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भारत में पुलिस की ज़िंदगी सिंघम की तरह नहीं, करना पड़ता है 14 घंटे काम

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ग्राउंड रिपोर्ट। न्यूज़ डेस्क

तीस हजा़री कोर्ट में पुलिसवालों से बदसलूकी के बाद पहली बार पुलिस इंसाफ के लिए सड़कों पर आई। उन्होने पुलिस की नौकरी में आने वाली चुनौतियां बताई और कहा कि किस तरह वे वरदी और देश के लिए ये सारे कष्ट झेल रहे हैं। 2019 में जारी हुई स्टेटस ऑफ पुलिसिंग इन इंडिया रिपोर्ट के मुताबिक 24 फीसदी से ज्यादा पुलिसकर्मी दिन में 14 घंटे से ज्यादा काम करते हैं। 44 फीसदी से ज्यादा 12 घंटे काम करते हैं।

73 फीसदी पुलिसकर्मियों ने कहा कि दिन में 10 से 12 घंटा काम करने की वजह से उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत प्रभावित हुई है।

कागज़ों में हर पुलिसकर्मी को हफ्ते में एक छुट्टी का प्रावधान है, लेकिन मिलती है महीने में 2 या 3 ही। विशेष मौकों पर कई बार पुलिसकर्मी 2 से 3 दिन घर नहीं जा पाते। यह रिपोर्ट ऐसे समय में सवाल पैदा करती है, जब दुनिया के कई देश कर्मचारियों को हफ्ते में तीन छुट्टियां देने की वकालत कर रहे हैं।

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पुलिस का काम चुनौती भरा होता है, जिसमें कई जोखिम शामिल होते हैं, ऐसे में यह सवाल पैदा होता है कि पुलिसकर्मियों से इतना काम क्यों करवाया जा रहा है। क्या उन्हे अपने परिवार के साथ वक्त बिताने का अधिकार नहीं है। बीपीआरडी 2017 की रिपोर्ट के हिसाब से भारत में 22 फीसदी पुलिस के पद खाली पड़े हैं, जिनपर अभी तक भर्ती नहीं की गई। भारत में 1 लाख लोगों पर 148 पुलिसकर्मी हैं, जबकि संयुक्त राष्ट्र के हिसाब से यह 222 होना चाहिए। इस वजह से काम का बोझ भी कुछ लोगों पर बढ़ा है। पांच में से 4 पुलिसकर्मियों को ओवरटाईम करने पर कोई पेमेंट नहीं दिया जाता।

भारत के संविधान का अनुच्छेद 42 कहता है कि यह सरकार कि ज़िम्मेदारी है कि वह हर व्यक्ति को काम करने के लिए मानवीय वातावरण उपल्ब्ध करवाए। पुलिस हमारा ध्यान रखती है, वे अपनी मांगों के लिए सड़क पर नहीं आते। ऐसे में सरकार का फर्ज़ है कि देश की पुलिस को उचित सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। जब व्यवस्था ठीक नहीं होती तो भ्रष्टाचार भी बढ़ता है। इंडियास्पेंड डॉट कॉम को कई पुलिसकर्मियों ने बाताया कि वे नहीं चाहते की उनके बच्चे कभी पुलिस की नौकरी करें।

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