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ग्लोबल टाईम्स: लाखों भारतीय गरीबी के अंधेरे में डूबने वाले हैं

ग्लोबल टाईम्स ने फिर साधा भारत पर निशाना
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भारत और चीन के बिगड़ते रिश्तों की बीच सैन्य हलचल बढ़ चुकी है। भारत ने तनाव के बीच 118 चीनी ऐप बैन कर सीमा पर अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है। चीनी अखबार ग्लोबल टाईम्स ने भारत की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवाणें सीमा पर तैयारियों का जायज़ा लेने पहुंच चुके हैं।


LAC पर तनाव है और इसे देखते हुए हमने ऐहतियात के तौर पर तैनाती की है। पूरे एलएसी में तैनाती है ताकि हमारी अखंडता बरकार रहे। चीन से लगातार मिलिट्री और डिप्लोमेटिक स्तर पर बातचीत हो रही है, यह आगे भी जारी रहेगी। हमें यकीन है कि बातचीत के जरिए समाधान निकल जाएगा और एलएसी पर पहले वाली स्थिति बहाल होगी। हमारे अफसर और जवान दुनिया में सबसे बेहतर हैं। उन पर आर्मी ही नहीं पूरे देश को गर्व है। सबका हौसला एकदम हाई है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवाणे

चल क्या रहा है?

आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवाणे के इस बायन ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं। यह बयान बताता है कि किस तरह भारत और चीन के बीच संबंध नाज़ुक स्थिति में पहुंच चुके हैं। गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद कई दौर की बातचीत चली और लगा था कि चीन और भारत के बीच संबंध ठीक हो चुके हैं। सरकार की ओर से भी इसे बड़ी सफलता की तरह पेश किया गया। सरकार ने बताया कि किस तरह भारत ने चीन को पीछे हटने को मज़बूर कर दिया। लेकिन हाल ही में चीन की ओर से दोबारा भारतीय इलाके में घुसपैठ हुई जिसका भारतीय जवानों ने बखूबी जवाब दिया। लेकिन यह साफ हो गया कि चीन अपनी हरकतों से बाज़ आने वाला नहीं हैं। बातचीत की टेबल पर चीन को जावाब देना आसान नहीं है।

ग्लोबल टाईम्स में छपा लेख

वहीं भारत से चल रहे सीमा विवाद के बीच चीन की सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख छापा है। इसमें कहा गया है कि भारत ने चीन के साथ संघर्ष जारी रखा तो उसे इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके साथ ही, कोरोना वायरस और अर्थव्यवस्था को लेकर भी मोदी सरकार को निशाने पर लिया है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है


भारत के लिए एलएसी पर ऊंचाई पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती करना काफी खर्चीला होगा। हर दिन हथियारों और सामान की आपूर्ति से भारत की आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ेगा। सर्दी आने पर सेना की तैनाती का खर्च और भी ज्यादा बढ़ जाएगा। चीन के साथ संघर्ष ना केवल भारत के विदेशी सहयोग को नुकसान पहुंचाएगा बल्कि औद्योगिक आपूर्ति चेन को भी प्रभावित करेगा। इससे भारतीय बाजार में भरोसा कमजोर होगा और निवेश-व्यापार दूर होता चला जाएगा। भारत को युद्ध की मंडराती छाया के आर्थिक असर का आकलन करना होगा क्योंकि सर्दी में एलएसी पर सेना की तैनाती का खर्च उसकी पस्त अर्थव्यवस्था वहन नहीं कर पाएगी।

ग्लोबल टाईम्स में छपी प्रमुख बातें

  • ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त बहुत ज्यादा दबाव में हैं क्योंकि इस वित्तीय वर्ष में जीडीपी में रिकॉर्ड 10 फीसदी की गिरावट आने की आशंका है।
  • लाखों भारतीय नौकरी गंवाने और काम ना मिलने की वजह से गरीबी के अंधेरे में डूबने वाले हैं।
  • मोदी की 2024 में तीसरे कार्यकाल की उम्मीद धुंधली पड़ती जा रही है क्योंकि तमाम भारतीय कारोबार और नौकरियां स्थायी रूप से खत्म हो रही हैं।
  • इसके साथ ही, कोरोना वायरस की महामारी भी रिकवरी की जल्द उम्मीद को धूमिल कर रही है।
  • चीजों को और जटिल बनाते हुए भारत ने मूर्खतापूर्ण तरीके से चीन के साथ सीमा विवाद खड़ा कर लिया है।
  • भारत के गलत बर्ताव की वजह से पहले से ही खराब द्विपक्षीय संबंध और नाजुक हो गए हैं। इससे भारत से चीनी निवेश खत्म होता जाएगा। कई चीनी कंपनियां भारत से अपना कारोबार समेटेंगी।
  • आने वाले वक्त में चीन के साथ खराब संबंध भारत के लिए सबसे नुकसानदेह साबित होंगे क्योंकि भारत एक ताकतवर और विशाल पड़ोसी देश से भाग नहीं सकता है।
  • अगर भारत में कोरोना वायरस की महामारी नियंत्रित नहीं होती है और स्वास्थ्य संकट 2021 तक बना रहता है तो आर्थिक मंदी आने की भी आशंका है।
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