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तीन साल में खाने-पीने की चीजों में सबसे ज्यादा 5.54% बढ़ गई महंगाई

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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

खुदरा महंगाई  (India Retail Inflation)  दर नवंबर में बढ़कर 5.54 फीसदी हो गई है। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के कारण नवंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़ी है। गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में महंगाई दर 4.62 फीसदी थी।

कुछ आंकडों पर एक नज़र

  • दालों की कीमतों में 13.94 फीसदी इजाफा हुआ है जो अक्टूबर में 11.72 फीसदी था।
  • हाउसिंह इनफ्लेशन नवंबर में 4.49 फीसदी रहा जो अक्टूबर में 4.58 फीसदी था।
  • कंज्यूमर फूड प्राइस इनफ्लेशन नवंबर में बढ़कर 10.01 फीसदी हुआ जो अक्टूबर में 7.89 फीसदी था।
  • सब्जियों की महंगाई नवंबर में बढ़कर 36 फीसदी हो गई है जो एक महीना पहले 26 फीसदी थी।
  • फ्यूल में नरमी रही जो कमजोर आर्थिक ग्रोथ का संकेत है। नवंबर में यह -1.93 फीसदी रहा जो अक्टूबर में 2.02 फीसदी था।

अर्थव्यवस्था के मोर्च पर दो बड़े झटके लगे है। नवंबर महीने में महंगाई (India Retail Inflation) 4.62 फीसदी से बढ़कर 5.54 फीसदी हो गई है। वहीं, अक्टूबर में इंडस्ट्रियल ग्रोथ (Index of Industrial Production) फिर से निगेटिव जोन में बनी हई है। हालांकि, सितंबर के मुकाबले इसमें कुछ सुधार देखने को मिला है। यह -5.4 फीसदी के मुकाबले -3.8 फीसदी हो गई है। जबकि, पिछले साल अक्टूबर 2018 में यह 8.4 फीसदी थी।

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Ceadit -MC

नवंबर में शहरी और ग्रामीण इलाकों में खाने-पीने की चीजों के दाम 10.01 फीसदी तक बढ़ गए हैं। हेडलाइन CPI में फूड की हिस्सेदारी 45.9 फीसदी है। खाने-पीने की चीजों के दाम में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। सितंबर में प्याज की कीमतों में 45.3 फीसदी इजाफा हुआ है। वहीं अक्टूबर में प्याज के दाम 19.6 फीसदी बढ़े हैं।

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आपको बता दें कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में खास महत्व होता है। इससे पता चलता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि किस गति से हो रही है। अर्थशास्त्री बताते हैं कि देश के मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज सेक्टर में आर्थिक सुस्ती का दौर जारी है। देश में अभी तक प्राइवेट प्लेयर्स इन्वेस्टमेंट करने से झिझक रहे है। इसीलिए कई सेक्टर्स की कंपनियों में छंटनी हो रही है।

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