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सरसों तेल की कीमत ‘सातवें आसमान’ पर, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का अजीब तर्क!

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Increasing rates of oil:  पेट्रोल, डीजल के बढ़ते रेट की वजह से जहां लोग कहीं आने जाने से पहले सोचने लगे थे, वहीं अब रसोई का भी बजट भी सरकार ने बिगाड़ दिया है। सरसों और दूसरे तेल के रेट अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गए है। Increasing rates of oil: इस पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि पहले तेल में मिलावट होती जिस पर अब सरकार ने रोक लगा दी है। शुद्ध तेल मिलने की वजह से थोड़ी कीमत बढ़ी हैं लेकिन इससे किसानों को फायदा होगा।

कितना उत्पादन होता है एक साल में

अगर आंकड़ो की माने तो केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 2020-21 में 9.99 मिलियन टन सरसों के उत्पादन (Mustard Production) का रिकॉर्ड बताया है और यह भी कोई कन्फर्म आँकड़ा नहीं है सरकार के लगाए हुए अनुमान हैं। 2021-20 में होने वाला तेल का उत्पादन अब तक का सबसे ज्यादा उत्पादन है। इसके अलावा साल 2019-20 में यह 9.12 मिलियन टन था। सरकार तो यह भी कह रही है कि 2015-16 से 2019-20 तक का सरसों का औसत सालाना उत्पादन 8.30 मिलियन टन रहा है।

कितनी बढ़ी तेल की कीमतें

एक रिपोर्ट्स के मुताबिक आज से ठीक एक महीने पहले 7 मई को कोल्हू पर 180 रुपये लीटर सरसों का तेल मिल रहा था। जिसका रेट अब बढ़कर 240 रुपये तक पहुंच गया है। पिछले साल यानी 2020 में यहां इसका रेट 140 रुपये लीटर था। इसके अलावा सोयाबीन तेल पहले 175 रुपये का मिलता था अब उसकी कीमत 210 रुपये से ज्यादा कर दी गई है। ग्राउंडनट यानी मूंगफली का तेल पहले 135 रुपये प्रति लीटर मिलता था लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर 280 रुपए प्रति लीटर हो गयी है।

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सरकार ने ब्लेडिंग पर लगाई रोक

आपको बता दें कि तेल में तय मात्रा में अन्य खाद्य तेलों को मिलाने के प्रोसेस को ब्लेंडिंग कहा जाता है। ब्लेडिंग रोकने से सरसों तेल की ऑफीशियल मिलावट बंद हो गई है।  इससे सरसों के शुद्ध तेल की खपत बढ़ी है। एक लीटर तेल निकालने में पहले की तुलना में ज्यादा सरसों लगता है। कोरोना की वजह से लोगों ने सेहत से समझौता नहीं किया जा सकता इसलिए सरकार  मिलावटी चीजों की बजाय शुद्ध पर फोकस कर रही है। सरसों तेल की गुणवत्ता अच्छी होती है, इसलिए डिमांड बढ़ी है। डिमांड बढ़ने से भाव बढ़ते हैं।

70,000 करोड़ का ख़र्चा तेल आयात में

खाद्य तेलों के आयात को कम करने के लिए सरकार ने केंद्र राष्ट्रीय तिलहन मिशन (National Oil Seed Mission) शुरू किया है। इस पर पांच साल में करीब 19,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।  सरकार 14 मिलियन टन सरसों उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने के लिए काम कर रही है। भारत सालाना करीब 70,000 करोड़ रुपए का खाद्य तेल आयात करता है।

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गणित के अनुसार कैसे बनता है तेल

एक क्विंटल सरसों में औसतन 36 लीटर तेल निकलता है। इस समय  सरसों का औसत दाम 7500 रुपये क्लिंटल चल रहा है। इस तरह शुद्ध तेल का दाम 208 रुपये प्रति लीटर हो सकता है।  इस पर पेराई करने वाला भी अपना हिस्सा लेता है। एक क्विंटल सरसों में करीब 60 किलो खली निकलती है जिसमें करीब 1320 रुपये की खली होती है। इसमें कोल्हू, ट्रांसपोर्टेशन और मार्केटिंग का खर्च निकल भी जुड़ा होता है।

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तेल की बढ़ती कीमत पर क्या कहा केंद्रीय मंत्री ने

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेद्र सिंह तोमर ने देश में खाद्य पदार्थों की बढ़ती मंहगाई को लेकर मीडया के सामने बयान दिया कि केंद्र की मोदी सरकार बढती मंहगाई को रोकने लिए बहुत जरूरी कदम उठा रही है। जिस तरह दाल महंगी हुई थो तो सरकार ने सभी व्यापारियों को स्टाक खोलने के निर्देश दिए थे, उसी तरह सरकार ने सरसों के तेल में मिलावट को भी रोका है, जिससे किसानों को फायदा होने वाला है।

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