आजा़दी के बाद देश में महिलाओं की स्थिति

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विचार- पिन्की कड़वे

हमारे समाज में महिलाओं की स्थिति में धीरे धीरे ही सही, पर सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। फिर चाहे वह शिक्षा हो स्वास्थ्य हो या खेलों का क्षेत्र हो। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की हाल ही में आई एक रिपोर्ट में महिलाओं की स्थिति को लेकर कुछ सकारात्मक परिवर्तन देखे गए हैं, हांलाकि कुछ चिंताएं भी जताई गई है। सर्वेक्षण में प्रजनन, बाल और शिशु मृत्यु दर, परिवार नियोजन पर अमल, मातृ और शिशु स्वास्थ्य, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता आदि का विवरण दिया गया है।

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देश के विकास और क्षेत्रों में महिलाओं की सहभागिता

● राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।
● बाल विवाह की दर में गिरावट को भी महिला स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानूनन बाल विवाह अपराध घोषित किये जाने और समाज में इस मुद्दे पर लगातार लोगों को जागरूक करने के बावजूद बाल विवाह का चलन अब भी बरकरार है जिसे रोकने कि मुहिम जारी है।
● सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार बैंकिंग व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी पहले से कई गुना बढ़ी है।
● शिक्षा का निम्न वर्ग के परिवार पर भी पड़ा है घरेलू हिंसा में कमी आई है साथ ही परिवार में उन्हें सम्मान भी दिया जाने लगा है…
● शिक्षा ,धर्म, व्यक्तित्व, और सामाजिक विकास में महिलाओं का योगदान स्मरणीय है।
● स्वतंत्रता के लड़ाई हो या कोई अन्य कार्य महिलाओं ने अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई है और दुश्मनों को मुह तोड़ जवाब भी दिया है।
● खेलों के क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी काफी सराहनीय है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं ने देश का नाम रोशन किया है और परचम लहराया है।

देश को प्रेरणा देने वाली महिलाएं-

सरोजिनी नायडू
सरोजिनी नायडू हमेशा से ही नारी-मुक्ति की समर्थक रहीं। वे गाँव-गाँव जाकर देश-प्रेम की चेतना लोगों में जगाती थीं। नायडू लोगों को अपना कर्तव्य निभाने के लिए जागरूक करती थीं। उनकी बातें जनता पर अपनी छाप छोड़ जाती थी। उनका भाषण बहुत प्रभावशाली था और प्रेरणा दायक होता था। वे अलग अलग भाषा जानती थीं और क्षेत्रों के आधार पर उस जगह की भाषा में भाषण देतीं थीं। सरोजिनी नायडू एक धीर वीरांगना थीं और कभी संकटों से घबराती नहीं थीं।

साक्षी मलिक
खेल जगत में भारत का नाम दुनिया भर में रोशन करने वाली साक्षी मलिक भारतीय महिला पहलवान हैं। मलिक ने ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में साल 2016 में हुए ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में कांस्य पदक जीत कर भारत को एक अलग पहचान दिलाई। हाल ही में साक्षी को पद्म श्री और राजीव गांधी खेल रत्न से भी सम्मानित किया गया है।

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दीपा कर्मकार
9 अगस्त 1993 को जन्मी दीपा कर्माकर एक कलात्मक जिम्नास्ट हैं। दीपा ने साल 2016 में हुए ओलम्पिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। ओलंपिक में प्रतिभाग करने वाली वे पहली भारतीय महिला जिम्नास्ट हैं। बीते 52 सालों में ऐसा करने वाली वे प्रथम भारतीय जिम्नास्ट है।

इस बात को भी ध्यान रखना जरूरी
हांलाकि, हमें इस बात की ओर भी ध्यान देना होगा कि बीते कुछ वर्षों में महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसाओं में तेजी से इजाफा हुआ। बीते दिनों आई थॉमसन रॉयटर्स की एक रिपोर्ट ने देश महिलाओं की सबसे चिंताजनक स्थित से रूबरू करवाया था। ग्लोबल एक्सपर्ट्स द्वारा कराए गए इस पोल में बताया गया था कि भारत महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश है। क्योंकि यहां महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा करना और उन्हें गुलामों जैसे कामों में झोंकना अन्य देशों के मामले में ज्यादा आसान है। इस रिपोर्ट में भारत के बाद अफगानिस्तान और सीरिया जैसे देशों का नाम है।

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