। एक दिन आप उनके लिए सेलिब्रेट कर सकते हैं। उन्हें अच्छा फील करवा सकते हैं।

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लड़का होना भी आसान नहीं है

यह माना जाता है कि लड़कों को लड़कियों के मुकाबले कई मामलों में कम संघर्ष करना पड़ता है। पितृसत्तात्मक समाज होने के कारण महिलाओं को हमेशा दबकर रहना होता है। उन्हें अपने अधिकारों और आज़ादी के लिए पुरुषों के मुकाबले ज्यादा संघर्ष करना होता है, जो कि सच भी है। लेकिन लड़कों का जीवन भी आसान नहीं होता वो भी समाज के द्वारा बनाए गए कुछ ढर्रों और सीमाओं में घुटन का सामना करना पड़ता है। लड़कों को बचपन से सिखाया जाता है कि लड़का होने का मतलब है कि उन्हें अपने इमोशंस को दबाकर रखना होगा, लड़के रोते नहीं है, लड़के कभी डरते नहीं है, तुम लड़के हो तुम्हें स्ट्रांग रहना होगा, तुम्हें अपना करियर ऐसे चुनना होगा कि तुम समाज में कुछ नाम कमा सको, यह काम तुम्हारा है वो काम तुम्हारा नहीं, अरे तुम ऐसे नहीं चल सकते, यह नहीं बन सकते, यह रंग नहीं पहन सकते और ना जाने क्या-क्या।

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समाज अब आगे बढ़ रहा है, मेंस डे (International Men’s Day) मनाने का मतलब है सभी तरह के स्टीरियोटाईप जो मर्दों के लिए बनाए गए हैं उन्हें तोड़ना, जैसे जब आप दुखी हो तो आप उसका इज़हार कर सकें, रो सकें, हंस सकें, टूट सकें और अपनी भाव प्रकट कर सकें।

आप जो चाहें वो कर सके और समाज आपको उसके लिए रोके या टोके नहीं। जेंडर इक्वालिटी केवल कहने से न हो उसे महसूस किया जाना चाहिए। अगर किसी लड़के को फैशन में इंट्रेस्ट है तो वह उसे अपना करियर ऑपशन बना सके, फीलिंग्स सिर्फ लड़कियों के लिए नहीं है, लड़के भी अपनी फीलिंग्स का इज़हार खुल कर कर सकें, आप मदद मांगे तो आपको कोई कमज़ोर न कहे। पुरुष भी सभी की तरह तमाम परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसे में अगर कोई उन्हें सुनने वाला नहीं होगा तो वो भी मेंटल डिप्रेशन का शिकार हो सकते है।

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कैसे मानाएं (International Men’s Day)?

अपने आसपास मौजूद लड़को को आज स्पेशल फील करवाएं। उन्हें उनके द्वारा किये जा रहे कामों के लिए प्रोत्साहित करें। अपने दोस्तों से उनका हाल जाने उनके साथ समय बिताएं, उनसे उनकी परेशानियों के बारे में पूछें। अपने भाई, पति, बॉयफ्रेंड, पिता को विश्वास दिलाएं की वो जो कर रहे हैं उसमें आप उनके साथ हैं। वो खुद को कभी कमज़ोर या अकेला न समझें, जब भी कोई परेशानी हो या कुछ बात करनी हो तो वो बेझिझक आपसे बात कर सकते हैं। उन्हें बताएं कि आराम करने, थकने, रोने, हंसने पर कोई पाबंदी नहीं है। वो खुल कर अपने सभी भावों का इज़हार कर सकते हैं।

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