Sun. Sep 22nd, 2019

भुखमरी मिटाने में जो देश 103वें स्थान पर हो वहां ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ किसी भद्दे मज़ाक़ जैसा

विचार | नेहाल रिज़वी

मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) में लगातार पिछड़ता ही जा रहा है. जहां साल 2014 की बात करें तो, भारत 99वें स्थान पर था. वहीं साल 2015 में 93वें स्थान पर जा पहुंचा. इसके बाद साल 2016 में 97वें और साल 2017 में 100वें पायदान पर पहुंच गया. साल 2018 का ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) जारी किया गया है और इसके अनुसार भारत 119 देशों की सूची में 103वें स्थान पर पहुंच गया.

आज प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम से ‘फिट इंडिया मूवमेंट को लॉन्च किया’. इस मूवमेंट को लॉन्च करते हुए पीएम मोदी ने देश के सभी आयुवर्ग के लोगों को संदेश देते हुए कहा कि, “यदि हमारी बॉडी फिट रहेगी तो माइंड भी फिट रहेगा”. अपने भाषण में आगे बोलते हुए मोदी ने कहा कि स्वास्थ्य फिट रखने के लिए जीरो इनवेस्टमेंट लगता है, लेकिन लाभ अनंत होते हैं. यह मुहिम सरकार की नहीं बल्कि हम सबकी है. इस मूवमेंट को जनता आगे ले जाएगी.”

अपने भाषण में पीएम मोदी ने आगे कहा कि, “भारत में डाइबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां  बहुत तेज़ी से बढ़ती जा रही हैं, आजकल हमलोग सुनते हैं कि हमारे पड़ोस में 12-15 साल का बच्चा डाइबिटिक है. पहले सुनते थे कि 50-60 की उम्र के बाद हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है, लेकिन अब 35-40 साल के युवाओं को हार्ट अटैक आ रहा है.

यह तो बात हो गई फिट इंडिया मूवमेंट की. अब सवाल यह है कि बिना खाए-पिये क्या कोई फिट रह सकता है? जिस इंसान या परिवार के पास अपना भरण-पोषण करने के लिय दो वक़्त की रोटी न हो, तब उसकी बॉडी और माइंड कैसे फिट रहेगा. या फ़िर यह समझा जाए कि यह फ़िट इंडिया मूवमेंट केवल कुछ सिलेक्टेड लोगों के लिय ही है. उधोगपतियों, फ़िल्म इंडस्ट्री के कलाकारों, नेता, उच्च वर्ग के खाते-पीते लोग, जो छींक आने पर भी एम्स में भर्ती हो जाया करते हैं.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) दुनिया भर में भुखमरी पर आंकलन करने वाली एक संस्था है.भूख से लड़ने में हुई प्रगति और समस्याओं को लेकर ये संस्था हर साल इसकी गणना करती है.ग्लोबल हंगर इंडेक्स भुखमरी को जिन पैमानों से आंकती उसमें यह संस्था देखती है कि देश की कितनी जनसंख्या को पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल रहा है. यानि देश के कितने लोग कुपोषण के शिकार हैं. इसमें ये भी देखा जाता है कि पांच साल के नीचे के कितने बच्चों की लंबाई और वजन उनके उम्र के हिसाब से कम है. इसके साथ ही इसमें बाल मृत्यु दर की गणना को भी शामिल किया जाता है.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स की प्रति वर्ष जारी होने वाली रिपोर्ट के अनुसार भारत भुखमरी मिटाने में लगातार पिछड़ता ही जा रहा है. वर्तमान समय में भारत की स्थिति नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से भी खराब है. इस मामले में चीन भारत से बहुत आगे है. चीन 25वें नंबर पर है और तेज़ी से आगे निकल रहा है. वहीं बांग्लादेश 86वें, नेपाल 72वें, श्रीलंका 67वें और म्यामांर 68वें स्थान पर हैं. पाकिस्तान भारत से पीछे है. उसका 106वां स्थान है.

पिछले पांच सालों में मोदी सरकार ने भुखमरी को खत्म करने को लेकर कोई बड़ा कैंपेन नहीं चलाया. मोदी सरकार के आने के बाद भारत भुखमरी दूर करने के मामलें में लगातार पिछड़ता ही जा रहा है. अब आप ही सोचें कि यह ‘फ़िट इंडिया मूवमेंट’ किसके लिय है? जिस चीज़ को लेकर सरकार को युद्ध स्तर पर कैंपेन चलाना चाहिए, उसका तो कहीं ज़िक्र ही नहीं हो रहा. सरकार को अपनी आवाज़ बेच चुकी मीडिया इस मुद्दे पर सरकार को नहीं घेर सकती है. अब आप ही बताएं कि कैसे फिट होगा भूखा इंडिया?

इस लेख में व्यक्त किये गए विचार पूरी तरह लेखक के निजी विचार हैं। ग्राउंड रिपोर्ट ने इस लेख में किसी तरह का कोई बदलाव या संपादन नहीं किया है।

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