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IAS अफसर : कलेक्टरी छोड़ राजनीति में आए थे, जनता ने कहीं का नहीं छोड़ा

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रायपुर, 15 दिसंबर। कलेक्टर की नौकरी छोड़ी और बीजेपी से विधायकी के लिए खड़े हो गए। कुर्सी तो नहीं मिली पर साथ में यूपीएससी से जो मुकाम हासिल किया उसे भी गंवा दिया। हम बात कर रहे हैं रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओम प्रकाश चौधरी की, इस बार छत्तीसगढ़ की खरसिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे। वे कांग्रेस उम्मीदवार उमेश पटेल से 16 हजार 967 मतों से हार गए। उमेश पटेल को 94201 मत तो ओपी चौधरी को 77234 मत मिले।

आपको बता दें ओपी चौधरी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की मौजूदगी में कमल का दामन थामा था। वे 2005 बैच के आईएएस अधिकारी थे और 25 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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ओपी चौधरी से जुड़ी खास बातें

– आपकों बता दें ओपी चौधरी रायपुर कलेक्टर थे। इससे पहले वे दंतेवाड़ा में कलेक्टर रह चुके थे।
– बता दें, पिछले विधानसभा में वह जनसंपर्क विभाग में पदस्थ थे।
– कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ में ओपी युवाओं के बीच में काफी लोकप्रिय थे। इसके साथ ही राज्य में सीएम के मनपसंद अफसरों में गिने जाते थे।
– उन्हें छत्तीसगढ़ की जनता उनके कामों की वजह से लोकप्रिय मानती थी। उन्होंने दंतेवाड़ा की एजुकेशन सिटी और रायपुर में गरीब बच्चों को स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के तहत दाखिला दिलवाने की बात की और अपनी इस मुहिम का प्रतिनिधित्व किया।
उन्हें नक्सल प्रभावित इलाके में अपने बेहतरीन काम के लिए प्रधानमंत्री पुरूस्कार भी मिल चुका है।

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समुदाय को देखते हुए बीजेपी ने जताया था भरोसा

जानकारी के मुताबिक कि बीजेपी ने खसारिया सीट से कांग्रेस गढ़ में चौधरी के भरोसे कांग्रेस के गढ़ में सेंध मारी थी। यहां अघरिया समुदाय का वर्चस्व होने की वजह से चौधरी को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया था। खरसिया सीट से नंदकुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल वर्तमान विधायक हैं। खरसिया सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। चौधरी स्थानीय होने के साथ युवा आइकॉन के रूप में भी यहां लोकप्रिय हैं।