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क्या कोरोना से निपटने में असफल रहा स्वास्थ्य मंत्रालय? केस 2 लाख से पार…

किसान आंदोलन और कोरोना
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल-2019 के डेटा के अनुसार भारत में कुल 7,13,986 सरकारी अस्पताल के बेड हैं। यानी 1000 लोगों पर केवल 0.55 बेड है। ये स्थिति उन 12 राज्यों के हॉस्पिटल बेड की संख्या बताती है जिनमें देश की 70% जनता रहती है, इन राज्यों में बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, ओड़िशा, असम, मणिपुर, हरियाणा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश व राजस्थान शामिल हैं।

Kanishtha Singh, Ground Report

भारत में अब तक कोरोना वायरस(Coronavirus) के मामले 2.08 लाख हो चुके हैं. जिनमें 1 लाख लोगों को ठीक किया जा चुका है साथ ही कुल मौतें 5,815 है। देश में चार चरण का लाॅकडाउन ख़त्म होने के बाद अब अनलॉक-1(Unlock-1) के बावज़ूद भी भारत में कोरोनावायरस के मामले रोज़ नए रिकार्ड बना रहे हैं। कोरोना की इस लड़ाई में सबसे अहम भूमिका निभाता है देश का स्वास्थ्य विभाग। लगातार बढ़ते मरीजों के साथ हॉस्पिटल में बेड और वेंटिलेटर की कमी के साथ साथ पीपीई किट में खामियां, हमें अपनी स्वास्थ्य सेवाओं पर विचार करने पर मजबूर करती हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल-2019 के डेटा के अनुसार भारत में कुल 7,13,986 सरकारी अस्पताल के बेड हैं। यानी 1000 लोगों पर केवल 0.55 बेड है।
ये स्थिति उन 12 राज्यों के हॉस्पिटल बेड की संख्या बताती है जिनमें देश की 70% जनता रहती है, इन राज्यों में बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, ओड़िशा, असम, मणिपुर, हरियाणा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश व राजस्थान शामिल हैं। इन आकड़ों के अनुसार हर 1000 मरीजों पर, पश्चिम बंगाल में 2.25, सिक्किम में 2.34, दिल्ली में 1.05, केरल में 1.05, तमिलनाडु में 1.1 बेड हैं।

भारत में 35,699 से 57,119 आईसीयू बेड और 17,850 से 25,556 वेंटिलेटर की संख्या है, जो कोरोना की इस भीषण महामारी से बचाव के लिए काफी कम हैं। भारत में कोरोनावायरस को फ़ैलते हुए करीब 4 महीने हो गए हैं और मरीज़ों की संख्या हर रोज़ बढ़ने पर ही है। 3 जून 2020 तक कुल 4,103,233 सेंपल लिए गए जिनमें 216,919 पॉजिटिव पाए गए. यानी 1 अरब लोगों पर केवल 3,033 टेस्ट, पॉजीटिव टेस्ट की दर 5.29 प्रतिशत है।

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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय लगातार इस बात की पुष्टि कर रहा है कि कोरोना की बढ़त बाक़ी देशों के मुकाबले काफ़ी कम है और इस तर्ज़ पर भारत में कोरोना का चरम पर पहुंचना काफ़ी दूर है। लेकिन देश में कोरोना के हर रोज़ बढ़ते ये मामले बेहद भयावह हैं। कोरोना के मामलो में भारत पूरे विश्व में सातवे स्थान पर है, वहीँ ऐक्टिव मामलों में भी भारत का 5वां स्थान है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार भारत में केस मिलने की संख्या कम है, पर इसके पीछे का असल कारण है टेस्ट में कमी, देश में 1 अरब लोगों पर सिर्फ़ 117 केस हैं। भारत में लगातार केस की बढ़ोतरी हर तरफ़ से स्वास्थ विभाग की नाकामी दर्शाती हैं। इस तरह के विफल प्रयासों से हम इस महामारी से ख़ुद को और देश को किस प्रकार बचा पाएँगे ये चिंतनीय है।

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