स्वाइन फ्लू से भारत में अब तक 542 लोगों की मौत, जानिये क्या है H1N1 वायरस के लक्षण और बचाव

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नई दिल्ली, 24 अक्टूबर। स्वाइन फ्लू इस शब्द को सुनकर ही लोगों के मन में दहशत आ जाती है। स्वाइन फ्लू, स्वाइन इंफ्लूएंजा या एच1 एन1 वायरस के नाम से भी जाना जाता है। दुनिया के कई देश इसकी जकड़ में है वहीं भारत भी स्वाइन फ्लू जैसे घातक वायरस से अछूता नहीं है। धीरे-धीरे स्वाइन फ्लू देश में पांव पसारता दिख रहा है।

साल 2018 में जनवरी से अक्टूबर तक स्वाइन फ्लू से करीब 542 लोगों की मौत हो चुकी है। खास बात यह है कि स्वाइन फ्लू के करीब 50 फीसदी मामले महाराष्ट्र से सामने आए हैं। स्वास्थ अधिकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र में 14 अक्टूबर तक कुल 1,793 मामले सामने आए जिसमें से 217 लोगों की मौत हो गई।

स्वाइन फ्लू के मामलों और उससे होने वाली मौतों के मामले में देश में राजस्थान दूसरे नंबर है। स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के 1,912 मामलों में से अब 191 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकी इस मामले में गुजरात में गुजरात तीसरे नंबर पर है जहां 1,478 मामलों में से 45 लोगों ने दम तोड़ दिया।

देश की राजधानी दिल्ली भी स्वाइन फ्लू जैसे खतरनाक वायरस से अछूती नहीं है। स्वास्थ विभाग के मुताबिक, इस साल 12 अक्टूबर तक दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 111 मामले सामने आ चुके हैं जबकी इस दौरान इस वायरस से एक शख्स की मौत हो चुकी है।

इस साल जनवरी से अक्टूबर तक देश में स्वाइन फ्लू के कुल 6,803 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं बीते साल यानी 2017 में स्वाइन फ्लू H1N1 संक्रमण के कुल 38,811 मामले सामने आए थे जिनमें से 2,270 लोगों की मौत हो गई थी।

क्या है स्वाइन फ्लू H1N1 वायरस
दरअसल, स्वाइन इन्फ्लूएंजा H1N1 एक ऐसा वायरस है जो अमूमन सांसों और हवा के जरिए तेजी से फैलता है। आम तौर यह केवल सूअरों में फैलता है लेकिन बीते कुछ सालों में इसके लक्षण लोगों में भी देखने को मिल रहे हैं। स्वाइन इन्फ्लूएंजा ए वायरस के H1N1 स्ट्रेंस के चलते होता है। हालांकि H1N2, H3N1 और H3N2 के रूप में अन्य स्ट्रेंस भी सूअरों में मौजूद रहते हैं।

लोगों में स्वाइन फ्लू होना असामान्य बात है। स्वाइन फ्लू के संक्रमण से सिर्फ सूअर ही प्रभावित होती रही है लेकिन सूअरों के संपर्क में आने से लोगों में भी स्वाइन फ्लू के गंभीर परिणाम सामने आए हैं।

स्वाइन फ्लू H1N1 के लक्षण
स्वाइन फ्लू H1N1 वायरस से ग्रसित होने पर नाक का लगातार बहना, छींक आना, कफ, कोल्ड और लगातार खांसी बनी रहती है। इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द, एठन और अकडऩ के साथ सिर में तेज दर्द भी होता है। जबकी नींद न आना, थकान महसूस होना और दवा खाने के बावजूद भी बुखार का लगातार बढ़ना और गले में खराश होना इसके प्रमुख लक्षण है।

स्वाइन फ्लू H1N1 से बचाव के प्रमख उपाय
स्वाइन फ्लू एच1एन1 या इंफ्लूएंजा एच1एन1 जैसी जानलेवा बीमारी से बचान के लिए भरपूर आराम करें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि शरीर में पानी की कमी न हों इसलिए खूब पानी पियें।

लक्षण समझ में आने पर या बीमारी का पता चलने पर पीड़ित को शुरुआत में बुखार कम करने के लिए पैरासीटामॉल दें। अगर तब भी आराम न मिलें तो इसके साथ ही एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर (टैमी फ्लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू रामबाण साबित हो सकती हैं, लेकिन ध्यान रहें कि यह दवाईयां बिना डॉक्टर की परामर्श के बाद ही लें और समय-समय पर डॉक्टर से चैकअप करवाते रहें।

2009 में पहला मामला मेक्सिको में
वैज्ञानिकों के मुताबिक, स्वाइन फ्लू का पहला मामला मेक्सिको में साल 2009 में मार्च से अप्रैल के बीच सामने आया था। जहां सूअर इन्फ्लूएंजा वायरस एच1एन1 के चलते लोगों में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिले थे। WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इन्फ्लूएंजा के इस नए स्ट्रेन इन्फ्लुएंजा ए H1N1 एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है।

दुनिया भर के विशेषज्ञ विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर इस गंभीर वायरस को कंट्रोल करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। WHO का अनुमान है कि यदि इस पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो यह वायरस वैश्विक महामारी बनकर उभरेगा।

भारत के इन राज्यों में इन्फ्लुएंजा ए H1N1 के गंभीर परिणाम
अगर की भारत की बात करें तो, भारत में भी पहली बार जीका वायरस का मामला 2009 में पहली बार सामने आया था इसके बाद 2010, 2012 और 2013 में 2015 में इन्फ्लुएंजा ए H1N1 के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। यूं तो स्वाइन फ्लू के मामलों आम तौर पर 12 महीने सामने आते हैं लेकिन सबसे गंभीर परिणाम जनवरी-फरवरी के दौरान देखने को मिलते हैं। वर्तमान में मुख्य रूप से महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से स्वाइन फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं।