देश में इतने हज़ार अर्द्धसैनिक बलों ने की ख़ुदकुशी, देखें चौकाने वाले आंकड़े

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि पिछले 10 साल में अर्द्धसैनिक बलों के 1,205 जवानों ने खुदकुशी की है जिनमें सर्वाधिक मामले वर्ष 2021 में आए। ये बेहद गंभीर और चौकाने वाली बात है।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ो से पता चलता हैं कि पिछले एक दशक में किसी भी वर्ष की तुलना में 2020 और 2021 में कहीं अधिक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों ने आत्महत्या के चलते जान गंवाई। इसके साथ ही पिछले 10 वर्षों में 1,200 से अधिक कर्मियों की मौत हुई।

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देश की सुरक्षा में हर दम तैयार रहने वाली सीएपीएफ में सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, एनएसजी और असम राइफल्स (एआर) जैसे बल शामिल हैं। कुल मिलाकर उनके पास नौ लाख कर्मी हैं।

फ्रेट्रीसाइड  की घटनाओं में तेज़ी देखी गई

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस महीने फ्रेट्रीसाइड (किसी साथी पर हमला करना)  की घटनाओं में बीएसएफ के सात जवान मारे गए हैं। 2019 से अब तक बलों में ऐसी 25 से अधिक घटनाएं हुई हैं।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि 2020 में 143 जवानों ने खुदकुशी की। इससे पहले 2019 में 129 मामले, 2018 में 96 मामले, 2017 में 125 मामले, 2016 में 92 मामले, 2015 में 108 मामले , 2014 में 125 मामले, 2013 में 113 मामले और 2012 में 118 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे।

वर्ष 2021 में ऐसे 156 मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि घरेलू समस्याएं, बीमारी और आर्थिक समस्याएं आत्महत्या के कुछ प्रमुख कारण रहे हैं। यह आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब हाल की घटनाओं की पृष्ठभूमि में बीएसएफ जवानों में तनाव का मुद्दा चर्चा में रहा है।

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साल 2019 में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सीएपीएफ कर्मियों के लिए उपलब्ध अवकाश मौजूदा 75 दिनों से बढ़ाकर 100 दिन किए जाएंगे, हालांकि इस पर अब तक अमल होना बाकी है।

सीएपीएफ द्वारा रक्षाकर्मियों की तर्ज पर इसके कर्मियों के आकस्मिक अवकाश को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन करने का प्रस्ताव भी गृह मंत्रालय द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है।

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