पार्सल गाड़ियों को किराये पर देने के लिए तैयार भारतीय रेलवे, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कही ये बात

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रेल मंत्री पियूष गोयल ने कहा कि रेलवे में व्यवसाय के लिए बहुत सारे अवसर हैं क्योंकि, मंत्रालय रेल मार्गों और पार्सल गाड़ियों को किराये पर देने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे में माल ढुलाई का काम बढ़कर 95 प्रतिशत तक पहुंच गया है। रेलवे अब निजी क्षेत्र में 150 यात्री ट्रेनें शुरू करने जा रहा है और इस योजना के लिए इच्छुक इकाइयों को आमंत्रित किया गया है।

सीआईआई (The Confederation of Indian Industry) द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम में गोयल ने कहा, ‘निजी क्षेत्र कई तरीकों से सहयोग कर सकता है, मैं नए मार्गों को पट्टे पर देने जा रहा हूँ। निजी कंपनियां उन मार्गों की पहचान करें जिन पर ट्रेन सेवा शुरू करना चाहते हैं।’

साथ ही उन्होंने कहा, यदि आप चाहते हैं तो हम आपके साथ नई लाइनों में भी निवेश करने को तैयार हैं। हम ट्रैफिक मार्गों को पट्टे पर देने के लिए तैयार हैं और पार्सल ट्रेनों को भी पट्टे पर देने के इच्छुक हैं। इसलिए, निजी क्षेत्र के लिए रेलवे में बहुत सारे अवसर हैं।

उन्होंने कहा, ‘हम 21 जून 2019 की तुलना में महज पांच फीसदी नीचे थे। यदि हम पूरे जून महीने को देखें तो हम माल ढुलाई के मामले में एक जून से 21 जून के दौरान लगभग आठ फीसदी नीचे हैं। जुलाई तक हम इसे बराबर कर लेंगे। अगस्त से सितंबर तक वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।’

माल गाड़ी की गति पर उन्होंने कहा कि पिछले साल 21 जून को माल गाड़ी की रफ़्तार 22 .98 किमी प्रति घंटा थी जबकि रविवार को 41 .74 किमी प्रति घंटा थी। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि रेलवे आगे चल कर माल ढुलाई के काम को सस्ता बना सकता है।

गोयल ने कहा, ‘हम लंबे समय से प्रतीक्षित रख-रखाव कार्यों को पूरा करने के लिए इस समय का उपयोग बुद्धिमता से कर रहे हैं। इसके साथ ही वैसी कई लाइनों को इंटरकनेक्ट करने के लिए भी इस समय का उपयोग किया गया है, जिन्हें लंबे समय तक शटडाउन की आवश्यकता थी।’

उन्होंने कहा, ‘हम इस समय का उपयोग रेलवे की समय सारिणी को और अधिक बेहतर बनाने के लिए कर रहे हैं। हम माल और पार्सल ट्रेनों को टाइम टेबल में ला रहे हैं ताकि हम व्यवसायों को कम समय में लंबी दूरी की डिलिवरी के प्रति आश्वस्त कर सकें।’

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि रविवार तक भारतीय रेलवे ने 4,553 श्रमिक विशेष ट्रेनों का परिचालन किया और इनकी संख्या लगातार कम हो रही है। अब तक इन ट्रेनों से करीब 75 लाख प्रवासी श्रमिकों ने यात्राएं की हैं।’