मैनेजमेंट रोज़ पाकिस्तान-इस्लाम से संबंधित डिबेट रखने के लिय दबाव डालता है!

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बड़े न्यूज़ चैनल में बैठे मेरे मित्र आजकल बताते हैं कि उन पर किस तरह का दबाव है.. कई जो इसे झेल नहीं पा रहे हैं वो गुपचुप नौकरी छोड़े दे रहे हैं.. टॉप मैनेजमेंट से ये प्रेशर होता है कि रोज़ प्राइमटाइम में पाकिस्तान/इस्लाम से सम्बंधित डिबेट रखें.. मेरी बहन जो इन्हीं में से एक चैनल में है, बता रही थी कि किस तरह से राहुल, सोनिया, कांग्रेस या अन्य दलों की ख़बरों को चलने पर मनाही होती है.. जब तक बहुत ही ज़रूरी न हो, या फ़र्ज़ी प्रमाणिकता बनाये रखने का सवाल न हो, तब तक राहुल गाँधी या उन से रिलेटेड कुछ भी न दिखाया जाय.. ये पूरी तरह से इस प्लान के तहत हो रहा है कि “लोग जब देखेंगे या सुनेंगे ही नहीं तो भूल जायेंगे”.. ऐसे ही धीरे धीरे लोग हर नेता, विपक्ष को भूल जाएँ.. और बस एक शख्स को ही याद रखा जाय.. और वो हो रहा है

चैनलों में काम करने वाले सच्चे लोगों के लिए ये बहुत बड़ी परीक्षा की घडी है.. उन्हें अपनी नौकरी भी बचानी है और जिंदा भी रहना है.. इसलिए उनकी अपनी मजबूरी हैं.. उन्हें माफ़ कर दीजिये.. क्यूंकि टॉप मैनेजमेंट से उनके ऊपर बहुत ही ज़्यादा प्रेशर है इस समय. ये मैं इसलिए बता रहा हूँ क्यूंकि जब मैं भारत या पाकिस्तान में हुई, सद्भाव और इंसानियत से सम्बंधित ख़बर डालता हूँ तो लोग कहते हैं कि ये सच नहीं है.. क्यूंकि उन्हें ये लगता है कि उनका चैनल तो ये दिखा ही नहीं रहा है इसलिए ये झूठ होगा.. तो आप एक बात जान लीजिये कि अब चैनल कुछ नहीं दिखाएगा आपको

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क्या आपको लगता है कि आपके आसपास सालों से कुछ अच्छा हुवा ही नहीं है? क्या आपको लगता है इतने प्रेशर और अफरातफरी के बाद आपके पड़ोस का मुसलमान हथियार इक्कट्ठा कर के आपसे युद्ध की तय्यारी कर रहा है और गज्वाये हिन्द के सपने देख रहा है? नहीं ऐसा नहीं है.. क्या आपको लगता है कि २०१४ के बाद महंगाई नहीं बढ़ी? सिलेंडर के रेट नहीं बढ़े या लोग भूखे नहीं मर रहे हैं? सब्जियां दाल चावल महंगे नहीं हुवे हैं? रेल का किराया नहीं बढ़ा या लोग भूखे नहीं मर रहे हैं अब? ये सब हो रहा है.. मगर चैनल अब दिखाता नहीं है और वो अब दिखाएगा भी नहीं आगे कई सालों तक.. इसलिए अब ये शिकायत मत कीजिये कि चैनल में नहीं आया तो ये न्यूज़ ग़लत होगी.. दरअसल चैनल सब बुक हैं अब.. अब वहां प्रायोजित कार्यक्रम ही चलेगा आने वाले कई सालों तक

हमारे और आपके आसपास अभी भी अच्छा हो रहा है.. पाकिस्तान में भी अच्छा हो रहा है.. आम इंसान वहां भी जद्दो जहद में लगा है और यहाँ भी.. इसलिए अब आपकी और हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम ऐसे हीरो या इंसानियत पसंद लोगों को सामने लायें.. अच्छे कामों को सामने लायें.. क्यूंकि अंत में हम और आप यही तो चाहते हैं कि शांति कायम हो, और इंसानियत का बोलबाला हो?

किसी भी अफरातफरी या युद्ध के अंत में जनता ही सब कुछ फिर से बनाती है.. हुक्मरान तो सब उजाड़ के चले जाते हैं फिर हम और आप सब फिर से व्यवस्थित करते हैं.. इसलिए सब कुछ उजड़े उस से पहले हमे और आपको इसे व्यय्स्थित करने में जुट जाना चाहिए.. प्रेशर बहुत है..हर तरफ़ से.. कुछ भी अच्छा शेयर करने पर भी लोग गाली देते हैं.. ये वही लोग हैं जिनके लोगों ने मीडिया को बता रखा है कि उन्हें क्या दिखाना है और क्या नहीं.. ये हमारे और आप पर भी प्रेशर बनाते हैं.. मगर हम और आप आज़ाद है इंसानियत फैलाने के लिए.. हमारे हाथ में अब सोशल मीडिया की ताक़त है.. अब हम अच्छाई घर घर पहुंचा सकते हैं जैसे इन्होने और इस्लामिक आलिमों ने नफ़रत घर घर पहुंचा दी है

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ये लेख सोशल पर चर्चित लेखक ताबिश सिद्दीक़ी की वाल से लिया गया है.