नवजात बच्चों की मौत पर क्या कर रहे हैं शिवराज

मॉं अपने नवजात बच्चों के शव देख बिलख रही हैं, शिवराज मामा सो रहे हैं

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मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में 6 दिनों में 12 बच्चों की मौत हो गई है। दूसरे जिलों से भी नवजात बच्चों की मौत की खबर आ रही है। आदिवासी बहुल अनूपपुर, मंडला और सागर में नवजातों ने दम तोड़ दिया है। इन बच्चों की मौत का कारण सांस लेन में दिक्कत और निमोनिया बताया जा रहा है। शिवराज सरकार ने जांच के आदेश तो दे दिए हैं लेकिन वो जागे हैं तब जब कई घरों के चिराग बुझ चुके हैं।

क्यों हो रही है नवजात बच्चों की मौत?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक शहडोल जिला अस्पताल में कम से कम 9 डॉक्टर नियुक्त होने चाहिए थे लेकिन एक डॉक्टर के भरोसे ही पूरा अस्पताल चल रहा है। जिन बच्चों को अस्पतालम में भर्ती कराया गया उन्हें समय से इलाज नहीं मिल पाया।

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एनडीटीवी के अनुराग द्वारी की रिपोर्ट के मुताबिक आदिवासी बहुत अनूपपुर में अप्रैल से नवंबर यानी 8 महीनों में शिशु गहन चिकित्सा इकाई में 754 बच्चे भर्ती हुए जिसमें 120 की मौत हो गई मंडला में 61 दिन में 28 बच्चों की जान चली गई लेकिन प्रशासन मानता है बच्चों को समुचित इलाज मिल रहा है।

जांच बैठा दी गई है, दोषियों को सज़ा देने के सख्त आदेश दे दिए गए हैं लेकिन इससे होगा क्या मध्यप्रदेश के बच्चों के मामा शिवराज सिस्टम की नाकामी की वजह से दम तोड़ चुके अपने भांजे भांजियों को दोबारा जीवन दे पाएंगे क्या?

अस्पतालों के हालात खराब हैं, स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। कहीं डॉक्टर नहीं तो कहीं व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं आखिर महामारी के दौर में भी हमारे नेताओं का ध्यान चिकित्सा सेवाओं पर क्यों नहीं है यह तो वो ही बता सकते हैं।

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