IFFCO Nano Urea Liquid

IFFCO ने तैयार किया विश्व का सबसे पहला लिक्विड नैनो यूरिया, दुनिया भर के किसानों होगा फायदा

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IFFCO Nano Urea Liquid: देश दुनिया की सबसे बड़ी यूरिया निर्माता कंपनी इफको ने विश्व का सबसे पहला नैनो यूरिया लिक्विड (IFFCO Nano Urea Liquid) तैयार किया है। इससे दुनिया भर के किसानों को फायदा होगा। इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड(इफको) ऑनलाइन-ऑफलाइन मोड में हुई अपनी 50वीं वार्षिक आम बैठक में अपनी प्रतिनिधि महासभा के सदस्यों की उपस्थिति में पूरी दुनिया के किसानों के लिए विश्व का पहला नैनो यूरिया तरल (IFFCO Nano Urea Liquid) लेकर आया है। इफको लिक्विड नैनो यूरिया (IFFCO Nano Urea Liquid) की आधा लीटर की एक बोतल सामान्य यूरिया की एक बोरी जितना काम करने में सक्षम है। इसकी कीमत अधिकतम 240 रुपये तय की गई है। जो कि सामान्य यूरिया की बोरी से 10 फीसदी कम है।

पौधों के पोषण के लिए प्रभावी व असरदार

इफको के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने सच्चे और समर्पित अनुसंधान के बाद नैनो यूरिया तरल को स्वदेशी और प्रोपाइटरी तकनीक के माध्यम से कलोल स्थित नैनो जैवप्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र में तैयार किया है । यह नवीन उत्पाद ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘आत्मनिर्भर कृषि’ की दिशा में एक सार्थक कदम है । इफको नैनो यूरिया तरल को पौधों के पोषण के लिए प्रभावी व असरदार पाया गया है । इसके प्रयोग से फसलों की पैदावार बढ़ती है तथा पोषक तत्वों की गुणवत्ता में सुधार होता है । नैनो यूरिया भूमिगत जल की गुणवत्ता सुधारने तथा जलवायु परिवर्तन व टिकाऊ उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हुए ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा ।

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इससे इतने फायदे होंगे
किसानों द्वारा नैनो यूरिया तरल के प्रयोग से पौधों को संतुलित मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त होंगे और मिट्टी में यूरिया के अधिक प्रयोग में कमी आएगी। यूरिया के अधिक प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषित होता है, मृदा स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है, पौधों में बीमारी और कीट का खतरा अधिक बढ़ जाता है, फसल देर से पकती है और उत्पादन कम होता है । साथ ही फसल की गुणवत्ता में भी कमी आती है । नैनो यूरिया तरल फसलों को मजबूत और स्वस्थ बनाता है तथा फसलों को गिरने से बचाता है।

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सामान्य यूरिया की तुलना में सस्ता, और स्टोरेज में भी आसानी होगी
इफको नैनो यूरिया किसानों के लिए सस्ता है और यह किसानों की आय बढ़ाने में प्रभावकारी होगा । इफको नैनो यूरिया तरल की 500 मि.ली. की एक बोतल सामान्य यूरिया के कम से कम एक बैग के बराबर होगी । इसका अधिकतम मूल्य 240 रुपये तय किया गया है। इसके प्रयोग से किसानों की लागत कम होगी ।‌ नैनो यूरिया तरल का आकार छोटा होने के कारण इसे पॉकेट में भी रखा जा सकता है जिससे परिवहन और भंडारण लागत में भी काफी कमी आएगी ।

परीक्षण में 8 फीसदी अधिक प्रभावी पाया गया
राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली(एनएआरएस) के तहत 20 आईसीएआर संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केन्द्रों में 43 फसलों पर किये गये बहु-स्थानीय और बहु-फसली परीक्षणों के आधार पर इफको नैनो यूरिया तरल को उर्वरक नियंत्रण आदेश(एफसीओ, 1985) में शामिल कर लिया गया है । इसकी प्रभावशीलता का परीक्षण करने के लिए पूरे भारत में 94 से अधिक फसलों पर लगभग 11,000 कृषि क्षेत्र परीक्षण(एफएफटी) किये गये थे । हाल ही में पूरे देश में 94 फसलों पर हुए परीक्षणों में फसलों की उपज में औसतन 8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है ।

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जून में शुरू होगा उत्पादन
इफको नैनो यूरिया का उत्पादन जून 2021 तक आरंभ होगा और शीघ्र ही इसका व्यावसायिक विपणन भी शुरू हो जाएगा । इफको ने किसानों के लिए 500 मि.ली. नैनो यूरिया की एक बोतल की कीमत ₨ 240/- निर्धारित की है जो सामान्य यूरिया के एक बैग के मूल्य से 10 प्रतिशत कम है । समिति ने इस उत्पाद के बारे में किसानों को पूरी जानकारी देने के लिए एक व्यापक देशव्यापी प्रशिक्षण अभियान चलाने की योजना बनायी है । ये उत्पाद इफको के ई-कॉमर्स प्लेटफार्म www.iffcobazar.in के अतिरिक्त मुख्य रूप से सहकारी बिक्री केन्द्रों और अन्य विपणन माध्यमों से किसानों को उपलब्ध कराये जाएंगे ।

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खास बातें-

• मिट्टी में यूरिया के प्रयोग में कमी लाने की माननीय प्रधानमंत्री जी की अपील से प्रेरित होकर इफको ने अनुसंधान के जरिये नैनो यूरिया तरल का विकास किया ।
• प्रभावी और असरदार नैनो यूरिया का विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘आत्मनिर्भर कृषि’ की तर्ज पर स्वदेशी और प्रोपाइटरी तकनीक के माध्यम से गुजरात के कलोल स्थित इफको नैनो जैवप्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र(एनबीआरसी) में किया गया है ।
• नैनो यूरिया की 500 मि.ली. की एक बोतल सामान्य यूरिया के कम से कम एक बैग को प्रतिस्थापित करेगी।
• पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग तथा मृदा, जल व वायु प्रदूषण को कम करने में सक्षम होने के कारण यह पौधों के पोषण के लिए एक टिकाऊ समाधान है।
• भूमिगत जल की गुणवत्ता सुधारने तथा जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हुए ग्लोबल वार्मिंग को काफी हद तक कम करने में मददगार ।
• इसके प्रयोग से फसल उपज औसतन 8 प्रतिशत बढ़ेगी, फसलों की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा लागत में कमी आएगी ।
• किसानों की आय में पर्याप्त वृद्धि होगी ।
• परिवहन और भंडारण लागत में काफी कमी आएगी ।

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