Thu. Jan 23rd, 2020

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IIMC Fee Hike: फीस बढ़ोत्तरी का फैसला अनुचित, इसे तुरंत वापस लेना चाहिए : केजी सुरेश

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Ground Report News Desk | Avinish Mishra

पिछले कई दिनों से भारतीय जनसंचार संस्थान में फीस वृद्धि को लेकर चल रहे आंदोलन को संस्थान के पूर्व महानिदेशक केजी सुरेश ने सही ठहराया है। सुरेश ने कहा है कि आईआईएमसी में फीस बढ़ोतरी का फैसला गलत और अनुचित है, बढ़ी फीस तुरंत वापस ली जानी चाहिए। उनसे बात की है हमारे सहयोगी अविनीश मिश्रा  ने…

प्र. संस्थान में जो फीस वृद्धि को लेकर आंदोलन हो रहा है, उसे कैसे देखते हैं?
केजी सुरेश – देखिए, इस आंदोलन में दो बातें हैं, पहला यह कि यहां जेएनयू की तरह अचानक फीस वृद्धि नहीं हुई है‌‌। पहले ही छात्रों को प्रोस्पेक्टर्स में फीस बताई गई थी और छात्र उसे मान कर ही यहां आए हैं तो यह कहना कि प्रशासन गलत है और छात्र सही है यह कहना मुझे अतिशयोक्ति लगता है। 

प्र. …तो फीस बढ़ोतरी के फैसले को आप सही मानते हैं?
केजी सुरेश – नहीं, आईआईएमसी में जो पिछले कई वर्षों से लगातार फीस बढ़ोतरी हो रही है, वो ग़लत है। नहीं होनी चाहिए।
वैसे इस बार फीस कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है, समथिंग (लगभग) 20 प्रतिशत। जो कि पूरी तरह से गलत है।

प्र. वर्तमान में प्रशासन कह रहा है कि पिछले महानिदेशक के कार्यकाल में ही तय हुआ था आईआईएमसी सेल्फ फाइनेंस्ड संस्था रहेगी !
केजी सुरेश – नहीं, यह गलत है। हमारे कार्यकाल में मंत्रालय के साथ हमने 70-30 प्रतिशत का समझौता पत्र बनाया था, जिसमें 70 प्रतिशत मंत्रालय देगी और 30 प्रतिशत बच्चे देंगे।

प्र. मतलब आपने यह नहीं कहा था कि सेल्फ फाइनेंस्ड नहीं होना चाहिए? 

केजी सुरेश- तो हमने यह थोड़ी कहा था कि बच्चों की फीस बढ़ा दो। हम दूसरे तरीके से सेल्फ फाइनेंस्ड पर जोर देते थे। जैसे-जो एनआरआई कोटा था, उसके सीट को बढ़ाकर उससे ज्यादा फीस लेते थे। इसके साथ ही मेरे समय में शुरू हुए उर्दू, मराठी और तेलगु पत्रकारिता की फीस बहुत कम है। 

एक और चीज़ जो हमने की वो ये कि आईआईएमसी के अंदर जो बैंक थी, उसका किराया सिर्फ एक रुपये लगता था, हमने उसका किराया बाजार रेट पर बढ़ाया।

प्र. लेकिन सूचना प्रसारण मंत्रालय की रिपोर्ट है कि सभी खर्च बच्चों के पैसों से ही किए जा रहे है?
केजी सुरेश- अगर ऐसा हो रहा है तो यह समझौता पत्र का उल्लंघन है और मेरे ख्याल से अगर 70-30 प्रतिशत समझौतों की मानें तो वर्तमान में जो फीस है उसके आधी फीस ही बच्चों को देना पड़ेगी।

प्र. आईआईएमसी प्रशासन एक और बहाना दे रहा है कि फीस वृद्धि का फैसला एक्जीक्यूटिव कमेटी करती है। वही इसे घटा भी सकती है
केजी सुरेश- नहीं, ऐसा कुछ नहीं होता है। यह सब जिम्मेदारी से भागने का बहाना है। हां जो आईआईएमसी के अध्यक्ष होते हैं और प्रसारण मंत्रालय के सचिव भी होते हैं। महानिदेशक अगर उन्हें अपना प्रस्ताव भेजते हैं तो वे फीस वापस कर सकते हैं। 

प्र. आपको क्या लगता है फीस वापस होनी चाहिए?
केजी सुरेश – हां, निश्चित ही। आईआईएमसी में अधिकतर बच्चे गरीब घर से आते हैं। उनको राहत मिलेगी और यह फैसला प्रशासन जितनी जल्दी ले सकता है उतनी ही जल्दी लेना चाहिए। 

प्र. आपको नहीं लगता है आंदोलन को खत्म करने में आईआईएमसी प्रशासन का फेल्योर रहा है अबतक?
केजी सुरेश – एक पूर्व महानिदेशक रहने के नाते इसपर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन हां इतना जरूर कहूंगा कि यह एक संवेदनशील मामला है, जिसमें आईआईएमसी प्रशासन और वर्तमान महानिदेशक को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। 

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