वामपंथियो का गढ़ बंगाल

वामपंथियो के गढ़ बंगाल में भाजपा ने कैसे तैयार की अपनी राजनीतिक ज़मीन?

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पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभी से गहमागहमी शुरू हो गई है। बंगाल का चुनाव इस बार सबसे अधिक चर्चा का केंद्र रहने वाला है। सीधा मुक़ाबला टीएमसी और बीजेपी के बीच माना जा रहा है। आइये जानते हैं वामपंथियो के गढ़ का कहे जाने वाले पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक ज़मीन कैसे की तैयार।

विधानसभा चुनाव में कुछ महीने बाकी हैं और बीजेपी ने ममता बनर्जी का गढ़ समझे जाने वाले दक्षिण बंगाल को घेरने के लिए सेना तैयार कर ली है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हाल ही में दक्षिण बंगाल का दो दिवसीय दौरा किया। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भगवा पार्टी के नेताओं के बीच वाकयुद्ध से इस जंग की शुरुआत भी हो चुकी है। हालही में भाजपा नेता व गृह मंत्री अमित शाह ने भी बंगाल में रोड़ शो करके ममता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

‘अबकी बार, दो सौ पार’ के नारे के साथ मिशन बंगाल के लिए निकली भाजपा ने राज्य के विभिन्न दलों में सेंध लगाकर अपनी ताकत बढ़ाने शुरू कर दी है। हालही में भाजपा नेता व गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में तृणमूल के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी के साथ एक सांसद और विधायकों ने भाजपा का दामन थामा। इससे साफ है कि राज्य में माहौल बदल रहा है और भाजपा तेजी से मज़बूती की तरफ बढ़ रही है।

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बंगाल में भाजपा ज़मीनी स्तर पर मज़बूत नहीं

बीते दस साल में तृणमूल कांग्रेस को पहली बार सबसे कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है। बाहर से भाजपा तो उसे चुनौती दे ही रही है उसके भीतर का असंतोष भी बाहर आने लगा है। बीते पांच साल में उसके कई सांसदों और विधायकों के पार्टी छोड़ने से साफ है कि अब की बार ममता बनर्जी को सत्ता में रहते हुए सबसे कड़ा मुकाबला करना पड़ेगा।

दरअसल पश्चिम बंगाल में भाजपा ज़मीनी स्तर पर उतनी मजबूत नहीं है, जितनी कि वह अन्य राज्यों में रही है। कई जिलों में तो उसका संगठन भी कमजोर है। ऐसे में उसे अपनी ताकत बढ़ाने के लिए दूसरे दलों के मज़बूत नेताओं और कार्यकर्ताओं की जरूरत है। बंगाल में बीजेपी लगातार अपना संगठन खड़ा करने का प्रयास कर रही है।

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भाजपा नेता और गृह मंत्री अमित शाह ने भी बंगाल चुनावों को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है। इससे साफ है कि पार्टी का पूरा ध्यान अब बंगाल पर रहने वाला है। बिहार विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद अब सियासी चर्चा का केंद्र पश्चिम बंगाल हो गया है, जहां अप्रैल-मई 2021 में विधानसभा चुनाव होना है।

मुकाबला भाजपा और तृणमूल के बीच ही रहने वाला है

बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस 10 साल से सत्ता में है। बंगाल की विधानसभा का कार्यकाल मई 2021 में खत्म हो रहा है। अगर 2016 के विधानसभा चुनावों और 2019 के लोकसभा चुनावों की तुलना करें तो यह तय है कि मुकाबला भाजपा और तृणमूल के बीच ही रहने वाला है।

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भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनावों में 18 सीटें हासिल कीं थी। वहीं, तृणमूल कांग्रेस की सीटें 34 से घटकर 22 रह गईं। तृणमूल कांग्रेस ने 44.91% वोट हासिल किए, जबकि भाजपा ने 40.3% वोट। भाजपा को कुल 2.30 करोड़ वोट मिले जबकि तृणमूल को 2.47 करोड़ वोट। खास बात यह रही कि भाजपा ने राज्य की 128 विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल की, जबकि तृणमूल की बढ़त घटकर सिर्फ 158 सीटों पर रह गई थी।

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