भारत के पड़ोसी देशों से रिश्ते

क्या पड़ोसी देशों से बिगड़ रहे हैं भारत के रिश्ते?

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चीन और नेपाल से सीमा विवाद के बाद अब ईरान ने भी भारत का नाम चाबहार प्रोजेक्ट से हटा दिया है। पिछले कुछ महीनों से भारत और उसके पड़ोसी देशों के रिश्तों में खटास पड़ती दिख रही हैं। चीन और भारत के बीच सीमा विवाद तो कई वर्षों से चलता आ रहा है, परन्तु नेपाल और ईरान के साथ भारत के अच्छे रिश्ते भी बिगड़ते दिख रहे हैं। ऐसे में भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद और ईरान का चाबहार प्रोजेक्ट से भारत को हटाने पर, भारत और उसके पड़ोसी मित्रों राष्ट्रों के बीच के संबंधो पर प्रश्न उठना लाजिम हैं।

चीन-भारत विवाद

15 -16 जून को भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में सीमा विवाद को लेकर हिंसक झड़प हुई, जिसमें 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो गई। जिसके बाद से पूरे देश में चीन के प्रति आक्रोश बढ़ गया और चीनी सामान का बहिष्कार शुरू हो गया। चीन के साथ बढ़ते सीमा विवाद को लेकर भारत सरकार ने 59 चीनी एप्प पर प्रतिबंध लगा दिया।

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भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर यह पहला विवाद नहीं हैं। इससे पहले भी चीन और भारत के बीच कई सीमा विवाद हो चुके हैं। जिनको लेकर दोनों ही देशों के बीच 1993,1996 और 2005 में समझौते तय हुए हैं। इन समझौतों से यह स्पष्ट हैं कि दोनों देश सैन्य बल से पहले शांति से आपसी मतभेदों को दूर करेंगे। हालांकि समय-समय पर चीन ने ही पहले सैन्य बल का प्रयोग किया है।

गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद 5 जुलाई को भारतीय एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। जिसमें दोनों प्रतिनिधियों ने द्विपक्षीय समझौतों और संधियों के अनुरूप ही भारत- चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बहाल करने के लिए बातचीत पर सहमति जताई थी। 10 जुलाई को हुई 16वीं बैठक के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया कि ” दोनों पक्षों ने सहमति जताई है कि वे तनाव घटाने के लिए एलएसी के पास से सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करेंगे। और दोनों पक्ष गतिरोध का समाधान सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक और सैन्य स्तर पर बातचीत बहाल रखने पर सहमत हुए हैं।”

नेपाल- भारत विवाद

भारत और नेपाल के रिश्ते हमेशा से ही दोस्ताना रहे हैं। परंतु पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल बन गया हैं, जब 20 मई को नेपाल ने अपना नया नक्शा जारी किया था। जिसमें उसने लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना हिस्सा दिखाया। ये तीनों हिस्से अभी भी भारत में हैं लेकिन नेपाल दावा करता है कि ये उसके इलाके हैं।
भारतीय न्यूज़ चैनलों ने नेपाल के प्रधानमंत्री के पी ओली और चीनी राजदूत होउ यांकी को लेकर जो सनसनीखेज दावे किए थे। जिसके बाद उन पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री के पी ओली ने भारतीय न्यूज़ चैनलों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

हाल ही में प्रधानमंत्री ओली ने कहा था कि ” भगवान राम का जन्म नेपाल में हुआ था।”

ईरान – भारत के बदलते रिश्ते

अखबार द हिन्दू की खबर के अनुसार, ईरान ने भारत को चाबहार रेल प्रोजेक्ट से अलग कर दिया है, जिसका कारण भारत से फण्ड मिलने में देरी है। भारत और ईरान के बीच सबसे पहले चाबहार समझौता 2003 में तत्कालीन ईरानी राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बीच हुआ था। जिसको एक साल के भीतर ही भारत ने छोड़ दिया था। फिर 2016 में प्रधानमंत्री मोदी के तेहरान दौरे के दौरान दोनों देशों ने ईरान,अफगानिस्तान और भारत के बीच त्रिपक्षीय ट्रैक पर सहमति जताई थी। और दोनों देशों के बीच रेल लाइन बनाने को लेकर एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर भी हुए थे। अब जब भारत इस प्रोजेक्ट से हटा दिया गया है, तो इसमें चीन की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद की जा सकती है। कुछ ही दिनों पहले चीन और ईरान ने एक समझौता किया है जिसके तहत वहां चीनी कंपनियां अगले 25 सालों में 400 अरब डॉलर का निवेश करेंगी।

इसके अलावा ईरान और भारत के बीच बढ़ती दूरी का कारण भारत का अमेरिकी दवाब में आकर ईरान से तेल ना खरीदना भी हैं। जबकि चीन ने ईरान से तेल खरीदना कभी बंद ही नहीं किया था। वर्तमान में, ईरान की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय है, ऐसे में चीन का साथ उसको इस स्थिति से उबरने में सहायक हो सकता हैं।

Written By Kirti Rawat, She is Journalism graduate from Indian Institute of Mass Communication New Delhi

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