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भारत चीन विवाद: प्रधानमंत्री मोदी के बयान के बाद चीन में जश्न क्यों?

भारत चीन विवाद
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बीते 15 जून सोमवार की रात भारत और चीन की सेना में हिंसक झड़प हुई और भारतीय सेना के 20 जवानों की जान चली गई। पहले तीन जवानों की मौत की ख़बर आई लेकिन बाद में भारतीय सेना ने ख़ुद ही बयान जारी कर बताया कि 17 अन्य जवान गंभीर रूप से ज़ख़्मी थे और उनकी भी मौत हो गई। इस ख़बर के आते ही पूरे देश में चीन को लेकर लोगों में ग़ुस्सा भर गया और लोग बदले की मांग को लेकर चीनी सामान का बहिष्कार करने लगे।चीन-भारत विवाद पर पीएम मोदी की चुप्पी को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर था और मोदी की चुप्पी पर मीडिया ने भी सवाल पूछना शुरू कर दिए थे। 20 जवानों की शहादत के बाद जब पीएम ने 19 जून को  भारत-चीन सीमा पर जारी तनाव के बीच सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि एलएसी के इस तरफ़ यानी भारतीय सीमा में कोई चीनी सैनिक नही आए और न ही भारत की ज़मीन पर क़ब्ज़ा हुआ है ।

तो प्रधानमंत्री मोदी के इसी बयान पर राहुल गांधी ने सवाल किया था और पूछा था कि अगर वह जमीन चीन की थी, जहां भारतीय जवान शहीद हुए तो हमारे सैनिकों को क्यों मारा गया? उन्हें कहां मारा गया? एक बार फिर दोबारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और गलवान संकट को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी वास्तव में ‘Surender Modi‘ हैं।

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राहुल गांधी की टिप्पणी पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल जिस भाषा का इस्तेमाल वो कर रहे हैं ऐसा दुश्मन देश के नेता भी नहीं कर रहे। उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। बीजेपी ने कहा कि राहुल गांधी सारी मर्यादा तोड़ रहे हैं।

पीएम मोदी के बयान के बाद PMO को देना पड़ा स्पष्टीकरण ?

प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सीमा विवाद के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक में दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को कुछ हलकों में तोड़मरोड़ कर पेश किया गया । प्रधानमंत्री ने स्पष्टता से कहा है कि भारत-चीन लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल में किसी भी तरह के बदलाव करने की एकतरफ़ा कोशिश का भारत कड़ा विरोध करता है।

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जब प्रधानमंत्री ने कहा कि एलएसी के इस तरफ़ यानी भारतीय सीमा में कोई चीनी नहीं है तो उनके कहने का तात्पर्य था कि उस स्थिति में हमारे सैनिकों की बहादुरी के कारण यह संभव हुआ है। 16 बिहार रेजिमेन्ट के सैनिकों ने उस दिन चीनी सैनिकों के निर्माण कार्य करने और एलएसी का उल्लंघन करने की कोशिश को नाकाम किया।

पीएम के शब्दों में जिन लोगों ने हमारे देश की सीमा का उल्लंघन करने की कोशिश की उन्हें हमारे बहादुर सैनिकों ने उचित जवाब दिया है. पीएम ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमारी सेनाएं देश की सीमाओं की रक्षा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। सर्वदलीय बैठक में यह भी बताया गया कि बीते साठ सालों में परिस्थितियों के अनुरूप 43,000 वर्ग किलोमीटर की जगह देश के हाथों से फिसली है और देश इससे अच्छी तरह से वाकिफ है ।

पीएम मोदी के बयान को चीनी मीडिया में अनुवाद कर बार-बार सुना और सुनाया जा रहा है। वहां की मीडिया ने भारत की तारीफ में कसीदे पढ़ने शुरु कर दिये हैं। प्रधानमंत्री के बयान को वहां यह कह कर प्रसारित किया जा रहा है कि चीनी सेना भारतीय क्षेत्र में आई ही नहीं।

लेकिन प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद कई सवाल उठे

कई जानकारों ने सवाल उठाया था कि क्या पीएम ये कहना चाहते हैं कि आज जहां चीनी सैनिक हैं वो सारी जगह उनका क्षेत्र है और विदेश मंत्रालय ने यह क्यों कहा था कि चीन ने भारत की तरफ़ के एलएसी पर गलवान में कुछ निर्माण करने की कोशिश की थी ।

सामरिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेल्लाणी ने भी सवाल किया था कि क्या मोदी का ये बयान इस बात की ओर इशारा देता है कि भारत ने गलवान घाटी में चीन के ज़बरन यथास्थिति में बदलाव को स्वीकार कर लिया है?

वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा है कि भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल में पैंगोंग झील के पास भारत की सीमा के भीतर चीनी सैनिक हैं और सैटलाइट फ़ोटो साफ़ तौर पर ये दिखाती हैं। इस वीडियो में कहा जा रहा है कि सैटलाइट तस्वीरों में दिख रहा है कि गलवान घाटी में सीमा के दूसरी तरफ चीनी सैनिकों ने भारी निर्माण कार्य किया है। लेकिन पैंगोंग में आठ किलोमीटर लंबे उस क्षेत्र पर चीनी सैनिकों ने क़ब्ज़ा कर रखा है जिसे भारत अपना मानता है।

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चीन ने भारत के भू-भाग को पूरी तरह से खाली नहीं किया !

इंडिया टुडे के हवाले से ख़बर है कि चीन ने गलवां नदी घाटी क्षेत्र में में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलसीए) के इधर भारतीय भू-भाग को पूरी तरह से खाली नहीं किया है। पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर ही भारत और चीन के सैनिकों के बीच में 15-16 जून को हिंसक झड़प हुई थी।

हिंसक झड़प का कारण ही भारतीय भू-भाग को चीन की घुसपैठ से मुक्त कराना था। यह गलवां नदी घाटी का किनारा ही था। चीन ने पैंगाोंग त्सो के आसपास भारतीय क्षेत्र में 8 किमी की लंबाई में सैन्य संरचना, स्थाई बंकर आदि बना लिए हैं। अप्रैल महीने से लेकर जून तक उसने लगातार इसे अंजाम दिया है। चीन की सेना फिंगर 1-3 तक गश्त करती थी। भारतीय सुरक्षा बल फिंगर 4-से 8 तक निगरानी करते थे।

फिंगर 4 पर  आईटीबीपी की निगरानी पोस्ट थी। अब चीन के सैनिक भारतीय सुरक्षा बलों को फिंगर 4 से आगे की तरफ नहीं जाने दे रहे हैं।इस तरह से देखा जाए तो सैन्य सूत्रों के मुताबिक करीब 60 वर्ग किमी का भारतीय भू-भाग चीन के कब्जे में है और चीन इसे खाली करने या मामले को सुलझाने के बारे में कोई बात नहीं करना चाहता।

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