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मस्लिम वोट: यूपी में कितनी विधानसभाओं पर मस्लिम वोटों का दबदबा है ?

मस्लिम

उत्तर प्रदेश में कितनी विधानसभाओं पर मस्लिम वोटों का दबदबा है ?आइये आपको बताते हैं हर ज़िले में किन विधानसभाओं पर मुस्लिम वोटों का दबदबा रहा है।

देश में आबादी के लिहाज़ से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है। नेताओं ने एक तरह की भगदड़ सी पैदा कर दी है। बीजेपी के नेता सपा में तो सपा के बीजेपी में तो कांग्रेस के नेता भी इधर-उधर जा रहे हैं।

सात चरणों में होने वाले इस विधानसभा का चुनाव ख़ुमार दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। जहां बीजेपी (BJP) के सामने अपनी सत्ता को बचाने की चुनौती है, वही विपक्षी दलों के सामने बीजेपी को सत्ता से उखाड़ने की बड़ी चुनौती है।

बीजेपी की कोशिश यूपी में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण (Communal Polarization) करा कर एक बार फिर चुनाव जीतने की है। जिसके लिए बीजेपी हर हथकंडा अपना रही है।

वहीं बीजेपी को टक्कर दे रही समाजवादी पार्टी छोटी पार्टियों के गठबंधन और मुस्लिमों के सहारे बीजेपी को पटकनी देने की रणनीति बना रही है।

बीएसपी और कांग्रेस भी अपना वजूद बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं। वहीं ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM)भी अपना खाता खोलने के लिए मैदान में एड़ी चोटी का जोर लगा रही है।

इस बार के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बहुल जिलों की विधानसभा सीटें अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। पिछले दो विधानसभा चुनाव में भी इन जिलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

कितनी विधानसभाओं पर मस्लिम वोटों का दबदबा है ?

वैसे तो उत्तर प्रदेश में सिर्फ़ एक जिला है जिसे पूरी तरह मुस्लिम बहुल कहा जा सकता है। वह है रामपुर। इस ज़िले में मुसलमानों की आबादी 50 फीसदी से ज्यादा है।

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लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीतिक भाषा में उन जिलों को मुस्लिम बहुल कहा जाता है जहां जातीय समीकरण के हिसाब से मुसलमानों की आबादी ज्यादा है।


आमतौर पर यह माना जाता है कि मुसलमान बीजेपी को हराने के लिए किसी एक पार्टी को एक मुश्त वोट करते हैं। इसलिए 20 फीसदी या इससे ज्यादा आबादी वाले जिलों को मुस्लिम बहुल मान लिया जाता है।

उत्तर प्रदेश में राजनीति पूरी तरह जाति समीकरण आधारित है। किसी भी एक जाति की आबादी का आंकड़ा मुस्लिम आबादी से कहीं कम है।इसलिए 20 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले जिलों और विधानसभा सीटों को मुस्लिम बहुल माना जाता है।

इन सीटों पर मुस्लिम वोट हार जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लिहाज़ा हर पार्टी यहां उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनाव प्रचार तक के लिए ख़ास रणनीति बनाती है।

किस ज़िले में कितना मुस्लिम वोट ?

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की आबादी 19.26 फीसदी है। सूबे के 29 जिलों में मुसलमानों की आबादी इस औसत से ज्यादा है। मुसलमानों की आबादी रामपुर में सबसे ज्यादा 50.57 फीसदी है।

मुरादाबाद और संभल में 47.12 फीसदी, बिजनौर में 43.03, सहारनपुर में 41.95, मुजफ्फरनगर व शामली में 41.30 और अमरोहा में 40.78 फीसदी है। इनके अलावा 5 जिलों में मुसलमानों की आबादी 30 से 40 फीसदी के बीच है।

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इनके अलावा 12 ज़िलों में मुसलमनो की आबदी 20 से 30 फीसदी के बराबर है। कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां मुसलमानों की आबादी 19 फीसदी से ज्यादा और 20 फीसदी से कम है। सीतापुर में मुस्लिम आबादी 19.93 फीसदी, अलीगढ़ में 19.85 फीसदी, गोंडा में 19.76 फीसदी और मऊ में 19.43 फीसदी है।

इन 29 जिलों में विधानसभा की कुल 163 सीटें हैं। इनमें से 31 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। जो पार्टी इनमें से ज्यादा सीटें जीतेगी सत्ता पर उसी का क़ब्ज़ा होगा। पिछले दो विधानसभा चुनाव के नतीजे तो कम से कम यही बताते हैं।

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