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IFFCO Nano Urea: 45 किलो यूरिया की जगह नैनो यूरिया की आधा लीटर बोतल होगी पर्याप्त

IFFCO Nano Urea
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IFFCO Nano Urea: 19जून को गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने वर्चुअल मीटिंग में नैनो यूरिया (Nano Urea) प्रेषण को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों के नैनो यूरिया के उपयोग से न केवल मृदा स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता में सुधार होगा। बल्कि रासायनिक उर्वरकों का उपयोग भी कम होगा। इसके साथ ही शनिवार को राज्य मंत्री ने इफको के कलोल संयंत्र का जायजा भी लिया। अब किसान 45 किलो यूरिया की बोरी ढोने की जगह इफ्को की नैनो यूरिया की आधा लीटर की बोतल को बड़े आराम से ढो सकते हैं।

राज्यमंत्री ने लिया जायजा

उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख एल मंडाविया ने शनिवार को गुजरात में इफ्को के कलोल संयंत्र का दौरा किया और नैनो यूरिया के उत्पादन की प्रगति का जायजा लिया। भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफ्को) ने 31 मई को तरल रूप में दुनिया का पहला ‘नैनो यूरिया’ पेश किया था। उन्होंने बताया की इसका उत्पादन इसी महीने से शुरू हो गया है। 

एक बोरी की कीमत 10 प्रतिशत सस्ती

आपको बता दें कि यह इफको की एक पेटेंट की हुई तकनीक है जिसे इसके नैनो बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर, गुजरात में ही विकसित किया गया है। इफ्को ने नैनो यूरिया(IFFCO Nano Urea) लिक्विड की कीमत 240 रुपये प्रति बोतल रखी है, जो पारंपरिक यूरिया की एक बोरी की कीमत से 10 प्रतिशत सस्ती हो गयी है।

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इफको (IFFCO) कर रहा भारत का सपना साकार

यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। जहां इफको प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर कृषि के सपने को साकार करने की दिशा में काम कर रहा है। वहीं गौड़ा ने कर्नाटक के लिए नैनो यूरिया (Nano Urea) प्रेषण को हरी झंडी दिखाते हुए कहा, कि हम आपको बैंगलोर में हवाई अड्डे के पास एक साइट (भूमि) देंगे। जहां से इफको कर्नाटक से नैनो यूरिया का उत्पादन कर सकता है।

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इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. यूएस अवस्थी ने क्या कहा

इफ्को के अनुसार, किसानों के द्वारा नैनो यूरिया के उपयोग से न केवल मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल की उत्पादकता में सुधार होगा बल्कि रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में भी कमी आएगी। इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. यूएस अवस्थी ने कहा कि कलोल में नैनो यूरिया संयंत्र की उत्पादन क्षमता 1.5 लाख बोतल प्रतिदिन की है। कलोल के अलावा, इफ्को ने चालू वित्तवर्ष के अंत तक पहले चरण में उत्तर प्रदेश के अपनी आंवला और फूलपुर सुविधा केन्द्र में नैनो यूरिया संयंत्र बनाने की योजना बनाई है। दूसरे चरण में, वर्ष 2022-23 तक चार और संयंत्रों को चालू किया जाएगा, जिससे 18 करोड़ बोतलों का उत्पादन होगा।

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45 किलो की जगह आधा किलो यूरिया

इफको ने बताया कि किसान आसानी से नैनो यूरिया का उपयोग कर सकते हैं। नैनो यूरिया की आधा लीटर की एक बोतल एक एकड़ खेत में दो बार छिड़काव के लिए पर्याप्त है। इसमें कहा गया है कि अब किसान 45 किलो यूरिया की बोरी ढोने की जगह इफ्को की नैनो यूरिया की आधा लीटर की बोतल को बड़े आराम से ढो सकते हैं।

डॉक्टर यूएस अवस्थी (U.S Awasthi) ने ट्वीट कर दी जानकारी

इफको ने पूरी दुनिया के किसानों (Farmers) के लिए विश्व का पहला नैनो यूरिया तरल किया था प्रस्तुत

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आपको बता दें कि इससे पहले भी अन्नदाताओं को इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर को-आपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) ने  IFFCO की 50वीं वार्षिक आम सभा की बैठक में प्रतिनिधि महासभा के सदस्यों की उपस्थिति में पूरी दुनिया के किसानों (Farmers) के लिए विश्व का पहला नैनो यूरिया तरल (IFFCO Gifts Nano Urea) प्रस्तुत किया था। जो कि बैंगलोर में हुआ था।

IFFCO (इफको) ने किसानों को दी Nano Urea पर महत्वपूर्ण जानकारी

कृषि विश्वविद्यालय बांदा, डायरेक्टर इफको(IFFCO) योगेंद्र कुमार, नैनो विशेषज्ञ डा. रमेश रालिया, स्टेट मैनेजर अभिमन्यु राय, डा. आरके नायक ने किसानों (Farmers) को नैनो यूरिया (Nano Urea) पर जानकारी दी। एक एकड़ में लगभग 500 एमएल की शीशी पर्याप्त होती है। सरकार द्वारा प्रति बोरी यूरिया पर दी जाने वाली लगभग 750 रुपये की सब्सिडी अब बचेगी। सरकार को अब लगभग 40 हजार करोड़ रुपये सब्सिडी पर खर्च नहीं करना पड़ेगा।

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