जितना पैसा योगी सरकार धर्म के नाम पर ख़र्च कर रही, उतने में यूपी के 9 करोड़ ग़रीबों को ग़रीबी से ऊपर उठाया जा सकता है !

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नेहाल रिज़वी | कानपुर

यूपी देश का एक ऐसा प्रदेश है जिसकी आबादी देश के अन्य सभी राज्यों से अधिक है. दिल्ली की सत्ता का रास्ता भी यूपी से ही होकर जाता है. देश को 9 प्रधानमंत्री देने वाला ये प्रदेश आज भी एक पिछड़ा प्रदेश कहलाता है. आज भी यहां लाखो लोग सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. स्वास्थ, शिक्षा, ग़रीबी और बेरोज़गारी जैसी समस्याऐं आज भी यूपी के विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है. उत्तर प्रदेश में आज भी हज़ारों लोग ऐसे हैं, जिनके पास सर छिपाने को घर नहीं और वे सभी सड़कों पर जीवन गुज़ारने को मजबूर हैं.

बीते दो सालों में हज़ारों करोड़ रूपय धर्म और आस्था के नाम पर लुटा दिए गए

योगी आदित्यनाथ के यूपी का सीएम बनने के बाद हिंदूत्व के सभी खेमें बहुत ख़ुश थे. योगी ने सत्ता संभालते ही अपने तेवर साफ़ ज़ाहिर कर दिए थे. बीते दो सालों में योगी सरकार ने धर्म और आस्था के नाम पर हज़ारों करोड़ रूपय खर्च कर दिए हैं और आगे भी धर्म और आस्था के नाम पर पैसों की बर्बादी जारी है. प्रदेश की योगी सरकार ने 7 फरवरी 2019 को 4,79,701,10 करोड़ रुपए का बजट पेश किया था. लोकसभा के चुनावी साल में हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने के लिए यूपी के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने अपने बजट भाषण की शुरुआत ही कुंभ मेले से ही की थी. इसके बाद उन्होंने सूबे के प्रमुख हिंदू धर्मस्थलों के लिए सैकड़ों करोड़ रूपए के बजट का प्रावधान किया था.

हिंदुत्व के नाम पर योगी सरकार ने बजट में हज़ारों करोड़ की घोषनाएं की

योगी सरकार ने इलाहबाद में 50 दिन चले कुंभ मेले पर लगभग 4200 करोड़ रूपए खर्च किए जिसमें 2200 करोड़ रुपए केंद्र सरकार द्वारा प्रतावित थे. इससे पहले किसी सरकार ने कुंभ मेले पर इतना पैसा खर्च नहीं किया था. योगी सरकार ने 2019 में पेश किए बजट में संस्कृति विभाग में मथुरा वृंदावन के मध्य आडोटोरियम के निर्माण हेतु 8 करोड़ 38 लाख रुपये दिए. सार्वजनिक रामलीला स्थलों में चहारदीवारी निर्माण हेतु पांच करोड़ की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है. साथ ही वृंदावन शोध संस्थान के सुदृढ़ीकरण हेतु एक करोड रुपए की व्यवस्था प्रस्तावित है.

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उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ में अवस्थापना सुविधाओं हेतु 125 करोड़ रुपए की व्यवस्था, अयोध्या में प्रमुख पर्यटन स्थलों के समेकित विकास हेतु 101 करोड़ रुपए की व्यवस्था, गढ़मुक्तेश्वर के पर्यटक स्थलों की समेकित विकास हेतु 27 करोड़ की व्यवस्था. इसके अलावा पर्यटन नीति 2018 के क्रियान्वयन हेतु 70 करोड रुपए और प्रो पुआर टूरिस्ट के लिए 50 करोड़ की व्यवस्था का प्रावधान है.

वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण योजना के क्रियान्वयन के लिए श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट विकास परिषद का गठन किया गया है. गंगा तट से विश्वनाथ मंदिर तक मार्ग के विस्तारीकरण एवं सुंदरीकरण के लिए 207 करोड़ की व्यवस्था. काशी हिंदू विश्वविद्यालय में वैदिक विज्ञानं केंद्र की स्थापना के लिए 16 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है.

इसके अलावा प्रयागराज में ऋषि भरद्वाज आश्रम एवं श्रृंगवेरपुर धाम, विंध्याचल एवं नैमिषारण्य का विकास, बौद्ध परिपथ में सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर, कपिलवस्तु, कौशाम्बी, एवं संकिसा का विकास, शाकुम्भरी देवी एवं शुक्रताल का विकास, राजापुर चित्रकूट में तुलसी पीठ का विकास, बहराइच में महाराजा सुहेलदेव स्थल एवं चित्तौरा झील का विकास तथा लखनऊ में बिजली पासी किले का विकास किया जाना प्रस्तवित है. जिसके लिए योगी सरकार ने सैकड़ों करोड़ रुपय इन योजनाओं के नाम पर भी प्रस्तावित हैं.

