Central Vista Project: नये संसद के लिए प्रत्यारोपित होंगे 404 पेड़

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नए संसद भवन(Central Vista Project) का निर्माण इसी साल दिसंबर से शुरू हो जाएगा। अक्टूबर 2022 तक नए संसद का निर्माण पूरा होने की संभावना है। वहीं दूसरी ओर नए संसद भवन(Central Vista Project) के लिए कुल 404 पेड़ प्रत्यारोपित किए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार के द्वारा भी अनुमति दे दी गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट(Central Vista Project) की अनुमति देते वक्त कहा कि सिर्फ़ 233 पेड़ ही लगाए जाएंगे, लेकिन अब पेड़ों कि कुल संख्या 404 है।

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परियोजना के प्रस्तावक ने विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति को सूचित कर बताया कि प्लॉट नंबर 118 पर 333 पेड़ हैं। इनमें से 100 पेड़ों को बरकरार रखा जाएगा और 233 पेड़ों को प्रत्यारोपित किया जाएगा। इसके साथ किसी भी पेड़ को नहीं काटने की बात भी कही गई थी। इसके अलावा, अन्य वनस्पतियों से भी नए संसद भवन को विकसित करने के लिए मंजूरी लेनी होगी, मंत्रालय ने 17 जून को परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी में कहा था।

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दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने 16 सितंबर को एक अधिसूचना जारी कर 404 पेड़ों के प्रत्यारोपण की अनुमति दी थी। अधिसूचना के अनुसार, प्रत्यारोपित वृक्षों के लिए प्रतिपूरक वृक्षारोपण के रूप में, 4,040 पौधे लगाए जाएंगे।‌ दिल्ली सरकार के अधिकारी द्वारा बताया गया कि सरकार प्रत्यारोपित नीति के अनुसार 80% पेड़ों को 1 साल बाद भी जीवित रहना पड़ता है। इसीलिए यह सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण होंगे। यह भी बताया की वहां पर 5 से लेकर 50 साल तक के विभिन्न आकार के पेड़ हैं। उखाड़े गए पेड़ों को उस स्थल से पौधरोपण के लिए बाहर ले जा रहे हैं।

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वहीं कुछ विशेषज्ञों के द्वारा सर्दियों के दौरान प्रत्यारोपण होने वाले पेड़ों के जीवित रहने पर अलग अलग राय है।

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दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एनवायरमेंट मैनेजमेंट के डिग्रदेड इकोसिस्टम के सेवानिवृत्त प्रोफेसर सी.आर बाबू ने इस पर राय देते हुए कहा की मैं पेड़ों के प्रत्यारोपण के पक्ष में नहीं हूं खासकर के पुराने पेड़ों के। मेरे अनुभव से प्रत्यारोपण कभी भी भारत में कामयाब नहीं हुई है। प्रत्यारोपण के जीवित रहने की दर सर्दियों के दौरान कम हो जाती है क्योंकि इस वक्त जड़ गठन बहुत धीमी गति से होती हैं।


विजय धस्माना गुरुग्राम की अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क के क्यूरेटर ने अलग राय देते हुए कहा कि अगर मिट्टी को नमी प्रदान कर दी जाए तो यह प्रत्यारोपण का सबसे बुरा समय नहीं है। लेकिन यह आदर्श रूप से जनवरी के अंत और मार्च के दौरान करना चाहिए। जवान पेड़ों का प्रत्यारोपण करना काफ़ी आसान है, लेकिन ऐसा करने से पुराने और बड़े पेड़ मर सकते हैं।


कंचन कोहली, नीति अनुसंधान के केंद्र की वरिष्ठ शोधकर्ता, ने कहां कि सरकार का पेड़ों का प्रत्यारोपण करना सही नहीं है क्योंकि कई मुद्दे अभी भी उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है।

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