भारत के पास है दुनिया की सबसे ताकतवर हिमालयी सेना

Indian Army at High Altitude
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हाल ही में गलवान घाटी में हुए हिंसक झड़प के दौरान भारतीय सैनिकों ने 40 से अधिक चीनी सैनिकों को मार गिराया। इन ऊँचे शिखरों पर स्थित सीमाओं की सुरक्षा के लिए तैनात भारतीय सैनिक अधिक ऊंचाई व बर्फीली चोटियों पर चुनौतियों का सामना करने के लिए विशेष प्रशिक्षण से गुजरते है। इन पहाड़ी सीमाओं पर लड़ने की कला सैनिक हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल (HAWS) से हासिल करते है। भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अनुभवी सेना है जो उच्च-ऊँचाई वाली लड़ाइयों के लिए प्रशिक्षित है। इसका सारा श्रेय HAWS के कठोर प्रशिक्षण को जाता है।

क्या है HAWS?

हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल (HAWS) भारतीय सेना (Indian Army) का एक प्रशिक्षण और अनुसंधान प्रतिष्ठान है। HAWS के प्रशिक्षण से सैनिकों में आत्मविश्वास और सहनशक्ति पैदा होती है और अज्ञात भय से भी परिचित कराती है। HAWS से प्रशिक्षण लेने वाले सैनिकों को पर्यावरण से अनुकूलित होना सिखाया जाता है। जिससे वे हिमालय की सीमाओं को प्रभावी ढंग से संरक्षित कर सकें। HAWS विशेष प्रशिक्षण के लिए नोडल इंस्ट्रक्शनल सुविधा है, जो पहाड़, उच्च-ऊंचाई और हिमपात के क्षेत्र में अनुमोदित सिद्धांतों का प्रसार करता है।

क्या है HAWS का इतिहास?

इसकी स्थापना 1948 में, कश्मीर के गुलमर्ग में एक स्की स्कूल के रूप में की गयी थी। भारत-पाक युद्ध (Indo-Pak War) के बाद भारतीय सेना के जनरल के.एस थिमय्या (General K S Thimayya) द्वारा इसकी स्थापना हुई। 8 अप्रैल 1962 को, स्कूल को श्रेणी ‘ए’ प्रशिक्षण प्रतिष्ठान नामित किया गया और उसका नाम बदलकर हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल (HAWS) कर दिया गया। यह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध युद्ध अकादमियों में से एक है।

शिक्षा-प्रशिक्षण

भारत को पहाड़ी युद्ध कौशल का एक केंद्र माना जाता है क्योंकि देश के अधिकांश उत्तर और उत्तर-पूर्व में ऐसे कुशल बलों की आवश्यकता होती है। भारतीय सेना के पहाड़ी युद्ध के अनुभव और रणनीति अपने सैनिकों को क्षेत्र में सबसे कुशल बनाती है। HAWS पहाड़, उच्च-ऊंचाई व हिमपात के क्षेत्र में विशेष प्रशिक्षण प्रदान करता है। हाई एल्टिट्यूड वॉरफेयर (High Altitude Warfare), काउंटर इंटेलिजेंस (Counter Intelligence) और सर्वाइवल स्किल्स (Survival Skills) में सैनिकों को प्रशिक्षित किया जाता है।

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चुनौतियाँ

सैनिकों को ऊँचे शिखरों पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सबसे पहले सैनिकों को पर्यावरण के अनुकूल रहना सिखाया जाता है क्योंकि ऊंचाई पर ऑक्सीजन की आपूर्ति में भारी कमी होती है। दूसरी चुनौती, व्यक्तियों की भार वहन क्षमता में भारी कमी आती है। पहाड़ों में चीजें बहुत धीमी गति से चलती हैं और सैनिकों की भीड़ को आगे बढ़ने में ज़्यादा वक्त लगता है। सैनिकों की तैनाती और जुटता को प्राथमिकता दी जाती है। हलचल और हमले के दौरान सैनिकों की रख-रखाव के लिए पथ का ज्ञान व सामरिक बिंदुओं का ज्ञान होना ज़रूरी है। उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी ठंडक और बर्फ के कारण हथियार जाम एक बड़ी चुनौती है। हथियारों के कुशलता पूर्वक इस्तेमाल के लिए हफ्ते में एक बार उनकी चिकनाई व बैरल की सफाई का ध्यान रखना आवश्यक होता है। वाहन और मशीनों के संचालन के लिए उनके ईंधन में केमिकल व थिनर का प्रयोग किया जाता है क्योंकि ठंडक के कारण ईंधन में जमाव आ जाता है।

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दुनिया का सबसे अनुभवी HAWS

पूर्वी लद्दाख में चल रहे सीमा गतिरोध के बावजूद, चीनी सैन्य विशेषज्ञ ने भारतीय सेना की सार्वजनिक प्रशंसा की, जिसने कहा कि भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा और अनुभवी सैनिकों का सैन्यदल है जिनके पास बहुत ही प्रभावशाली हथियार है जो की पठार व पहाड़ी इलाको के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
मॉडर्न वेअपनरी मैगज़ीन (Modern Weaponry Magazine) के वरिष्ठ संपादक हुआंग गोजहि (Huang Guozhi) ने कहा कि, “वर्तमान में, पठार और पर्वतीय सैनिकों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा और अनुभवी देश न तो अमेरिका, रूस, और न ही कोई यूरोपीय पावरहाउस है, बल्कि भारत है। भारतीय पर्वतीय सेना के लगभग हर सदस्य के लिए पर्वतारोहण एक आवश्यक कौशल है। इसके लिए, भारत ने निजी क्षेत्र से बड़ी संख्या में पेशेवर पर्वतारोहियों और शौकिया पर्वतारोहियों को भर्ती किया है।”

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हालही में भारत ने चीन के संग हिंसक झड़प के बाद 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपने विशेष उच्च-ऊंचाई वाले युद्ध बलों को तैनात किया है। चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (Chinese People’s Liberation Army) द्वारा किसी भी सीमा पार से आक्रमण से LAC सुरक्षा के लिए भारतीय सेना को निर्देशित किया गया है।

Written By Ambika Rattanmani, She is a Post-Graduate Final Year Student of Journalism & News Media from GGSIPU, New Delhi.

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