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IIT गुवाहाटी: तो ‘मंदिर’ को ‘अवैध निर्माण’ बताने पर छीन ली गई प्रोफेसर बृजेश राय से नौकरी?

IIT Guwahati : Professor Brajesh Rai terminated from job by administration temple dispute high court students protest
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Komal Badodekar | Guwahati/New Delhi

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी (IIT Guwahati) इन दिनों विवादों को लेकर चर्चा में है। यूं तो देश में राम मंदिर का मुद्दा सुलझ चुका है लेकिन आईआईटी जैसे देश के प्राइम संस्थान में मंदिर को लेकर मैंनेजमेंट और एक प्रोफेसर के बीच मामला बढ़ते-बढ़ते इतना बढ़ गया कि ये मामला हाई कोर्ट जा पहुंचा।

दरअसल, IIT गुवाहाटी के असिस्टेंट प्रोफेसर बृजेश राय शिक्षण संस्थान में मैनेजमेंट के खिलाफ एक के बाद एक अनियमितताओं, भ्रष्टाचार सहित कई मामले उजागर किए। इसके साथ ही प्रोफेसर राय ने बिना किसी इजाजत के संस्थान पर गैरकानूनी रूप से कैंपस में मंदिर निर्माण का आरोप लगाया है।

हांलाकि, इस मामले में IIT गुवाहाटी प्रशासन ने दावा करते हुए कहा है कि, जिस स्थान पर मंदिर का निर्माण किया गया है वहां ‘अनंत काल’ से मंदिर है। वहीं IIT गुवाहाटी में पढ़ने वाले छात्र विक्रांत ग्राउंड रिपोर्ट को जानकारी देते हुए बताया कि, जिस स्थान पर मंदिर का स्ट्रक्चर बनाया गया है उस जगह पीपल के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर सिर्फ देवी-देवताओं की तस्वीरें रखीं थीं।

साल 2015 में खींची गई तस्वीर।

इसके बाद उन्होंने कहा कि, देखते हुए देखते “चबूतरे” पर पक्का निर्माण शुरू हुआ और उस स्थान पर “मंदिर का स्ट्रक्चर” बना दिया गया। इस मामले में गुवाहाटी हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में कहा है कि, संस्थान ने कैंपस में शिव मंदिर निर्माण में कोई मदद नहीं की है।

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संस्थान ने आगे बताया कि, वहां मंदिर आईआईटी गुवाहाटी बनने के पहले से था। वहीं एक अन्य जानकारी का जवाब देते हुए कहा कि, मंदिर ‘अनंत काल’ से वहीं है। इन सब से इतर प्रोफेसर राय द्वारा बतौर सबूत गूगल मैप्स से उपलब्ध कराई गई तस्वीरों को पेश कर दावा किया गया है कि, बीते सात सालों में मंदिर के अस्थाई ढांचे को कंक्रीट बिल्डिंग में बदल दिया गया। वहां दरवाजे-खिड़कियां लगा दी गईं।

साल 2019 में खींची गई तस्वीर।
प्रोफेसर बृजेश राय को नौकरी से निकाल दिए जाने के बाद आंदोलन करते IIT छात्र।

आंदोलित छात्रों में से एक छात्र विक्रांत ने ग्राउंड रिपोर्ट को बताया कि, इस आंदोलन का नतीजा यह रहा कि, प्रशासन के मन में एक डर बैठ गया है। इसी डर के कारण अब तक नौकरी से टर्मिनेट किए जाने का नोटिस प्रोफेसर राय को नहीं सौंपा गया हैं। हम सभी छात्र प्रोफेसर बृजेश राय का समर्थन करते हैं। उन्होंने यहां अनिमितताओं, भ्रष्टाचार, नियुक्तियों में गड़बड़ी सहित कई मामलों में खुलासे किए हैं।

प्रोफेसर बृजेश राय को नौकरी से निकाल दिए जाने के बाद आंदोलन करते IIT छात्र।

छात्रों का दावा है कि, जब प्रोफेसर राय के समर्थन में शांति पूर्ण मार्च कर रहे थे तो इसके बाद संस्थान ने ईमेल भेजकर यह बताने को कहा था कि हम मार्च में शामिल थे या नहीं और अगर थे तो उसकी वजह क्या थी। बता दें कि, खुलासा करने वाले प्रोफेसर राय पर एक अन्य प्रोफेसर से हाथापाई करने के आरोप में उन्हें दिसंबर 2017 में सस्पेंड कर दिया गया था। मामला कोर्ट पहुंचा। आरोप झूठा साबित हुआ। हाई कोर्ट ने प्रोफेसर राय के निलंबन को अवैध ठहराया। करीब एक साल बाद नवंबर 2018 उन्हें वापस नौकरी पर बहाल किया गया।

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प्रोफेसर बृजेश राय, फाइल फोटो।

इस पूरे घटना क्रम के बाद मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोफेसर राय ने संस्था नें ‘मंदिर के स्ट्रक्चर’ के मामले में कहा है कि, मैं मंदिरों का विरोधी नहीं हूं, लेकिन पूजापाठ के लिए पर्सनल स्पेस होना चाहिए। शैक्षिक संस्थान में किसी धर्म से जुड़ा स्ट्रक्चर कैसे बनाया जा सकता है? यह बात भी ध्यान देने वाली है कि, IIT गुवाहाटी के ही एक अन्य मामले में नियमों के खिलाफ फाइव स्टार होटल में मीटिंग कर ‘सरकारी पैसे के दुरुपयोग’ के मामले में डायरेक्टर और डीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।