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लाखों लोगों से 31 अगस्त को क्यों छिन जाएगी भारतीय नागरिकता: जाने

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Nehal Rizvi | Ground Report

भारत के राज्य असम में अवैध नागरिकों को लेकर एनआरसी की अंतिम सूची 31 अगस्त को जारी की जानी है. सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी के प्रकाशन के लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित की थी. इसमें असम के नागरिकों की सूची प्रकाशित की जाएगी, जिससे यहां के सही निवासियों की पहचान की जाएगी और अवैध घुसपैठियों को उनके देश वापस भेजा जाएगा.

असम के करीब 41 लाख लोगों की नागरिकता का भविष्य इसी एनआरसी के प्रकाशन के बाद तय होगा. बता दें कि असम में अवैध तरीके से घुस आए बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ असम में करीब छह साल से जन आंदोलन चल रहा था. यह राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर इसी का नतीजा है. 31 अगस्त को असम में एनआरसी की अंतिम सूची जारी होने के बाद लाखों लोग घुसपैठिये घोषित कर दिए जाएंगे.

एनआरसी की लिस्ट में शामिल होने की क्या है शर्त

एनआरसी की वर्तमान लिस्ट में शामिल होने के लिए व्यक्ति के परिजनों का नाम साल 1951 में बने पहले नागरिकता रजिस्टर में होना चाहिए या फिर 24 मार्च 1971 तक की चुनाव सूची में होना चाहिए. इसके लिए अन्य दस्तावेजों में जन्म प्रमाणपत्र, शरणार्थी पंजीकरण प्रमाणपत्र, भूमि और किरायेदारी के रिकॉर्ड, नागरिकता प्रमााणपत्र, स्थायी आवास प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, एलआईसी पॉलिसी, सरकार द्वारा जारी लाइसेंस या प्रमाणपत्र, बैंक या पोस्ट ऑफिस खाता, सरकारी नौकरी का प्रमाण पत्र, शैक्षिक प्रमाण पत्र और अदालती रिकॉर्ड शामिल हैं.

अगर आप एनआरसी सूची से बाहर हैं तो क्या होगा?

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि केवल एनआरसी में नाम न आने से कोई व्यक्ति विदेशी नागरिक घोषित नहीं हो जाएगा. जिनके नाम इसमें शामिल नहीं हैं, उन्हें फॉरेन ट्रिब्यूनल (एफटी) के सामने कागजातों के साथ पेश होना होगा. इसके लिए व्यक्ति को 120 दिन का समय दिए जाने का प्रावधान है. आवेदक के भारत का नागरिक होने या न होने का फैसला एफटी के हाथ में होगा. हालांकि, यदि आवेदक एफटी के फैसले से असंतुष्ट है तो उसके पास हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के पास जाने का भी अधिकार है.

लिस्ट में नाम छूट जाने पर सरकार मुफ्त क़ानूनी सलाह दिलवाने में मदद करेगी

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एनआरसी की अंतिम सूची में जो जरूरतमंद लोग शामिल नहीं हो पाएंगे, उन्हें सरकार मुफ्त में कानूनी सहायता मुहैया कराने के लिए जरूरी प्रबंध करेगी. असम के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं राजनीतिक विभाग) कुमार संजय कृष्णा ने एक बयान में कहा कि एनआरसी सूची में जो लोग शामिल नहीं हो पाएंगे उन्हें तब तक किसी भी हालत में हिरासत में नहीं लिया जाएगा जब तक विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) उन्हें विदेशी नागरिक घोषित न कर दे.