Farmers Protest: अन्नदाता किसान और मोदी सरकार आमने सामने, क्या 2024 में दिखेगा इसका असर?

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सितंबर में मोदी सरकार ने कृषि संबंधी सुधार के लिए एक बिल(Farm Bill) पेश किया। जिसे देशभर में किसानों के विरोध(Farmers) के बाद भी पास कर कानून बना दिया गया। सरकार का दावा था कि ये आज़ादी से अब तक किसानों के हित में किया गया सबसे बड़ा सुधार बिल है। लेकिन किसान(Farmers) इस बिल को लेकर सरकार से नाराज़ है क्योंकि उन्हें लगता है कि इस बिल से मंडी सिस्टम और न्यूनतम समर्थन मूल्य(Minimum Support Price) व्यवस्था ख़त्म हो जायेगी। इस बिल के विरोध में विपक्ष और किसानों के साथ-साथ NDA के सबसे पुरानें सहयोगी रहे अकाली दल ने भी खुद को गठबंधन से बाहर कर लिया। बहरहाल सरकार के लाख दावों के बाद भी किसान कहीं से कहीं तक संतुष्ट नहीं होते दिख रहे हैं। आखिर क्या कारण है कि सरकार जिन किसानों(Farmers) के फायदे लिए ये कानून लेकर आयी है उन्हीं किसानों की बात न तो सुन रही है ना ही उनसे बात करने करना चाहती है।

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किसान मंडी व्यवस्था और एमएसपी को लेकर पिछले 2 महीनों से पंजाब में शांति पूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन जब सरकार से किसानों को उचित जवाब नही मिला तो उन्होनें दिल्ली की ओर प्रदर्शन करने का रुख़ किया। किसानों से पिछले कुछ महीनों में कई सवाल पूछे हैं। सरकार को किसानों से बात करने में क्या परेशानी है?जब किसान 2 महीने से पंजाब में धरना प्रदर्शन कर सकते है तो दिल्ली में क्यों नही? हमारे संविधान ने हर एक नागरिक को शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार दिया है, लेकिन सरकार देश के अन्नदाताओं पर ये ज़ुल्म कर उनका मौलिक अधिकार छीन रही है।

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सरकार का कहना है नया कृषि कानून किसानों के हित में है और कोई एमएसपी या मंडी खत्म नही होगी। लेकिन किसानों को अगर एमएसपी और मंडी सिस्टम ख़त्म होने का डर है और वो चाहते है कि सरकार नये कानून में एमएसपी और मंडी को लेकर एक कानून और जोड़ दे कि मंडी सिस्टम खत्म नही होगा और एमएसपी से कम दाम में फसल खरीदना एक अपराध होगा। वैसे तो प्रधानमंत्री कई मौंको पर कह चुके है कि एमएसपी और मंडी पहले की तरह ही काम करेंगे लेकिन पीएम इसे नये कानून में जोड़नें से क्यों कतरा रहे है।

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आपको बता दें एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य एक प्रकार से गारंटी होती है जो किसान(Farmers) को उनकी फसल के लिए सरकार की ओर से दिया जाता है।
किसानों को लगता है कि इस बिल से सरकार बड़े कॉर्पोरेट कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है,और इसकी वज़ह है नये कानून में कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन कृषि सेवा करार 2020 इस कानून से किसान को उसका पक्ष कमजोर लगता है क्योकि अगर बड़ी कंपनियों से साथ कोई विवाद की स्थिति बनी तो लाभ कंपनियों को होगा किसानों को नहीं। किसान मंडी व्यवस्था और एमएसपी को लेकर पिछले 2 महीनों से पंजाब में शांति पूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन जब सरकार से किसानों को उचित जवाब नही मिला तो उन्होनें दिल्ली की ओर प्रदर्शन करने का रुख़ किया।

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किसानों से पिछले कुछ महीनों में कई सवाल पूछे हैं। सरकार को किसानों से बात करने में क्या परेशानी है?जब किसान 2 महीने से पंजाब में धरना प्रदर्शन कर सकते है तो दिल्ली में क्यों नही? हमारे संविधान ने हर एक नागरिक को शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार दिया है, लेकिन सरकार देश के अन्नदाताओं पर ये ज़ुल्म कर उनका मौलिक अधिकार छीन रही है।

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सरकार का कहना है नया कृषि कानून किसानों के हित में है और कोई एमएसपी या मंडी खत्म नही होगी। लेकिन किसानों को अगर एमएसपी और मंडी सिस्टम ख़त्म होने का डर है और वो चाहते है कि सरकार नये कानून में एमएसपी और मंडी को लेकर एक कानून और जोड़ दे कि मंडी सिस्टम खत्म नही होगा और एमएसपी से कम दाम में फसल खरीदना एक अपराध होगा। वैसे तो प्रधानमंत्री कई मौंको पर कह चुके है कि एमएसपी और मंडी पहले की तरह ही काम करेंगे लेकिन पीएम इसे नये कानून में जोड़नें से क्यों कतरा रहे है।

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आपको बता दें एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य एक प्रकार से गारंटी होती है जो किसानों को उनकी फसल के लिए सरकार की ओर से दिया जाता है।
किसानों को लगता है कि इस बिल से सरकार बड़े कॉर्पोरेट कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है,और इसकी वज़ह है नये कानून में कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन कृषि सेवा करार 2020 इस कानून से किसान को उसका पक्ष कमजोर लगता है क्योकि अगर बड़ी कंपनियों से साथ कोई विवाद की स्थिति बनी तो लाभ कंपनियों को होगा किसानों को नही।

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