नवजात बच्चों की मौत के मामले में मध्यप्रदेश की स्थिति राजस्थान से भी ज़्यादा खराब है

infant mortality india
Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

विचार । पल्लव जैन

पिछले दिनों राजस्थान के कोटा (KOTA) में 100 से ज्यादा नवजात बच्चों की मौत की खबर से देश स्तब्ध रह गया था। आज़ादी के 70 साल बाद भी हमारा देश नौनिहालों को जन्म के बाद सुरक्षित जीवन देने में असमर्थ है। हम नए भारत में प्रवेश तो कर गए लेकिन हमारी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पुराने ढर्रे पर ही रह गई। हम विश्व शक्ति बनने का सपना तो संजोते हैं लेकिन एक जननी को पोषण आहार तक उपलब्ध नहीं करवा पाते। कुपोषण से होने वाली नवजात बच्चों (INFANT MORTALITY) की मौत के आंकड़े शर्म से सर झुका देते हैं। नेता जब सत्ता में होता है तो पूर्ववर्ती सरकारों को कोसता है, जब विपक्ष में होता है तो मौजूदा सरकार को घेरता है। मीडिया भी बयानों से टीआरपी बटोरती है। उसे यह दिखाने में ज्यादा मज़ा आता है कि पायलट और गहलोत के बीच टकराव है। वह यह जांच करने नहीं जाता की आखिर वजह क्या है? क्यों इतने बच्चों की मौत हो रही है?

ALSO READ: प्रसव के लिए अस्पताल में मौजूद नहीं डॉक्टर, तो कैसे जन्म लेगा बच्चा इस नए भारत में?

नवजात शिशुओं की मौत के मामले में मध्यप्रदेश अव्वल

कोटा में एकदम से 100 बच्चों की मौत हुई तो सारा फोकस राजस्थान की बदहाल स्वास्थ व्यवस्था पर चला गया लेकिन नवजात बच्चों की मौत के आंकड़े दूसरे राज्यों में भी चौंकाने वाले हैं। राजस्थान में 2018-19 में 24,451 नवजात शिशुओं की मौत हुई, यह मध्य प्रदेश (25,786) के बाद दूसरी सबसे अधिक संख्या थी। हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) के आंकड़ों के मुताबिक़। अप्रैल और दिसंबर 2019 के बीच भी राजस्थान में नवजात शिशुओं की मौत (17,613) की संख्या दूसरी सबसे अधिक थी, जो केवल मध्य प्रदेश (22,770) से कम थी।

ALSO READ:  शिवराज बोले- किसी भी समय गिर सकती है सरकार ये न समझें की कमजोर हो गया है 'मामा'


यह दोनों कांग्रेस शासित राज्य हैं, चाहें तो यहां की सरकारें पूर्ववर्ती सरकारों को कोस सकती हैं।

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.