भारत में हींग की खेती की शुरुवात

हींग की खेती से आत्मनिर्भर बनेगा भारत, बचेंगे देश के 900 करोड़ रुपए

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दाल हो या सब्ज़ी हींग के बिना खाना पूरा नहीं होता। हींग (asafoetida) की खुशबू से खाने का ज़ायका और बढ़ जाता है। भारतीय रसोई का यह जादूगर अब तक दूसरे देशों से भारत में लाया जाता था। लेकिन अब भारत सरकार की पहल पर देश में ही हींग की खेती संभव हो पाएगी। यानि अब थोड़े दिनों में भारतीय हींग की खुशबू आपकी रसोई में महकेगी।

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भारत में कैसे होगी हींग (asafoetida) की खेती?

  • हिमाचल प्रदेश के लाहौल वैली में किसान हींग की खेती की शुरुवात करने जा रहे हैं। यह संभव हो पाया है इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी के प्रयासों की वजह से।
  • इसके के लिए ठंडी मरुस्थली ज़मीन का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • 15 अक्टूबर को लाहौल घाटी के क्वारिंग गांव में हींग की पहली फसल उगाई गई है।
  • करीब 300 हेक्टेयर ज़मीन पर पहली फसल उगाई गई है। अगर पहले पांच साल अच्छा उत्पादन हुआ तो ही इसे सफल माना जाएगा।
  • अब तक हींग की पैदावार के लिए भारत के पास पौधे उगाने की तकनीक नहीं थी। लेकिन अब यह एग्रो तकनीक भारत के पास है जिससे वह पर्याप्त मात्रा में हींग का पौधारोपड़ करवा सकता है।
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भारत में हींग (asafoetida) की खपत

  • भारत हर वर्ष 1200 टन हींग का आयात उज्बेकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान से करता है ।
  • हींग के आयात के लिए हर वर्ष भारत 100 मिलियन डॉलर खर्च करता है।
  • भारत में हींग खाने में इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण मसाला है।
  • क्योंकि यह दूसरे देशों से आयात होकर आती है, इसलिए भारतीय बाज़ार में इसकी कीमत भी बहुत ज्यादा है।

हींग से किसानों का क्या होगा फायदा?

  • भारत अगर हींग की खेती में सफल रहा तो देश के 900 करोड़ रुपए देश में ही रहेंगे। इससे किसानों को आमदनी बढ़ाने में मदद होगी।
  • पहाड़ी इलाकों के किसानों के लिए आय का एक नया ज़रिया पैदा हो सकेगा।
  • हींग की फसल देश में सफल रही तो उपभोक्ताओं को कम कीमत में हींग मिलने लगेगी।
  • भारत हींग की पैदावार में आत्मनिर्भर हो जाएगा।
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