Home » HOME » मंत्रालय ने पिछले 4 साल में IIMC के बजट में भारी कटौती की: रिपोर्ट

मंत्रालय ने पिछले 4 साल में IIMC के बजट में भारी कटौती की: रिपोर्ट

MIB CUTS IIMC BUDGET
Sharing is Important

अविनीश मिश्रा, ग्राउंड रिपोर्ट

ground report exclusive

दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान में पिछले सात दिनों से फीस बढ़ोतरी को लेकर आंदोलन चल रहा है।  कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, जहां 2014-15 में हिंदी पत्रकारिता कोर्स की फीस  55,000 थी, वहीं 2019-20 में यह बढ़कर 95,000 हो गई है। बाकी कोर्स की भी हालात इसी तरह है।  फीस बढ़ोतरी का कारण प्रशासन का चक्रवृद्धि ब्याज फॉर्मूला है, जिसके तहत प्रत्येक साल 10 प्रतिशत राशि बढ़ाई जाती है। 

Source IIMC

आखिर आईआईएमसी जैसे सरकारी संस्थान को चक्रवृद्धि ब्याज फॉर्मूला क्यों लागू करना पड़ा? क्या वजह है जो हर साल बच्चों की फीस बढ़ा दी जाती है? इसकी पड़ताल की है हमारे समाचार सहयोगी अविनीश मिश्रा ने…

मंत्रालय द्वारा आधे से अधिक बजट में कटौती

सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने आईआईएमसी के बजट में काफी कटौती की है। यह कटौती चार वर्षों में तकरीबन 60 प्रतिशत से भी अधिक है। 

2016-17 में जहां सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा आईआईएमसी को कुल बजट के लिए 33 करोड़ रुपये दिए गए थे, वहीं यह आंकड़ा 2018-19 में घटकर लगभग 19 करोड़ हो गया। 2017-18 में मंत्रालय ने आईआईएमसी के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया था। 2019-20 में  मंत्रालय द्वारा आवंटित बजट की स्थिति और भी ख़राब है। 2019-20 के लिए सरकार ने आईआईएमसी को कुल 11 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।

Source MIB
Source MIB

वित्त विभाग के सरकारी सूत्रों की मानें तो लगातार हो रहे बजट कटौती का सबसे बड़ा कारण आईआईएमसी और सूचना प्रसारण मंत्रालय के बीच हुआ समझौता पत्र है। प्रसारण मंत्रालय के ऑडिट विभाग में कार्यरत एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर ग्राउंड रिपोर्ट को बताया,-

“अगर आप मंत्रालय द्वारा आवंटित बजट को अच्छे से देखेंगे तो हमने संस्थान को 2018-19 में 73 प्रतिशत राशि दी है, जबकि समझौता पत्र के अनुसार आईआईएमसी को इससे कम ही मिलना थी।”

अधिकारी, ऑडिट विभाग, सूचना प्रसारण मंत्रालय

क्या है समझौता पत्र?

READ:  How COVID-19 has changed education forever?

आईआईएमसी प्रशासन की मानें तो सूचना प्रसारण मंत्रालय और भारतीय जनसंचार संस्थान के बीच फीस को लेकर एक एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ है, जिसके तहत सूचना प्रसारण मंत्रालय आईआईएमसी को कुल खर्च की 70 प्रतिशत राशि देगी, जबकि 30 प्रतिशत राशि संस्थान को खुद ही उत्पन्न करना है।

आईआईएमसी और मंत्रालय के बीच हुए एमओयू के अलावा और क्या कारण हैं, जिसके चलते मंत्रालय आईआईएमसी बजट में लगातार कटौती कर रहा है। इस सवाल के जवाब में संस्थान के पूर्व महानिदेशक केजी सुरेश कहते हैं-

“अफसरशाही का होना इसका सबसे बड़ा कारण है। संस्थान में आप देखेंगे तो सभी अफसरों को ही बड़े पदों पर रखा गया है। महानिदेशक, अपर महानिदेशक, महानिदेशक के ओएसडी सब अफसरशाही से ही आते हैं, जब अफसर बड़े पदों पर बैठेंगे तो वे अफसर सरकार से अधिक बजट की मांग नहीं कर सकते हैं‌। बस यही कारण है।”

केजी सुरेश, पूर्व महानिदेशक आईआईएमसी

आईआईएमसी के 2016-17 के रेडियो टेलीविजन पत्रकारिता के छात्र रहे दीपांकर पटेल इस सारी प्रकिया को फर्जी करार देते हुए एक ऑडिट कराने की मांग करते हैं। ग्राउंड रिपोर्ट से बातचीत करते हुए दीपांकर कहते हैं, 

“मंत्रालय द्वारा बजट कम करना दर्शाता है कि वर्तमान सरकार नहीं चाहती है कि देश में बच्चे पढ़ाई करें। इससे अच्छा है कि सरकार आईआईएमसी में ताला लगवा दे।”

दीपांकर पटेल, पूर्व छात्र आईआईएमसी

सरकार द्वारा बजट में कटौती का पैसा आईआईएमसी प्रशासन बच्चों की फीस में जोड़ देता है, जिसके कारण प्रत्येक साल बच्चों की फीस आसमान छूते जा रही है। लेकिन आईआईएमसी के अपर महानिदेशक मनीष देसाई इससे इंकार करते हैं। ग्राउंड रिपोर्ट से बातचीत में वे कहते हैं, 

“देखिए, फीस वृद्धि का संबंध बजट कटौती से नहीं है। फीस वृद्धि का फैसला आईआईएमसी की एक्जीक्यूटिव काउंसिल लेती है, जबकि बजट का फैसला सरकार द्वारा लिया जाता है।

मनीष देसाई, अपर महानिदेशक, आईआईएमसी

वर्तमान आंदोलन की बात करें तो हमने 10 प्रतिशत फीस कम करने का ऐलान किया है। लेकिन अपर महानिदेशक के इस ऐलान को वर्तमान में आंदोलन कर रहे छात्र एक छलावे से ज्यादा कुछ नहीं मानते हैं।

READ:  Pharmacy - A Promising Career Path

आंदोलन पर बैठे विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के एक छात्र कहते हैं,

“एडीजी ने जो ऐलान किया है, वो बस एक धोखा है। प्रशासन ने इस बार 20 प्रतिशत फीस बढ़ा दिया था, जब हम आंदोलन पर बैठें तो उन्होंने उसमें से 10 प्रतिशत कम करने की बात कही है। बताइए, यह छलावा नहीं तो और क्या है?”

छात्र, आईआईएमसी

हमने इस मुद्दे पर वहां के कुछ शिक्षकों से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन सभी ने सरकारी गाइडलाइन का हवाला देते हुए बात करने से इंकार कर दिया।

मंत्रालय द्वारा लगातार बजट कटौती के बाद बढ़ी हुई फीस को वापस लेने का फैसला प्रशासन के लिए चुनौती भरा है। वहीं, आंदोलन कर रहे छात्र भी अपनी मांग से पीछे नहीं हटने की बात कह रहे हैं। प्रशासन, मंत्रालय और छात्रों के बीच जारी यह तनातनी कब खत्म होगी यह देखना दिलचस्प है‌।

Watch Video What Ex Students Of IIMC Think About FEE Hike In IIMC

Scroll to Top
%d bloggers like this: