How are election marks allotted?

चुनाव चिन्ह कैसे किए जाते हैं आवंटित? समझें सारा गणित..

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हाल ही में नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में कमल (भाजपा), हाथ (कांग्रेस),  तीर (जेडीयू) और लालटेन (आरजेडी) के बीच चलते नोकझोंक वाले तालमेल को तो हम अक्सर देखते ही आए हैं, परंतु इस बार बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों में जो कि 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को है, में कुछ पार्टियां नए एवं आकर्षित चुनाव चिन्हों जैसे चपाती रोलर, शिमलामिर्च, चूड़ियां, बेबी वॉकर के साथ नजर आएंगी। इस बार चुनाव क्षेत्र में लगभग 60 अलग-अलग पाटिया हिस्सा ले रही है।

विभाजित चुनाव चिन्ह

चुनाव चिन्ह संशोधन आदेश 2017 के अनुसार चुनाव चिन्ह दो प्रकार के हैं- पहला आरक्षित और दूसरा मुक्त चुनाव चिन्ह। इन चिन्हों की सूची चुनाव आयोग के पास होती है।  आरक्षित चुनाव चिन्ह वह है जो किसी भी मान्य पार्टी द्वारा सालों से उपयोग में लिया जा रहा है और मुक्त चुनाव चिन्ह वह है जो किसी भी पार्टी को अब तक आवंटित नहीं किए गए।

आवंटित चुनाव चिन्ह

 चुनाव आयोग के पास चुनाव चिन्हों की ऐसे सूची होती है जो सरल, याद करने में आसान और किसी भी पार्टी को आवंटित नहीं किए गए हो।

इस वर्ष 243 सीटों के बीच मुकाबले में एक गैर मान्यता प्राप्त पार्टी भारतीय आम आवाम पार्टी को चुनाव चिन्ह के रूप में “शिमला मिर्च” आवंटित की गई है। वही हिंदू समाज पार्टी को “ओखली और मुसली” दिया है, आम आदमी मोर्चा को “रोटी रोलर”, राष्ट्रीय जन विकास पार्टी को “बेबी वॉकर” आवंटित किया गया है।

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पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव में शिवसेना को “धनुष और तीर”को चुनाव चिन्ह के रूप में दर्शाने से रोक दिया था लेकिन इस बार उन्हें भी चुनाव चिन्ह के रूप में “ट्रंपेट” आवंटित किया गया है।

राजनीतिक पार्टियों को किस प्रकार चिन्ह आवंटित होते हैं?

सन 1951-52 में भारत के पहले राष्ट्रीय चुनावों के बाद से ‘चुनाव चिन्ह’ चुनाव प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा बन गया। सन 1968 में चुनाव आयोग द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए जिसके अनुसार चुनाव चिन्ह प्राप्त करने के लिए किसी भी पार्टी को नामांकन पत्र दाखिल करने के समय चुनाव आयोग की निशुल्क प्रतीकों की सूची में से किसी एक प्रतीक को चुनना पड़ता है, जिस प्रकार पार्टी आती रहती  है उसी प्रकार चुनाव चिन्ह आवंटित होते रहते है।

पार्टी विभाजित हो जाए तो  चुनाव चिन्ह का क्या होगा?

अगर कभी भी कोई मान्यता प्राप्त पार्टी विभाजित होती है तो चुनाव आयोग उस चुनाव चिन्ह पर निर्णय लेता है कि पार्टियों में से किस पार्टी को चुनाव चिन्ह आवंटित किया जाए। समाजवादी पार्टी का विभाजन होने के वक्त अखिलेश यादव को चुनाव चिन्ह साइकिल आवंटित की गई थी।

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वर्षों से हो रहे चुनावों में चुनाव चिन्ह की महत्वता अलग ही मुखराम अशिक्षित लोगों से भरा है मानव कुछ लोग सिर्फ चीन को ही पसंद करके अपना वोट बिना सोचे समझे डाल देते हैं।

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Ayush verma Report

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