CAG : सियाचिन में तैनात जवानों के पास न पहनने के लिए मल्टीपर्पज़ जूते हैं और न अच्छा खाना

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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट दी गई जानकारी के मुताबिक़ भारतीय सेना के जवानों के पास पहनने के लिए स्नो गॉगल्स और मल्टीपर्पस जूते नहीं हैं और सियाचिन व लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खाने के लिए जरूरी स्वीकृत भोजन उपलब्ध नहीं है। अत्यधिक ठंड की वजह से इन्हें कई तरह के रोगों का सामना करना पड़ता है।

न तो ढंग के जूते हैं और न ही ज़रूरी भोजन

सेना के नाम पर वोट मांगने वाली मोदी सरकार को सैनिकों का कितना ख़्याल है इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सियाचिन व लद्दाख में तैनात हमारे जवानों के पास ठंड से लड़ने के लिए न तो ढंग के जूते हैं और न ही ज़रूरी भोजन। इस बात का ख़ुलासा नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, सियाचिन (Siachen) व लद्दाख में तैनात भारतीय सेना के जवानों के पास न पहनने के लिए स्‍नो गॉगल्स हैं और न ही मल्टीपर्पज शूज़। जिससे जवानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

जवानों की कैलोरी इनटेक से भी समझौता किया गया

सूत्रों ने कहा कि यूनियन गवर्नमेंट (डिफेंस सर्विसेज)-आर्मी पर कैग की रिपोर्ट में कहा गया कि सेना के जवान ऊंचाई वाले इलाके में भोजन के अधिकृत दैनिक उपयोग से भी वंचित है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जवानों की कैलोरी इनटेक से भी समझौता किया गया है। यूनियन गवर्नमेंट (डिफेंस सर्विसेज)-आर्मी की कैग रिपोर्ट राज्यसभा में रखी गई, लेकिन इसे लोकसभा में नहीं रखी जा सकी, इसलिए नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक राजीव महर्षि रिपोर्ट जारी नहीं कर सके। लेकिन राज्यसभा के सूत्रों ने दावा किया कि ऑडिट ऊंचाई वाले इलाकों में भारतीय सेना की स्थिति को उजागर करती है।

स्‍नो गॉगल्स की कमी 62 फीसदी से 98 फीसदी है

सूत्रों के मुताबिक, ऊंचाई वाले इलाकों में सेना के जवान कई तरह की कमियों से जूझ रहे हैं। यहां स्‍नो गॉगल्स की कमी 62 फीसदी से 98 फीसदी है, जिससे जवानों का चेहरा व आंखें ऊंचाई वाले इलाकों में खराब मौसम में बिना ढकी रहती हैं। इससे भी बुरी बात है कि जवानों के पास नए मल्टीपर्पस जूते नहीं हैं, जिसके चलते उन्हें पुराने जूतों का ही इस्तेमाल करना पड़ता है। सूत्रों के मुताबिक इन इलाकों में स्थिति बेहद निराशाजनक है। यहां तैनात जवानों को पुराने वर्जन के फेस मास्क, जैकेट व स्लीपिंग बैंग दिए गए हैं। इसके साथ ही यहां जवान बेहतर उत्पादों के इस्तेमाल से वंचित हैं।

जवान बेहतर उत्पादों के इस्तेमाल से वंचित हैं

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रक्षा प्रयोगशालाओं द्वारा अनुसंधान और विकास की कमी के कारण आयात पर निरंतर निर्भरता बनी हुई है। इसके अलावा, ऊंचाई पर तैनात सैनिकों के लिए उनकी दैनिक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशेष राशन की व्यवस्था है। लेकिन इन सामानों के बदले में कीमत के आधार वस्तुएं अधिकृत गईं, जिससे विकल्प वाली वस्तुओं की कम आपूर्ति होती है।

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