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IIFCO: इफको जल्द ही कर्नाटक में नैनो यूरिया (Nano Urea) उत्पादन स्थापित करेगा

IFFCO, Nano Urea
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IFFCO : केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने कर्नाटक को नैनो यूरिया (Nano Urea) प्रेषण को हरी झंडी दिखाई। वहीं आपको बता दें कि मंत्री ने इफको (IIFCO) को बंगलौर हवाई अड्डे के पास यूरिया उत्पादन (IFFCO Gifts Nano Urea) इकाई शुरू करने के लिए जमीन देने का भी वादा किया। किसानों द्वारा नैनो यूरिया के उपयोग से न केवल मृदा स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता में सुधार होगा। बल्कि रासायनिक उर्वरकों का उपयोग भी कम होगा।

इफको (IIFCO) कर रहा भारत का सपना साकार

“यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। जहां इफको प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर कृषि के सपने को साकार करने की दिशा में काम कर रहा है। वहीं गौड़ा ने कर्नाटक के लिए नैनो यूरिया (Nano Urea) प्रेषण को हरी झंडी दिखाते हुए कहा, कि हम आपको बैंगलोर में हवाई अड्डे के पास एक साइट (भूमि) देंगे। जहां से इफको कर्नाटक से नैनो यूरिया का उत्पादन कर सकता है।

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इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. यूएस अवस्थी ने क्या कहा

इससे पहले इफको ने गौड़ा से कर्नाटक में एक संयंत्र के लिए जमीन देने का अनुरोध किया था। जहां भारत के दक्षिणी हिस्सों के लिए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उत्पादन किया जा सकता है। इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. यूएस अवस्थी ने कहा कि कलोल संयंत्र प्रति दिन 15000 नैनो यूरिया की बोतलों के साथ एक ट्रक भेज रहा है, और जल्द ही संयंत्र हर दिन 10 ट्रक भेजेगा। उन्होंने कहा कि कलोल संयंत्र से प्रतिदिन 6750 टन यूरिया का उत्पादन हो रहा है। जिससे सरकार के सब्सिडी बोझ से 35,000 करोड़ रुपये की बचत होगी, और किसानों को अतिरिक्त 35000 करोड़ रुपये कमाने में मदद मिलेगी।

योजना ने इस खरीफ फसल से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उत्पादन शुरू कर दिया है, और इफको को सफलता की बहुत उम्मीद है। अवस्थी ने कहा कि इसके बाद संयंत्र नैनो यूरिया और नैनो डीएपी दोनों का उत्पादन करेगा।

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आधे घंटे के अंदर बिका स्टॉक

बृजेश कुमार दीक्षित, कृषि आयुक्त, कर्नाटक सरकार, बीएस नकई के अध्यक्ष इफको और दिलीप संघानी के उपाध्यक्ष इफको वर्चुअल फ्लैग ऑफ के दौरान उपस्थित थे। इफको ने पहले उत्तर प्रदेश और जम्मू और कश्मीर राज्यों को नैनो यूरिया शिपमेंट भेजा था। आधे घंटे के भीतर स्टॉक बिक गया।

इफको ने पूरी दुनिया के किसानों (Farmers) के लिए विश्व का पहला नैनो यूरिया तरल किया था प्रस्तुत

अन्नदाताओं को इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) ने बुधवार को IFFCO की 50वीं वार्षिक आम सभा की बैठक में प्रतिनिधि महासभा के सदस्यों की उपस्थिति में पूरी दुनिया के किसानों (Farmers) के लिए विश्व का पहला नैनो यूरिया तरल (IFFCO Gifts Nano Urea) प्रस्तुत किया। इसका बुधवार को लाइव प्रसाण किया गया।

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IFFCO (इफको) ने किसानों को दी Nano Urea पर महत्वपूर्ण जानकारी

कृषि विश्वविद्यालय बांदा, डायरेक्टर इफको(IFFCO) योगेंद्र कुमार, नैनो विशेषज्ञ डा. रमेश रालिया, स्टेट मैनेजर अभिमन्यु राय, डा. आरके नायक ने किसानों (Farmers) को नैनो यूरिया (Nano Urea) पर जानकारी दी। एक एकड़ में लगभग 500 एमएल की शीशी पर्याप्त होती है। सरकार द्वारा प्रति बोरी यूरिया पर दी जाने वाली लगभग 750 रुपये की सब्सिडी अब बचेगी। सरकार को अब लगभग 40 हजार करोड़ रुपये सब्सिडी पर खर्च नहीं करना पड़ेगा।

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IFFCO कर रहा जून से नैनो यूरिया (Nano Urea) को लॉन्च करने की तयारी

इफको के वरिष्ठ प्रबंधक जीपी तिवारी ने बताया कि एक मिली लीटर शीशी की कीमत लगभग 240 रुपये होगी। जो एक बोरी यूरिया का कार्य करेगी। IFFCO नैनो यूरिया का उत्पादन 15 जून से शुरू कर देगा। इसके बाद नैनो यूरिया को जून के महीने में किसानों के लिए लांच करने की तैयारी है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति, भूमिगत जल को बड़ा फायदा होगा। इसकी कीमत भी कम होगी। वहीं यूरिया का छिड़काव करने पर लगभग 35 फीसद ही पौधे उपयोग कर पाते हैं, जबकि शेष मिट्टी में व्यर्थ हो जाता है। खेती में अब नैनो यूरिया तरल का इस्तेमाल किया जाएगा। इसे लेकर प्रयोग सफल रहा है। इफ्को की ओर से एक जुलाई को इसे बाजार में लाने की तैयारी है। इससे खाद पर लागत कम आने की बात कही जा रही है।

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क्या कहना है डॉक्टर विवेक दिक्षित (Vivek Dixit) का

उनका यह भी कहना है कि नैनो यूरिया का फसल में 100 फीसदी इस्तेमाल हो जाता है्र। इसलिए इस दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता। क्षेत्रीय अधिकारी डॉ विवेक दिक्षित ने बताया की इफ्को की ओर से रबी और खरीफ दोनों सीजन की फसलों पर नैनो यूरिया का प्रयोग किया गया। भारत में 11 हजार से अधिक स्थानों पर इसके ट्रायल किए गए। इसमें सफलता के बाद अब एक जुलाई से बाजार में लाने का निर्णय लिया गया है। यानी, एक जुलाई से यह किसानों के लिए उपलब्ध होगी।

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