अयोध्या में राम की मूर्ति बनाने के लिय 300 करोड़ खर्च करेगी यूपी सरकार

धर्म और आस्था के नाम पर योगी सरकार ने बीते मार्च महीने में आयोध्या में राम की मूर्ति बनाने के लिय 300 करोड़ रूपय देने का एलान किया है, जिसपर काम शुरू किया जा चुका है. योजना के लिए 28 हेक्टेअर भूमि चिह्नित की गई है. साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग और बिडिंग कमेटी भी बन चुकी है. अयोध्या में लगने वाली राम की मूर्ति का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश की कैबिनेट बैठक में पास हो गया है. इस मूर्ति को लगाने में दान और सीएसआर से फंड जुटाया जाएगा इसके अलागा सरकार इस प्रॉजेक्ट में 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी. यह मूर्ति अयोध्या के सरयू तट पर 28 हेक्टेयर जमीन पर लगेगी.

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यूपी में लचर अवस्था में स्वास्थ सेवाएं..

अब सवाल यह है कि जिस प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ, बिजली, पानी, ग़रीबी, भुखमरी और बेरोज़गारी जैसी तमाम समस्याएं चर्म पर हो, क्या वहां धर्म और आस्था के नाम पर हज़ारो करोड़ रूपए ख़र्च करना कितना उचित है? देश में स्वास्थ सेवाओं में बिहार के बाद सबसे निचले पायदान पर आने वाला प्रदेश यूपी ही है. पिछले साल गोरखपुर में बच्चों की हुई मौतों ने देश को हिलाकर रख दिया था.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में छह महीनों में बीच 1,049 बच्चों की मौत हो गई थी. इनमें इंसेफलाइटिस से ग्रस्त 73 बच्चे भी शामिल हैं. इस अवधि में सबसे अधिक एनआईसीयू (नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट) में 681 बच्चों की मौत हुई थी.

वर्ष 2017 में छह महीनों (180 दिन)- जनवरी, फरवरी, मार्च, अप्रैल, मई और जून में 1,201 बच्चों की मौत हुई थी. इसमें 767 एनआईसीयू में और 434 पीआईसीयू में भर्ती थे. ये आंकडा तो महज़ योगी के अपने क्षेत्र गोरखपुर के अस्पताल का है जहां से वह पांच बार सांसद रहे हैं. बाक़ी पूरे प्रदेश की स्वास्थ स्थिति तो बेहद ख़राब है.

यूपी में शिक्षा का हाल बद से बद्दतर

हालही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार यूपी में 17,602 ऐसे स्कूल हैं जहां सिर्फ़ एक ही शिक्षक मौजूद है. पूरे देश में पांचवीं तक के छात्रों की संख्या में पिछले एक साल में ही 23 लाख बच्चों की कमी आई है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश की कक्षाओं से 7 लाख बच्चे घट गए हैं. माध्यमिक व उच्च स्तरीय शिक्षा का भी हाल-बेहाल है. छात्रों को हायर एजुकेशन के लिए अक्सर प्रदेश को छोड़कर दूसरे प्रदेशों का रुख करना पड़ता है. जो छात्र यहां पढ़ते भी हैं उन्हें नौकरी करने फिर बाहर ही जाना पड़ता है.

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देश में सबसे ज़्यादा ग़रीबी यूपी में

देश में सबसे अधिक गरीब उत्तर प्रदेश में हैं जहां राष्ट्र के कुल गरीबों में से 22 प्रतिशत लोग जीवन बसर करते हैं. नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 36 करोड़ 29 लाख 90 हजार लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुज़ार रहे हैं. इसमें से आठ करोड़ नौ लाख 10 हजार अर्थात 22.29 प्रतिशत गरीब उत्तर प्रदेश में हैं. आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में ग्रामीण गरीबों की संख्या छह करोड़ नौ हजार हैं और दो करोड़ आठ लाख 20 हजार शहरी गरीब हैं.

देश में सबसे ज़्यादा बेरोज़गार यूपी में

इसी तरह से बेरोज़गारी देश में अगर कहीं सबसे अधिक है, तो वो भी यूपी में ही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मौजूदा समय लगभग यूपी के 5 करोड़ लोग रोज़गार के लिए भटक रहे हैं. मंदी का सबसे बुरा असर यूपी में ही देखने को मिल रहा है.

विकास से बढ़कर आस्था

हिंदुत्व के नाम पर आपने जिन लोगों को प्रदेश की सत्ता सौंपी है, उन लोगों ने बीते 2 सालों में, हज़ारों करोड़ रुपये धर्म और आस्था के नाम पर ख़र्च कर दिए. अब सवाल ये है कि जब प्रदेश की जनता को सरकार द्वारा हज़ारो करोड़ रुपये धर्म और आस्था के नाम पर ख़र्च करने पर कोई आपत्ति नहीं, तो हम सड़क,बिजली और पानी जैसी मूलभूत सेवाओं से वंचित होने पर सरकार का विरोध क्यों करें? जिस प्रदेश की जनता का लिए विकास से बड़ा मुद्दा आस्था हो, उस प्रदेश का विकास हो पाना बेहद मुश्किल होता है..